साझेदारी फर्म का समापन - winding up of partnership firm
साझेदारी फर्म का समापन - winding up of partnership firm
साझेदारों के आपस में किये गए समझौते के भंग होने की दशा में साझेदारी का अंत हो जाता है, परन्तु फर्म का अंत केवल उसी दशा में होता है जबकि समस्त साझेदार साझेदारी में कम करना अस्वीकार कर देते हैं। इस प्रकार साझेदारी के अंत एवं फर्म के अंत में अंतर होता है । फर्म की समाप्ति - भारतीय साझेदारी अधिनियम की धारा 39 के अनुसार, “किसी फर्म के सभी साझेदारों के बीच साझेदारी की समाप्ति ही फर्म की समाप्ति कहलाती है।"
साझेदारी की समाप्ति - "जब किसी साझेदार के पृथक होने के पश्चात शेश साझेदार फर्म का कारोबार चलते रहते हैं तो इसे साझेदारी की समाप्ति कहते हैं।" इस प्रकार, साझेदारी की समाप्ति में केवल साझेदारों के संबंधों में परिवर्तन आता है तथा फर्म चालू रहती है।
अतः साझेदारी के समापन पर फर्म का समापन हो जाना आवश्यक नहीं है किन्तु फर्म के समापन पर साझेदारी का भी अनिवार्य रूप में समापन हो जाता है।"
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