धारा 245 के उपबंध - provisions of section 245
धारा 245 के उपबंध - provisions of section 245
i. निर्दिष्ट संख्या में सदस्य अथवा जमाकर्ता अथवा उनका कोई वर्ग सदस्यों या जमाकर्ताओं की ओर से ट्रिब्यूनल के समक्ष उस दशा में आवेदन कर सकता है जब उनका यह विचार हो कि प्रबंधकीय व्यक्तियों द्वारा कंपनी का करोबार कंपनी या इसके सदस्यों या जमाकर्ताओं के हितों के विपरीत तरीके से चलाया जा रहा है। ऐसे आवेदन के माध्यम से वे निम्नलिखित कोई या सभ आदेश प्राप्त करने का अनुरोध कर सकते हैं:
क) कंपनी के ज्ञापन-पत्र या अंतर्नियमावली के अधिकारीत कोई कार्य किये जाने से कंपनी को रोकना
ख) कंपनी की अंतर्नियमावली या ज्ञापन पत्र के किसी उपबंध का उल्लंघन करने से कंपनी को रोकना:
ग) कंपनी की अंतर्नियमावाली या ज्ञापन पत्र को परिवर्तन करने वाले संकल्प को उस दशा में व्यर्थ घोषित कराना जब संकल्प को सारभूत तथ्यों को छिपाकर पारित किया गया हो;
घ) ऐसे संकल्प पर कार्य करने से कंपनी एवं इसके संचालकों को रोकना;
ङ) कंपनी को ऐसे कार्य करने से रोकना जो कंपनी अधिनियम या तत्कालीन किसी अन्य राजनियम के उपबंधों के विपरीत हो:
च) सदस्यों द्वारा पारित किसी संकल्प के विरूद्ध कंपनी को कार्यवाही करने से रोकना;
छ) क्षतिपूर्ति या अन्य उचित कार्यवाही के लिए निम्नलिखित से कहनाः
i. कंपनी या इसके संचालकों द्वारा कोई अवैधानिक कपटपूर्ण या गलत कार्य करने पर ;
ii. कंपनी की लेखा परीक्षा कर्म सहित लेखा परीक्षक को अपनी रिपोर्ट में अनुचित या भ्रामक कथन या गैर-कानूनी कार्य या कपटपूर्ण कार्यवाही किए जाने पर;
iii. कोई विशेषज्ञ या परामर्शदाता या सलाहकार या कोई अन्य व्यक्ति जिसने कंपनी कोई गलत या भ्रामक कथन किया हो या गैर-कानूनी या कपटपूर्ण कार्य किया हो।
(ज) कोई अन्य उपचार मांगना जिसे ट्रिब्यूनल उचित समझता हो।
ii. यदि सदस्य या जमाकर्ता लेखा-परीक्षा फर्म से या उनके विरूद्ध कोई हर्जाना या क्षतिपूर्ति चाहते हैं अथवा किसी अन्य उचित कार्यवाही की मांग करते हैं तो दायित्व फर्म एवं उसके प्रत्येक सदस्य का होगा जो लेखा-परीक्षा रिपोर्ट में कोई अनुचित या भ्रामक कथन में शामिल या अथवा जिसने कपटपूर्ण गलत या गैर-कानूनी तरीके से कार्य किया हो।
iii. ट्रिब्यूनल से उपरोक्तानुसार आवेदन करने हेतु सदस्यों की संख्या निम्नलिखित होगी:
क) शेयर पूँजी वाली कंपनी की दशा में कंपनी कम-से-कम 100 सदस्य अथवा इसके सदस्यों की संख्या का कम से कम ऐसा प्रतिशत जिसे निर्धारित किया जाये, इनमें से जो भी कम हो,
अथवा कंपनी की निर्गमित शेयर पूँजी का कम से कम ऐसा प्रतिशत जिसे निर्धारित किया जाए रखनेवाला कोई सदस्य या सदस्य गण बशर्ते आवेदक या आवेदकगण अपने शेयरों पर देय सभी याचनाएँ एवं अन्य राशियों का भुगतान कर चुके हों;
ख) बिना शेयर पूँजी वाली कंपनी की दशा में इसकी कुल संख्या के कम से कम 20% सदस्य ।
iv. ट्रिब्यूनल को आवेदन करने वाले जमाकर्ताओं की संख्या 100 जमाकर्ताओं से कम अथवा जमाकर्ताओं की कुल संख्या के ऐसे प्रतिशत से कम, जो निर्धारित किया जाये, इनमें से जो भी कम हो, से कम नहीं होनी चाहिए अथवा ऐसा जमाकर्ता या जमाकर्तागण जिनकी कंपनी के पास कुल जमाराशियों का निर्धारित प्रतिशत जमाराशि है।
उपरोक्त संख्या के अधीन रहते हुए कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह या किसी कार्य या भूल आदि से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करनेवाला कोई संघ इस धारा के अधीन आवेदन दे सकता है या कोई अन्य कार्यवाही कर सकता है।
4) यदि ट्रिब्यूनल द्वारा किसी आवेदन को विचार करने के लिए स्वीकार किया जाता है तो इसके लिए द्वारा निम्नलिखित कार्य किये जायेंगे
क) वर्ग के सभी सदस्यों या जमाकर्ताओं के पास निर्धारित तरीके से आवेदन को विचार करने हेतु स्वीकार
किये जाने की सार्वजनिक सूचना दी जायेगी;
ख) क्षेत्राधिकार में आनेवाले समान आवेदन-पत्रों को मिलाकर एक आवेदनपत्र माना जायेगा तथा सदस्यों या जमाकर्ताओं के वर्ग को प्रमुख आवेदक को चयन करने की अनुमति दी जायेगी;
ग) एक ही कार्यवाही के संबंध में दो वर्ग की कार्यवाही वाले आवेदनों को अनुमति नहीं दी जायेगी;
घ) वर्ग कार्यवाही हेतु आवेदनों संबंधी व्ययों का भुगतान कंपनी अथवा किसी अन्य ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जायेगा जो अत्याचार के लिए दायी हो।
(5) ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश कंपनी, इसके सभी सदस्यों, जमाकर्ताओं लेखा परीक्षण फर्म लेखा परीक्षक, विशेषज्ञ या सलाहकार या परामर्शदाता अथवा कंपनी से संबद्ध अन्य व्यक्तियों पर बाध्यकारी होगा।
6) यदि ट्रिक्यूनल के समक्ष फाइल किया गया कोई आवेदन तुच्छ अथवा तंग करनेवाला पाया जाता है तो
ट्रिब्यूनल द्वारा आवेदन को निरस्त कर दिया जायेगा तथा यह आदेश दिया जायेगा कि आवेदक द्वारा विरोधी
पक्षकार को आदेशानुसार ऐसी राशि का भुगतान किया जाये जो 1 लाख रूपये से अधिक न हो।
7) इस धारा के उपबंध बैंकिंग कंपनी पर लागु नहीं होंगे।
8) ट्रिब्यूनल द्वारा पारित किये गये आदेश का पालन न किये जाने पर कंपनी पर कम से कम 5 लाख रूपये का जुर्माना लगाया जा सकता है जिसे 25 लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकता है। गलती करने वाले कंपनी के प्रत्येक अधिकारी को 3 वर्ष तक का कारावास तथा कम से कम 25 हजार रूपये जुर्माना, जिसे 1 लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकता है, की सजा दी जा सकती है।
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