व्यवसाय की असफलता के कारण/व्यवसाय की समस्याएँ - Causes of business failure / business problems
व्यवसाय की असफलता के कारण/व्यवसाय की समस्याएँ - Causes of business failure / business problems
एक उद्यमी वह व्यक्ति होता है जो व्यवसाय को स्थापित करता है, उसका संचालन करता है तथा उसका विस्तार करता है। वह सामान्य तौर पर एक नवप्रवर्तक, संस्थापक तथा कुछ प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति होता है। प्रत्येक उद्यमी अपना व्यवसाय बहुत सारी आशाओं के साथ तथा सफलता की उम्मीद के साथ प्रारंभ करता है। वह व्यवसाय पर अपनी ऊर्जा, पैसा तथा समय लगाता है। एक सफल उद्यमी एक विशेष गुणों वाला व्यक्ति होता है जिसमें लाभदायक अवसरों को पहचानने की क्षमता होती हैं तथा वह उन अवसरों के अनुरूप उत्पाद तैयार करके बाजार में बेचता है। इसके लिए वह श्रम, पूँजी, तकनीक तथा अन्य संसाधनों का समायोजन करके अपने विचार को मूर्त रूप देते हुए व्यवसाय स्थापित करता है । परंतु प्रत्येक कहानी एक सफलता भरी कहानी नहीं होती।
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लघु उद्योग प्रशासन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार स्थापित की गई विभिन्न इकाइयों में से आधे से अधिक 5 साल तक तथा एक तिहाई 10 साल या उससे अधिक तक चल पाती हैं। समय व्यतीत हो जाने के साथ-साथ व्यवसाय की असफलता की संभावनाएँ कम होती जाती हैं। परंतु यह भी कठोर सत्य है कि व्यवसाय में जोखिम कभी भी समाप्त नहीं होता। बदलता हुआ वातावरण तथा प्रतिस्पर्धा भरा वातावरण की सफलता के संघर्ष को कभी खत्म नहीं होने देता।
उत्साह तथा पूर्ण जोश के साथ उद्यमी अपने नए व्यवसाय की स्थापना करता है। परंतु वह व्यवसाय के संचालन के समय कई तरह की गलतियाँ कर बैठता है जिससे व्यवसाय असफलता की ओर चल पड़ता है नये उद्यमियों की कुछ महत्वपूर्ण समस्याएँ या असफलता के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित होते हैं:
1. प्रबंधकीय कौशल का अभाव प्रत्येक नए उद्यमी से यह आशा की जाती है कि उसे प्रबंध के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उसे यह पूर्ण रूप से स्पष्ट होना चाहिए कि वह प्रत्येक स्थिति के लिए पेशेवर की सेवाएं नहीं ले सकता है। अतः वह एक सर्वगुण संपन्न तथा प्रबंध एवं अन्य संबंधित क्षेत्रों का ज्ञाता भी होना चाहिए। उसे पूर्ण रूप से यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या उत्पाद तैयार करना है, कैसे करना है तथा उसे बाजार में कैसे बेचा जाना है। परंतु प्रत्येक उद्यमी ऐसा नहीं कर सकता है। यदि वह इन कार्यों में सफल नहीं होता तो उसकी परियोजना को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अतः प्रबंधकीय कौशल की कमी नये व्यवसाय की असफलता का कारण बन जाती है। अतः प्रत्येक उद्यमी को प्रबंध के विभिन्न क्षेत्रों जैसे उत्पादन, विपणन, लेखांकन, वित्त आदि पर ध्यान देना चाहिए।
2. प्रतिक्रियात्मक मनोवृत्ति कई बार उद्यमी बाजार में प्रतिस्पर्धा के स्तर का सही अनुमान - लगाने में असमर्थ रहते हैं। कई बार व्यावसायिक तकनीकों में भी बड़ी तेजी से परिवर्तन होता है।
यदि वह इन परिवर्तनों पर शीघ्रता से तथा प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया या समायोजन नहीं करता है तो वह खतरे के क्षेत्र में पहुँच जाता है। अतः उद्यमी को सदैव परिवर्तन के प्रति सजग रहना चाहिए तथा आवश्यकतानुसार उस पर शीघ्रता से कार्यवाही करनी चाहिए।
3. दोषपूर्ण लेखांकन प्रणाली- एक प्रभावशाली लेखांकन प्रणाली का न होना व्यवसाय में कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न करता है। तत्पश्चात ये समस्याएँ बड़ी होकर व्यवसाय को असफलता की ओर ले जाते हैं। अतः प्रत्येक उद्यमी को प्रभावशाली लेखांकन प्रणाली अपनानी चाहिए।
4. ग्राहकों को समझने में विफलता - नए व्यवसाय की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि व्यवसायी अपने ग्राहकों के व्यवहारों को कितने अच्छे ढंग से अध्ययन करता है।
प्रत्येक उद्यमी के पास अपने मुख्य ग्राहकों की अधिकतम जानकारी होनी चाहिए। कुछ स्थापित तथा नये उद्यमी इस अवधारणा पर उचित ध्यान नहीं देते या इस तथ्य को कम महत्व देते हैं। इससे व्यवसाय की सफलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
5. अकुशल रोकड़ प्रबंध वित्त प्रत्येक व्यवसाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। रोकड़ प्रबंधन इस क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है। व्यवसाय में रोकड़ की उपलब्धता उसकी सफलता पर प्रभाव डालती है। रोकड़ की अधिकता या कमी दोनों ही परिस्थितियाँ समस्याएँ उत्पन्न करने वाली होती हैं। कुछ नए उद्यमी रोकड़ प्रबंध को पर्याप्त महत्त्व नहीं देते तथा व्यवसाय को असफलता की ओर ले जाते हैं। यदि एक बार ऐसा हो जाए तो फिर उन्हें इससे निकलने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है।
6. कर क्षेत्र - एक उद्यमी प्रत्येक क्षेत्र का विशेषज्ञ नहीं होता, परंतु वह एक पूर्ण रूप से जागरूक व्यक्ति अवश्य होना चाहिए व्यवसाय के क्षेत्र में उसे कर संबंधी क्षेत्र के बारे में पूर्ण रूप से जागरूक व्यक्ति अवश्य होना चाहिए। व्यवसाय के क्षेत्र में उसे कर संबंधी क्षेत्र के बारे में पूर्ण रूप से ज्ञानवान होना चाहिए। उसे अपने व्यवसाय में लागू होने वाले विभिन्न करोंके प्रावधानों के बारे में पता होना चाहिए। कई उद्यमी अपने कर के भार को कम करने के लिए कर चोरी जैसे तरीकों को अपना बैठता है। कर नियोजन की अपेक्षाकर चोरी व्यवसाय की सफलता को प्रभावित करती है।
7. व्यक्तिगत समस्याएँ - उद्यमियों में कई व्यक्तिगत कमियाँ एक उद्यमी की सफलताओं में बाधा बनती हैं। इनमें कुछ कमियाँ; जैसे आत्मविश्वास की कमी, कौशल एवं ज्ञान की कमी, तकनीकी ज्ञान की कमी, प्रेरणा का अभाव आदि।
ये सभी कमियाँ व्यवसाय में उसके उत्साह को कम करती हैं तथा व्यवसाय की सफलता में बाधाएँ उत्पन्न करती हैं।
8. अकुशल योजना - योजना हमारे जीवन की प्रत्येक क्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है तथा व्यवसाय के लिए इसका विशेष महत्व होता है। सफल योजना व्यवसाय की सफलता को निर्धारित करती है तथा असफल योजना उस पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है। व्यवसाय में सफल नियोजन द्वाराही सभी संसाधनों का उचित प्रयोग किया जा सकता है। छोटे तथा नये व्यवसायी आमतौर पर नियोजन को बहुत अधिक महत्व नहीं देते। इससे वे व्यवसाय को सफलतापूर्वक नहीं चला पाते। बहुत सारे शोध कार्यों से यह पता चलता है कि छोटे व्यवसायों व नये उद्यमियों की असफलता का कारण उनका नियोजन क्षेत्र पर उचित ध्यान नहीं देना था।
9. असंतुलित विस्तार एक उद्यमी आत्मकेंद्रित व्यक्ति होना चाहिए तथा उसे अपने व्यवसाय के बारे में पूर्ण स्पष्टता होनी चाहिए। उसे व्यवसाय की कमियों व ताकतों का पूरा पता होना चाहिए । उसे इस बात की भी स्पष्टता होनी चाहिए कि व्यवसाय का विस्तार किस सीमा तक करना है। कई बार उद्यमी व्यवसाय का आवश्यकता से अधिक विस्तार कर लेते हैं तथा बाद में उसे नियंत्रित नहीं कर पाते। उनके इस असंतुलित विस्तार के कारण व्यवसाय असफलता की तरफ भी जा सकता है।
10. आधुनिक तकनीक के उपयोग की कमी आज का युग तकनीक का युग है। प्रत्येक व्यवसायी को अपने व्यवसाय को चलाने में इसका प्रयोग करना होता है। व्यावसायिक इकाई के उद्यमी को पेशेवर की तरह सोच रखते हुए तकनीकी परिवर्तनों को व्यवसाय में लागू करते रहना पड़ता है ।
यह तकनीक निरंतर परिवर्तनशील है तथा इसके अनुसार व्यवसाय में परिवर्तन करना महँगी प्रक्रिया भी होती है। कुछ व्यवसायी इस आधुनिक तकनीकों का उचित उपयोग नहीं कर पाते तथा व्यवसाय की सफलता की गति धीमी हो जाती है।
11. दृष्टिकोण की अस्पष्टता एक व्यवसायी का अपने व्यवसाय के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट होना चाहिए । इसे यह पूर्णरूप से स्पष्ट होना चाहिए कि वह बाजार को क्या देना चाहता है उसी के अनुसार उत्पाद की किस्म तथा मात्रा का निर्णय लिया जाना संभव होता है। उसे कई बार अनैतिक, लेकिन लाभकारी अवसरों को नहीं अपनाना चाहिए क्योंकि उनसे व्यवसाय की छवि पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कई बार छोटे व नये उद्यमियों को अपने दृष्टिकोण की भी स्पष्टता नहीं होती जिससे वे व्यवसाय को सही दिशा में नहीं ले जा पाते। इसके अतिरिक्त कुछ नये व्यवसायी अल्पकालीन लाभ के लिए अनैतिक गतिविधियाँ अपना लेते हैं जिस कारण से बाद में उन्हें असफलता का भी सामना करना पड़ता है।
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