पूँजी तथा परियोजना लागत - capital and project cost

पूँजी तथा परियोजना लागत - capital and project cost


परियोजना पूँजी लागतों का अनुमान


कोषों को एकत्र करने से पूर्व उनकी आवश्यकताओं का सही अनुमान लगाना आवश्यक होता है। सही अनुमान न होने पर पूँजी जी कमी अथवा अधिकता हानि पहुँचा सकती है। यदि पूँजी की कमी हो तो उद्यमी दिन-प्रतिदिनके खर्ची तथा दायित्वों का समय पर भुगतान नहीं कर पाएगा। इसके विपरीत पूँजी की अधिकता होने पर यह बेकार पड़ी रहेगी और उपक्रम की लाभप्रदता को घटाएगी।


परियोजना संबंधी पूँजी लागतों में उन सभी खर्चों को सम्मिलित किया जाता है जो वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने से पहले किए जाते हैं। इसमें स्थायी विनियोग तथा उत्पादन से पूर्व की लागतों को सम्मिलित किया जाता है।

परियोजना संबंधी पूँजीगत लागतों में निम्नलिखित खर्चों को शामिल किया जाता है:


(1) भूमि तथा स्थल विकास


भूमि तथा स्थल विकास पर विभिन्न प्रकार के व्यय किए जाते हैं तथा ये व्यय भूमि व स्थान की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। इसके अंतर्गत निम्न व्यय आते है:


• चालू बाजार मूल्य पर भूमि की लागत


समतल व विकसित करने की लागत


आंतरिक तथा मुख्य मार्ग तक सड़क की लागत


(2) भवन तथा निर्माणी कार्य


गेट आदि पर लागत


भवन तथा निर्माणी कार्य की लागत उस ढाँचे पर निर्भर करती है तो निर्माण प्रक्रिया के लिए बनाना होता है। ये लागतें क्षेत्रफल तथा दरों पर भी निर्भर करती हैं। इसके अंतर्गत निम्न को सम्मिलितकिया जाता है:


परियोजना परिसर की लागत


प्रशासनिक भवन की लागत।


सहायक सेवाओं के लिए भवन की लागत: जैसे कार्यशाला, प्रयोगशाला माल, गोदाम इत्यादि ।


आवासीय भवन की लागत


. कारखाने के अलावा अन्य भवनों की लागत: जैसे- कैन्टीन, गेस्ट हाउस, जिम इत्यादि ।



(3) संयंत्र तथा मशीनरी


संयंत्र तथा मशीनरी की लागत परियोजना लागत का महत्त्वपूर्ण अंग होता है। संयंत्र तथा मशीनरी की


लागत नवीनतम बीजकों के आधार पर निर्धारित की जाती है। इसके अंतर्गत निम्न को शामिल किया जाता


. आयायित मशीनरी की लागत जिसमें बोर्ड पर मुफ्त मूल्य, भाड़ा, बीमा, आयात शुल्क, लदान, यातायात आदि के व्यय शामिल होते हैं।


. स्वदेशी मशीनरी की लागत जिसमें रेल पर मुक्त लागत, चुंगी, विक्रय कर, यातायात व्यय आदि सम्मिलित होते होते हैं।


स्टोर तथा कलपुर्जों की लागत ।


(4) विविध स्थायी संपत्तियाँ


कुछ ऐसी स्थायी सम्पत्तियाँ होती हैं जो प्रत्यक्ष रूप से निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होतीं, उन्हें विविध स्थायी सम्पत्तियाँ कहा जाता है। इन सम्पत्तियोंमें फर्नीचर, कार्यालय उपकरण,

वाहन, जनरेटर, प्रयोगशाला उपकरण, आग बुझाने वाले यंत्र आदि सम्मिलित होते है।। 


(5) तकनीकी ज्ञान तथा इंजीनियरिंग व्यय


कई बार विभिन्न तकनीकी मामलों में सलाह व सहायता के लिए तकनीकी सलाहकारों की सेवाएँ लेनी आवश्यक हो जाती है: जैसे कि परियोजना रिपोर्ट तैयार करना, तकनीक का चुनाव, संयंत्र तथा मशीनरी का चुनाव आदि। परियोजना को स्थापित करने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की भी आवश्यकता हो सकती है। इन विशेषज्ञों के यात्रा-व्यय, रहने, खाने-पीने तथा वेतनव भत्ते भी इसमें शामिल होते हैं। इसी प्रकार, भारतीय तकनीकों के विदेश में प्रशिक्षण के व्यय भी इसमें शामिल किए जाते हैं। 


(6) अदृश्य खर्चे अदृश्य खर्चे: जैसे- पेटेंट, लाइसेंस, कॉपीराइट,

ट्रेड मार्क आदि की लागत को परियोजनाकी लागत में शामिल किया जाता है। ऐसे खर्चे उत्पादन प्रारम्भ होने से पहले किए जाते है। 


(7) प्रारंभिक तथा पूँजी जारी करने के व्यय


परियोजना की पहचान करने, बाजार का सर्वेक्षण करने, साध्यता रिपोर्ट तैयार करने, पार्षद सीमानियम व अंतर्नियम तैयार करने तथा कंपनी के सम्मेलन के व्ययों को प्रारम्भिक व्यय कहा जाता है। पूँजी प्राप्त करने से संबंधित व्यय पूँजी जारी करने के व्यय कहे जाते हैं: जैसे- अभिगोपन कमीशन विज्ञापन तथा प्रचार खर्चे इत्यादि। इन सभी खर्चों को परियोजना लागत का भाग माना जाता है। 


(8) संचालनसे पूर्व के व्यय


परियोजना में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने से पहले किए गए व्ययों को संचालनसे पूर्व के व्यय कहा जाता है। इन व्ययों में निम्न व्ययों को सम्मिलित किया जाता है: 


• स्थापना व्यय


• प्रारंभ करने के व्यय


• किराया, कर तथा दर


• यात्रा संबंधीव्यय


• ऋण पर ब्याज


• स्थापित भुगतानों पर ब्याज


बीमा व्यय


(9) आकस्मिक व्ययों तथा बढ़े हुए मूल्यों का प्रावधान


अदृश्य व्ययों तथा सामान्य मुद्रा-स्फीति दर से अधिक मूल्य वृद्धि के लिए प्रावधान बनाया जाता है। सभी मदों का एक निश्चित प्रतिशत प्रावधान के रूप में परियोजना की लागत में जोड़ दिया जाता है।