अधिनियम की धारा 241 के अंतर्गत - Under section 241 of the Act

अधिनियम की धारा 241 के अंतर्गत - Under section 241 of the Act

कुप्रबंधन का आरोप लगाने के लिए यह अनिवार्य है कि शक्ति का अनुचित दुरूपयोग किया गया हो और कंपनी के प्रबंधन के लिए उत्तरदायी व्यक्ति अनिवार्यतः कपट, अपाहरण (Misappori attic) तथा कर्तव्य भंग करने के दोषी हों।


यह उल्लेखनीय है कि इन धाराओं के अंतर्गत केन्द्रीय सरकार/ ट्रिब्यूनल को ऐसे मामलों में भी हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया है जहाँ शिकायताधीन अत्याचार अथवा कुप्रबंधन लोकहित के प्रतिकूल हो। कंपनी को आजकल केवल लाभ अर्जित करने का साधन मात्र नहीं माना जाता अपितु इसे समाज की आवश्यकताएं पूरी करने वाली एक सजीव सामाजिक एवं आर्थिक ईकाई समझा जाता है जो समाज द्वारा अपेक्षित सेवाओं और वस्तुओं की पूर्ति ऐसे मूल्य पर करती है जिसे उपभोक्त देने का इच्छुक हो और जिसके लिए उसमें सामर्थ्य हो।


एन. आर. मूर्ति बनाम औद्योगिक विकास कारपोरेशन ऑफ उड़ीसा लिमिटेड वाद के तथ्य इस संबंध में उल्लेखनीय है। कंपनी ने विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से बहुत बड़ी मात्रा में ऋण प्राप्त किए थे और लोकहित की दृष्टि से यह आवश्यक था प्राप्त ऋण का समुचित उपयोग किया जाए। प्रबंध संचालक और सभापति के बीच आपसी मतभेदों के कारण कंपनी के उलादन कार्य को शुरू करने में देरी हुई। इस संबंध में यह निर्णय दिया गया कि कंपनी का कारोबार कंपनी के हितों एवं लोकहित के प्रतिकूल चलाया जा रहा है।