अपनी प्रतिभूतियों का बाईबैक - buyback of your securities

अपनी प्रतिभूतियों का बाईबैक - buyback of your securities


कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 67 कंपनियों को अपने शेयर खरीदने की अनुमति नहीं देती है। क्योंकि इससे शेयर पूँजी में स्थायी रूप से कमी आती है। कंपनी अधिनियम में यह व्यवस्था की गई है कि कंपनियों द्वारा धारा 66 में बताई गई प्रक्रिया को अपनाकर केवल वैद्य और युक्तियुक्त प्रयोजनों के लिए ही शेयर पूँजी में कमी की जा सकती है ताकि कंपनी की संपत्तियों को शेयरधारकों में स्वतंत्रतापूर्वक न बाँटा जा सके।


भारतीय व्यावसायिक क्षेत्र द्वारा यह मांग उठाई जाती रही है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के अनुरूप कंपनियों को अपने शेयर खरीदने की अनुमति दी जाये। कंपनी अधिनियम, 2013 की धाराएँ 68 से 70 में कुछ निश्चित प्रतिबंधों के अधीन रहते हुए कंपनियों को अपने शेयर बाइबैक करने की अनुमति दी गई है।

धारा 68 से 70 में 'बाईबैक' संबंधी मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं-


1) वे कोष जिनमें से बाईबैक के लिए धनराशि उपलब्ध हो सकेगी कोई कंपनी अपने शेयरों या अन्य प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए निम्नलिखित संसाधनों से भुगतान कर सकती है:


i. प्रतिभूति प्रीमियम लेखे में से; या


ii. मुक्त 'आरक्षित कोषों में से; या


iii. किन्ही शेयरों या अन्य बिनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के निर्गमन से प्राप्त धनराशि से ।


यह उल्लेखनीय है कि किसी प्रकार के शेयरों या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों का बाईबैक उसी प्रकार के शेयरों या उसी प्रकार की अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के किसी पूर्व निर्गमन से प्राप्त धनराशि से नहीं किया जायेगा।


2) पूँजी विमोचन आरक्षित खाते' में निश्चित धनराशि को अंतरित करना- कंपनी अधिनियम की धारा 69 के अनुसार, जब कोई कंपनी अपने शेयरों को मुक्त आरक्षित कोषों में से क्रय करती है तो उस कंपनी के ऐसे क्रय किए गए शेयरों के अंकित मूल्य के बराबर धनराशि को पूँजी विमोचन आरक्षित खाते में अंतरित किया जाना चाहिए तथा इसका ब्यौरा तुलन-पत्र में दिया जाना चाहिए।


अधिनियम की धारा 69 (2) के अनुसार, पूँजी विमोचन आरक्षित खाते"

का कंपनी द्वारा उपयोग पूर्ण दत्त बोनस शेयरों के निर्गमन के लिए किया जा सकता है।


3) बाइबैक करने से पहले पूरी की जानेवाली शर्तें - अपने शेयरों या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों का बाइबैक करने से पहले कंपनी के लिए निम्नलिखित शर्तों का पालन करना आवश्यक है:


i. कंपनी की अंतर्नियमावली में प्रतिभूतियों के बाइबैक करने की व्यवस्था होनी चाहिए। 


Ii. बाइबैक को अधिकृत करने के लिए शेयरधारियों द्वारा एक विशेष संकल्प पारित किया जाना चाहिए।


उस सभा की सूचना के साथ, जिसमें विशेष संकल्प पारित किया जाना प्रस्तावित है, एक विवरण- पत्र संलग्न किया जाना चाहिए जिसमें निम्नलिखित तथ्यों का उल्लेख हो:


क) बाइबैक संबंधी सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का पूरा तथा विस्तृत स्पष्टीकरण 


ख) वापस क्रय करने की आवश्यकता का स्पष्टीकरण


ग) बाइबैक स्कीम में किस वर्ग की प्रतिभूतियाँ उल्लिखित हैं;


घ) धनराशि जो इस कार्य में लगाई जाएगी;


ङ) कितने समय में बाइबैक प्रक्रिया को पूरा किया जाना है। 


iv. बाइबैक द्वारा वापस लिए जाने वाली प्रतिभूतियों का मूल्य कंपनी की कुल प्रदत्त पूँजी और मुक्त आरक्षित कोषों के 25% से अधिक नहीं होनी चाहिए। 


V. प्रतिभूतियों के बाईबैक करने के पश्चात् कंपनी द्वारा धारित ऋण कंपनी की शेयर पूँजी तथा मुक्त आरक्षित कोषों से दुगुने से अधिक नहीं होनी चाहिए।


vi. बाईबैक किये जानेवाले शेयर या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियाँ पूर्णदत्त होनी चाहिए।


vii. किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सुचीगत शेयरों या विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के बाईबैक की दशा में 'सेबी' द्वारा जारी किए गए निर्देशक सिद्धांतों का तथा असूचीगत शेयरों या विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों की दशा में केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशक सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।


viii. प्रत्येक बाईबैक प्रक्रिया को इसके लिए विशेष संकल्प अथवा संचालक मंडल का संकल्प पारित किए जाने के बारह महीने के भीतर पूरा कर लिया जाना चाहिए।


ix. दो बाईबैकों के बीच कम से कम वर्ष का अंतराल होना चाहिए।


4) बाईबैक के ढंग कंपनी अधिनियम की धारा 68 (5) के अनुसार प्रतिभूतियों को वापस खरीदने के निम्नलिखित ढंग बताए गए हैं:


क) विद्यमान शेयरधारकों या प्रतिभूतिधारकों से आनुपातिक आधार पर या


ख) खुले बाजार से ; या


ग) स्कन्ध - विकल्प योजना' या 'श्रम-साध्य ईिक्वटी शेयर योजना के अनुकरण में कंपनी के कर्मचारियों को जारी की गई प्रतिभूतियों को क्रय करके।


5) शोधन क्षमता की घोषणा कंपनी अधिनियम की धारा 68 (6) के अनुसार प्रतिभूतियों का वास्तव में बाईबैक करने से पूर्व कंपनी के संचालकों को, शपथ-पत्र द्वारा सत्यापित, निर्देशित प्रारूप में शोधन क्षमता की घोषणा करनी होगी। इसमें उन्हें यह घोषित करना होता है कि उन्होंने कंपनी के कार्यकलापों की पूरी जाँच कर ली है जिसके परिणाम स्वरूप उनकी राय में कंपनी अपनी सभी देयताओं का पूर्ण रूपेण भुगतान करने में समर्थ है और घोषण की तिथि से अगले एक वर्ष के भीतर दिवालिया स्थिति में नहीं होगी।

घोषणा पत्र की एक प्रतिलिपि कंपनियों के रजिस्ट्रार तथा किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने की दशा में सेबी के यहाँ पंजीकरण हेतु फाइल करनी होगी।


6) प्रतिभूतियों को बस्तुतः नष्ट करना कंपनी अधिनियम की धारा 68(7) के अनुसार बाईक प्रक्रिया के पूरा होने के पश्चात्, पुरा होने की तारीख से सात दिन के भीतर, कंपनी को बाईबैंक में प्राप्त प्रतिभूतियाँ वस्तूतः नष्ट करनी होगी।


7) बाइबैक के पश्चात् अतिरिक्त निर्गमन - धारा 68 (8) के अनुसार बाईबैंक प्रक्रिया के पूरा होने के पश्चात् पूरा होने की तारीख से 6 महीने के भीतर कंपनी उसी प्रकार की प्रतिभूतियों का निर्गमन नहीं करेगी जिस प्रकार की प्रतिभूतियों का बाईबैक किया गया था।


8) बाईबैंक की गई प्रतिभूतियों का रजिस्टर धारा 68 (9) के अनुसार प्रतिभूतियों को वापस क्रय करनेवाली कंपनी को इस प्रकार वापस क्रय की गई प्रतिभूतियों का एक रजिस्टर रखना होगा जिसमें दिया जानेवाला विवरण इस प्रकार होगा


i. वापस खरीदी गई प्रतिभुतियों का विवरण:


ii. उनके लिए दिया गया प्रतिफल:


iii. उनको रद्द करने की तारीख;


iv. उनको वस्तुतः रद्द करने की तारीख:


v. सरकार द्वारा निर्देशित अन्य विवरण।


9) बाईबैक की विवरणी - धारा 68 (10) के अनुसार, बाईबैंक प्रक्रिया के पूरा होने के पश्चात् पूरा होने की तारीखा से 30 दिन के भीतर कंपनियों के रजिस्ट्रार और सेबी को निर्देशित विशिष्टियों वाली एक विवरणी भेजनी होगी।


10) दण्ड-धारा 68 (11) के अनुसार यदि कोई कंपनी पूर्व लिखित उपबंधों एवं उस धारा के अधीन बनाए गए किन्ही नियमों का उल्लंघन करती है तो कंपनी को । लाख रूपये से 3 लाख रूपये तक के जुर्माने तथा प्रत्येक दोषी अधिकारी को 3 वर्ष तक के कारावास अथवा लाख रूपये से 3 लाख रूपये तक के जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।


निर्देशित परिस्थितियों में बाईबैक करने पर प्रतिबंध धारा 70 के अधीन यह प्रतिबंध लगाया गया है कि कोई भी कंपनी अपने ही शेयर या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों को बाईबैक करने का कार्य (क) अपनी सहायक कंपनियों सहित किसी अन्य सहायक कंपनी के माध्यम से, या (ख) किसी विनियोग कंपनी या विनियोग कंपनियों के समूह के माध्यम से नहीं करेगी।