सिस्टम एप्रोच के लक्षण - Characteristics of the system approach
सिस्टम एप्रोच के लक्षण - Characteristics of the system approach
1. सिस्टम अपने पारस्पारिक तत्वों से मिलकर बना होता है। यह अपने-2 आंतरिक निर्भर एवं संबंधी भागों को एक ही क्रम में मिलाकर निर्मित होता है, जिसका लक्ष्य ही संस्था का लक्ष्य होता है।
2. उपलब्ध विभिन्न सब सिस्टमों का अध्ययन उनके आंतरिक संबंधों के आधार पर होता है न कि प्रत्येक सब सिस्टमों के पृथकीकरण पर ।
3. एक संगठानात्मक सिस्टम (ऑर्गेनाइजेशनल सिस्टम) की अपनी 2 सीमाएं होती है जो कि यह निर्णय लेती है कि कौन सा भाग आंतरिक है एवं कौन सा भाग बाह्य है।
4. सिस्टम हमेशा ही निर्भर होता है। यह सूचना, सामग्री एवं ऊर्जा रूप इनपुट हमेशा अन्य सिस्टम से लेता है। सिस्टम के दायरे में यह इनपुट ट्रांसफॉर्मेशन प्रोसेस (परिवर्तन की प्रक्रिया) के अंतर्गत होता है एवं इस सिस्टम का आउटपुट अन्य दूसरे सिस्टम के लिए इनपुट की तरह होता है।
5. कोई भी एक संस्था अपने वातावरण ( Environment) के लिए स्वत: ही जिम्मेदार होती है अर्थात् कोई भी संस्था डायनेमिक सिस्टम होती है। यह अपने वातावरण को परिवर्तन में आलोचनीय भी हो सकती है।
ऑर्गेनाइजेशन भी एक सिस्टम है जो कि इनपुट को लेता है एवं प्रोसेस करके अर्थात् एवं इस इनपुट को परिवर्तित करके आउटपुट देता है। यह सभी कार्य उपर्युक्त वातावरण (जैसे- इनोमिक, Regulatory and other forces) में संचालित होता है।
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