एडसैक (1947-49) - EDSAC , UNIVAC
एडसैक (1947-49) - EDSAC , UNIVAC
कैंब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के समूह जिसके अध्यक्ष प्रोफेसर मौरिस विल्केस थे के द्वारा इस मशीन का आविष्कार 1949 मे किया गया. इस कंप्यूटर का विकास यु.एस.ए. के एडवक (EDVAC) कंप्यूटर के साथ हुआ. इसके विकास में ब्रिटिश वैज्ञानिक का योगदान था.
UNIVAC (1951)
युनिएक कंप्यूटर को प्रथम डिजिटल कंप्यूटर खा जा सकता है। प्रथम युनिएक कंप्यूटर को जनगणना ब्यूरो के कार्यालय में १९५१ में स्थापित किया गया. यह इसे १० वर्षो तक प्रयोग में लाया जाता रहा. युनिएक कंप्यूटर का सर्वप्रथम वाणिज्यिक उपयोग १९५४ में यु.एस.ए के कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा किया गया.
१९५२ IBM ने IBM-७०१ का विकास किया जोकि युनिएक कंप्यूटर १ का विकसित रूप है। इसके बाद जल्दी-जल्दी युनिएक कंप्यूटर तथा IBM ७०० श्रृंखला के अनेक कंप्यूटर बाज़ार में आए. वर्ष १९५३ में IBM ने 1000 कंप्यूटर बेचे थे.
कंप्यूटर वास्तव में 20 वीं सदी के अंतिम दो दशकों में महान आविष्कार के रूप में आया। अबैकस का इतिहास 2500 साल से अधिक पहले का है अबैकस एक साधारण माला और तारों से बना कैलकुलेटर है, जो आज भी दुनिया के कुछ भागों में प्रयोग किया जाता है। एक प्राचीन अबैकस और एक आधुनिक कंप्यूटर के बीच का अंतर विशाल लगता है, लेकिन दोनों का सिद्धांत एक ही है कि मानव मस्तिष्क की तुलना में अधिक तेजी से गणना या किसी कार्य को बार-बार करने में सक्षम होना है।
अबैकस का आविष्कार लगभग 500 ईसा पूर्व मध्य पूर्व में हुआ था. यह 17 वीं सदी के मध्य तक सबसे तेजी से गणना करने वाला यन्त्र था। 1642 में, 18 वर्ष की आयु में फ्रांसीसी वैज्ञानिक और दार्शनिक ब्लेस पास्कल (1623-1666) ने प्रथम व्यावहारिक यांत्रिक कैलकुलेटर, पास्कलाइन आविकृत किया है. इसका आविष्कार अपने पिता जो कर संग्राहक थे, को रकम की गणना करने में मदद करने के लिए किया था। मशीन में इंटरलॉकिंग कोम्स लगे थे जिससे जोड़, घटाव दशमलव वाले संख्याओं का किया जा सकता था.
जर्मन गणितज्ञ और दार्शनिक गाटफ्रीड लिबनिज (1646-1716) ने १६७१ में इसी तरह की मशीन ले कर आए जो कि पास्कलाइन से उन्नत किस्म का था इसमें कोग्स के स्थान पर stepped drum का इस्तेमाल किया गया था. लिबनिज की मशीन पास्कल के मशीन से अधिक शक्तिशाली थी ये मशीन जोड़ व घटाव के अलावा गुणा तथा भाग करने में सक्षम थी इसमें एक और खासियत थी कि इसमें मेमोरी का प्रयोग किया गया था.
लिबनिज विश्व के प्रथम यांत्रिक कैलकुलेटर के आविष्कार कर्ता रूप के में जाना जाता है इसके अलावा दशमलव संख्या को बाइनरी कोड में निरपित करने के सिध्दांत देने के लिए भी जाना जाता है। जबकि लिबनिज, इसका उपयोग अपने कैलकुलेटर में नहीं किया था. लिबनिज के मरने के उपरांत एक अंग्रेज़ जॉर्ज बूले (१८१५-१८६४) ने इस विचार को आगे बढ़ाया और गणित की एक नयी शाखा बूलियन अलजेब्रा (Boolean Algebra) का विकास किया। आधुनिक कंप्यूटर को निर्णय लेने की क्षमता हासिल करने में बाइनरी कोड एवं बूलियन अलजेब्रा का बहुत बड़ा योगदान था जबकि १९वीं शताब्दी में ये विचार उस समय से कहीं आगे का था क्यो कि गणितज्ञ और कंप्यूटर वैज्ञानिक को इसके वास्तविक प्रयोग को समझाने में 50 से 100 साल का वक्त लगा था.
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