संचालको की नियुक्ति - appointment of directors

संचालको की नियुक्ति - appointment of directors


कानूनी तौर पर संचालक के रू में किसी फर्म, संख्या अथवा कंपनी की नियुक्ति नहीं की जा सकती है अपितु केवल कोई व्यक्ति ही कंपनी का संचालक बन सकता है बशर्ते कि उसे धारा 154 के अधीन संचालक पहचान संख्या (DIN) आबंटित कर दी गई हो। कोई भी संविदा करने के सक्षम व्यक्ति, जिसे धारा 164 के अधीन अयोग्य करार न दिया गया हो, कंपनी के संचालक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। कम से कम एक संचालक ऐसा व्यक्ति होगा जिसे विगत कैलेंडर वर्ष में कम से कम 182 दिन की अवधि तक भारत में निवास किया है। विद्यमान कंपनियों को कंपनी अधिनियम, 2013 के लागू होने की तिथि से 1 वर्ष के अन्दर इस प्रावधान का पालन करना होगा।


प्रथम संचालक :- कंपनी के प्रथम संचालकों की नियुक्ति ज्ञापन पत्रके हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा की जाती उनके नाम अंतर्नियमावली में दिए जाते है, यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो अंतर्नियमावली में यह बताया जाता है कि प्रथम संचालकों की नियुक्ति किस प्रकार होगी। यदि अंतर्नियमावली में ऐसा नहीं किया जाता है तो ज्ञापन पत्र के हस्ताक्षरकर्ता कंपनी के प्रथम संचालक माने जायेंगे। ये संचालककंपनी की प्रथम वार्षि साधारण सभा में अवकाश ग्रहण करेंगे तथा इसी सभा में धारा 152 (6) के उपबंधों के अनुसार संचालकों को विधिवत नियुक्त किया जायेगा। एकजन कंपनी की दशा में यदि अंतर्नियमावली द्वारा प्रथम संचालक की नियुक्ति नहीं की जाती है तो व्यक्तिगत सदस्य तब तक इसका प्रथम संचालक समझा जायेगा जब तक कि सदस्य द्वारा संचालक या संचालकों को नियुक्त नहीं कर दिया जाता ।।


परवर्ती संचालक :-धारा 152 (6) के अनुसार सार्वजनिक कंपनी की दशा में कुल संख्या की कम से कम दो-तिहाई संख्या में संचालक चक्रानुक्रम में अनिवार्यत: रिटायर होने चाहिए तथा साधारण सभा में शेयरधारकों द्वारा नियुक्त किये जायेंगे। इस प्रकार, एक सार्वजनिक कंपनी की दशा में स्थायी संचालकों, यदि कोई हो, की संख्या संचालकों की कुल संख्या की एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती। कंपनी की अंतर्नियमावली में यह व्यवस्था की जा सकती कि प्रत्येक वर्ष सभी संचालक रिटायर किए जायेंगे। निजी कंपनी की दशा में, यदि अंतर्नियमावली में व्यवस्था की गई हो तो उसके सभी संचाक स्थायी हो सकते है। रिटायर होने वाले संचालकों की नियुक्ति वार्षिक साधारण सभा में शेयरधारियों अंतर्नियमावली की व्यवस्थाओं के अनुरूप की जाएगी। यदि अंतर्नियमावली में इस संबंध में कोई व्यवस्था नकी गई हो तो पारी से रिटायर न होने वाले संचालकों की नियुक्ति भी साधारण सभा में शेयरधारियों द्वारा की जाएगी।