उद्यमियों का वर्गीकरण - Classification of Entrepreneurs
उद्यमियों का वर्गीकरण - Classification of Entrepreneurs
एक उद्यमी उत्पादन के विभिन्न साधनों का संयोजन करता है। उनमें आवश्यक प्रक्रिया पूरी करके कच्चे माल को तैयार उत्पाद में परिवर्तित करता है। वह उत्पाद के द्वारा उपयोगिता का सृजन करता है तथा बाजार में बेचकर लाभ कमाता है। उद्यमी एक देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है । प्रत्येक अर्थव्यवस्था में विभिन्न रूपों में उद्यमी विद्यमान होते हैं। उद्यमियों को विभिन्न आधारों पर भिन्न भिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। कुछ महत्वपूर्ण वर्गीकरण निम्न प्रकार से है:
■ व्यापार के प्रकार के आधार पर वर्गीकरण
उद्यमी प्रत्येक प्रकार के व्यापार में विद्यमान होते हैं। इस आधार पर वे निम्न तरह के हो सकते है: (1) औद्योगिक उद्यमी: औद्योगिक उद्यमी मुख्य रूप से उत्पादन के रूप में कार्य करते हैं।
ये समाज में ग्राहकों की आवश्यकताओं का अनुमान लगाते हैं तथा उनकी आवश्यकता एवं इच्छाओं के अनुसार वस्तु का उत्पादन करते हैं। ये मुख्यतः उत्पाद प्रेरित व्यक्ति होते हैं। ये प्रत्येक प्रकार के उद्योग में होते हैं, जैसे- इलेक्ट्रानिक उद्योग, कपड़ा उद्योग, मशीन उपकरण उद्योग आदि ।
(2) ट्रेडिंग उद्यमी: ये वे उद्यमी होते हैं जो तैयार माल को खरीदकर उसे बाजार में बेचने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ये उत्पादन जैसी प्रक्रिया में शामिल नहीं होते। ये उद्यमी बाजार के अवसरों की पहचान करके संबंधित उत्पाद की मांग का सृजन करते हैं तथा मांग को प्रोत्साहित करने का भी कार्य करते हैं। यह व्यापार राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो सकता है।
(3) कॉरपोरेट उद्यमी: एक कॉरपोरेट उद्यम व्यापार करने का विशेष प्रारूप होता है। इसका अर्थ एक अलग वैधानिक इकाई से लिया जाता है,
जिसकी स्थापना देश में प्रचलित अधिनियमों के अनुसार की जाती है। एक कॉरपोरेट उद्यमी अपने प्रबंधन की कौशल क्षमता से उस संगठन का विस्तार करता है तथा अपनी सृजनशीलता का प्रदर्शन करता है।
(4) कृषि उद्यमी: एक कृषि उद्यमी व्यापार से संबंधित कृषि गतिविधियां चलाता है। वह कृषि से संबंधित मशीनों, उपकरणों, खादों तथा अन्य संबंधित उत्पादों संबंधी कार्यों में शामिल होता है। वह कृषि क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सहायक उत्पादों का व्यापार एवं विस्तार करता है। एक तरह से वह देश में कृषि क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ाने से संबंधित गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
• प्रौद्योगिकी के उपयोग पर आधारित वर्गीकरण:
अर्थव्यवस्था के विकास के लिए नई तकनीक का प्रयोग एक महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है । प्रौद्योगिकी का प्रयोग व्यापार के आकार एवं स्वभाव के साथ अवश्य संबंधित होता है, परंतु इससे इसका महत्व कम नहीं हो जाता। इस आधार पर उद्यमी निम्न प्रकार के हो सकते हैं:
(1) तकनीकी उद्यमी: एक तकनीकी उद्यमी की तुलना आमतौर पर एक शिल्पकार के साथ की जाती हैं। वे मुख्य रूप से अपना ध्यान उत्पादन पर अधिक देते हैं, न कि विपणन क्षेत्र पर । वे अपनी क्षमता का प्रयोग वस्तुओं एवं सेवाओं पर केंद्रित रखते हैं। उनका मुख्य गुण उसकी तकनीकी कुशलता होती है। इसी गुण के आधार पर नए-नए उत्पाद बेहतर गुणवत्ता के साथ विकसित करते हैं तथा अपने व्यापार को सफल बनाने का प्रयास करते हैं।
(2) गैर तकनीकी उद्यमी: इस प्रकार के उद्यमी अपने द्वारा उत्पादित किए जा रहे उत्पाद के तकनीकी पहलुओं पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं करते। वे अपना लक्ष्य उत्पाद की तकनीक बदलने पर नहीं देते अपितु उसकी बाजार में मांग का सृजन करने पर रखते हैं। वे अपने उत्पाद की मांग
विभिन्न तकनीकों से बढ़ाते रहने में प्रयत्नशील रहते हैं।
(3) पेशेवर उद्यमी: पेशेवर उद्यमी वह व्यक्ति होता है जो एक व्यावसायिक संगठन को स्थापित करता है। उसका उद्देश्य उस संगठन को सफलतापूर्वक चलाना या उसका प्रबंधन करना नहीं होता है। एक बार व्यापार स्थापित हो जाने के पश्चात यह उस चलते हुए व्यापार को बेच देता हैं तथा एक नई परियोजना की स्थापना करने के लिए कार्य प्रारंभ कर लेता है। ये गतिशील प्रवृत्ति के व्यक्ति होते हैं
तथा वैकल्पिक परियोजनाओं को विकसित करने के लिए नए विचारों की अवधारणा अपनाते रहते हैं।
• प्रेरणा के आधार पर वर्गीकरण
प्रेरणा किसी भी उद्यमी की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस आधार पर उद्यमी निम्न प्रकार के हो सकते हैं:
(1) शुद्ध उद्यमी: एक शुद्ध उद्यमी वह होता है जो अपने अहं को संतुष्ट करने के लिए किसी भी गतिविधि को चलाता है। वह अपने अभिप्रेरण के कारण अपनी योग्यता सिद्ध करने का प्रयास करता रहता है। वह सामान्यत: अपने जीवन स्तर के बारे में अत्यंत जागरूक रहता है।
(2) प्रेरित उद्यमी: यह एक ऐसा उद्यमी होता है जो अपनी परियोजना तैयार करता है
तथा अपना व्यापार प्रारंभ करना चाहता है परंतु इस कार्य के लिए उसे किसी के प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। अधिकांश उद्यमी इस श्रेणी में सरकार द्वारा दिए जाने वाले प्रोत्साहन, वित्तीय एवं तकनीकी सहायता आदि के कारण व्यापार जगत में प्रवेश करते हैं। सरकार की नीतियां इस तरह के उद्यमियों को प्रेरित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
(3) अभिप्रेरित उद्यमी: यह विशेष प्रकार के उद्यमियों की श्रेणी है। वे स्वयं की इच्छा से प्रेरित होते हैं तथा अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए प्रयास करते हैं। इनका अभिप्रेरणा स्तर सामान्य से कहीं उच्च होता है जिसके कारण ये नए-नए विचारों एवं उत्पादों के साथ ग्राहकों को संतुष्ट करने के लिए परियोजना स्थापित करते हैं।
इनके व्यापार को संतोषजनक लाभ मिल जाने पर इनका संतुष्टि एवं मनोबल और अधिक हो जाता है।
(4) स्वतः प्रवर्तित उद्यमी: ये वे व्यक्ति होते हैं जिनमें एक सफल उद्यमी होने के सभी आवश्यक लक्षण विद्यमान होते हैं। इनमें आवश्यक गुण, जैसे- साहस, आत्मविश्वास, पहल करने की क्षमता, दृढ संकल्प आदि विद्यमान होते हैं। अपने साहस, कौशल एवं विश्वास के कारण ये अपना व्यवसाय प्रारंभ करते हैं। इन्हें प्रेरित होने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के प्रोत्साहरन की आवश्यकता नहीं होती है।
स्वामित्व के आधार पर वर्गीकरण
स्वामित्व का अर्थ व्यवसा के वैधानिक अधिकार से है। इस आधार पर उद्यमी निम्न प्रकार के हो सकते है:
(1) संस्थापक उद्यमी संस्थापक शब्द स्वयं ही इस श्रेणी को परिभाषित करता है। ये वे व्यक्ति होते है जो व्यवसाय की स्थापना करते हैं। यह व्यवसाय की इकाई अवधारणा को अस्तित्व
में लाते हैं तथा स्थापित हो जाने के पश्चात उसकी सफलता का प्रयास करते हैं। (2) पारिवारिक स्वामित्व वाले व्यवसाय या दूसरी पीढ़ी के स्वामित्व वाले उद्यमी: ये उद्यमी उस श्रेणी से हैं जिन्हें अपना व्यापार अपने पिता या अपने पूर्वजों से विरासत में मिलता है । रिलायंस समूह इसका उदाहरण है जिसमें अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी का व्यापार धीरूभाई अंबानी से विरासत में मिला है।
(3) फ्रैंचाइजी फ्रैंचाइजी शब्द फ्रेंच भाषा से लिया गया है
जिसका अर्थ होता है मुफ्त यह व्यापार का एक विशेष प्रकार है। इसके अंतर्गत व्यापार का स्वामी अपना स्थापित व्यापार चिन्ह फ्रैंचाइजी को प्रयोग करने के लिए दे देता है। व्यापार का स्वामी पहले से बाजार में स्थापित इस नाम का फायदा उठाते हुए लाभ अर्जित करता है। इसके बदले में वह इस अधिकार देने वाले व्यवसाय को एक निश्चित धनराशि तय की गई शर्तों के अनुसार देता रहता है। फ्रैंचाइजी व्यापार की अवधारणा को जन्म देने वाला व्यक्ति नहीं होता है। वह अपना धन और समय व्यापार में विनियोजित करता है। इस तरह के व्यापार का स्वरूप आजकल व्यापक रूप से प्रचलित हो रहा है।
(4) स्वामी प्रबंधक: जब कोई व्यापार में प्रबंधक के रूप में कार्य कर रहा व्यक्ति उसी व्यापार को अपने स्वामी से खरीद लेता है तो उसे स्वामी प्रबंधक कहा जाता है। ऐसा उद्यमी व्यापार में अपना समय तथा अपने संसाधन लगाकर उसे सफल बनाने का प्रयास करता है।
■ विकास की अवस्था के आधार पर वर्गीकरण
प्रत्येक व्यवसाय का विकास समय बीतने के साथ-साथ होता जाता है। यह अपने जीवन काल में कई अवस्थाओं से गुजरता है। इस आधार पर उद्यमी निम्न प्रकार के होते हैं:
(1) पहली पीढ़ी के उद्यमी प्रथम पीढ़ी का उद्यमी वह होता है जो अपने ज्ञान एवं कौशल के आधार पर एक व्यावसायिक इकाई की शुरूआत करता है। वह एक अन्वेषक की तरह कार्य करता है जो विभिन्न साधनों का संयोजन करके वस्तुओं या सेवाओं को बाजार में बेचने के लिए लेकर आता है।
(2) आधुनिक उद्यमी एक आधुनिक उद्यमी वह होता है जो वर्तमान समय में बाजार में उत्पाद की मांग को पूरा करने के लिए कार्य करता है। वह वर्तमान संदर्भ में बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार अपने उपक्रम को सफलतापूर्वक चलाता है ।
(3) संस्थापित उद्यमी: यह उद्यमी एक साधारण उद्यमी का तरह होता है। वह अपने प्रयासों से विनियोजित राशि से अपने आर्थिक लाभ को अधिकतम करने का हर संभव प्रयत्न करता है। उसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है तथा विकास को वह बहुत अधिक महत्व नहीं देता है ।
विकास के आधार पर वर्गीकरण
जिस समय व्यावसायिक वातावरण में किसी व्यवसाय के सफल होने की प्रबल संभावनाएं होती हैं, उस समय उद्यमी व्यापार जगत में प्रवेश करता है तथा व्यवसाय के नए आयाम स्थापित करने की कोशिश करता है । उसके उत्पाद की सफलतापूर्वक स्वीकार्यता उसके मनोबल को ऊँचा कर देती है । व्यावसायिक जगत में इस आधार पर औद्योगिक इकाइयों को ऊँचे विकास, मध्य विकास तथा निम्न विकास की इकाईयों के नाम से वर्गीकृत किया जाता है। इस प्रकार उद्यमियों को निम्न प्रकार से विभाजित किया जाता है:
(1) विकासशील उद्यमी: इस प्रकार के उद्यमी वातावरण में उच्च विकास दर वाले औद्योगिक जगत में अपनी इकाई स्थापित करते हैं। वे इस प्रकार के व्यवसाय का चुनाव करते हैं जिसके विकास की संभावनाएं हमेशा अधिक होती है।
(2) सुपर विकास उद्यमी: इस प्रकार के उद्यमी वे होते हैं जो अपनी प्रतिभा के आधार पर अपने व्यसाय के असाधारण विकास का प्रदर्शन करते हैं। विकास के आधार का अनुमान विभिन्न प्रभावों, जैस- तरल, लाभदायकता आदि के आधार पर लगाया जाता है।
उपरोक्त वर्णित वर्गीकरण के अतिरिक्त उद्यमियों के संदर्भ में एक अन्य विचारधार का भी यहां वर्णन किया जाना आवश्यक है। प्रत्येक अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रकार के उद्यमी विद्यमान होते हैं। उद्यमी अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में होते है, जैसे- किसान, कारीगार, श्रमिक आदि । अमेरिकी कृषि क्षेत्र में किए गए एक अध्ययन के अंतर्गत डेनोफ ने उद्यमियों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:
(1) नवनिर्माणी/ नवप्रवर्तक उद्यमी: ऐसे उद्यमी अपने सघन परीक्षणों द्वारा नए उत्पादों का निर्माण करते हैं तथा उनसे संबंधित नए बाजारों की खोज करते हैं। वे नए उत्पादों, उत्पादन की नवीन विधियों तथा नए बाजारों को ढूंढने में व्यस्त रहते हैं। ऐसे उद्यमी स्वभाव से आक्रामक होते हैं तथा अपने प्रयासों से नई-नई संभावनाओं को वास्तविकता का रूप देते हैं। पीटर ड्रकर ने भी कहा था कि एक नवनिर्माणी उद्यमी वह होता है जो अवसरों और परिवर्तनों की खोज करता है तथा अवसरों को आवश्यकतानुसार क्रियान्वित करता रहता है। वह पहले से उपलब्ध उत्पादों में परिवर्तन करता है अथवा उनमें कुछ वृद्धि करता है। इस तरह के उद्यमी सामान्यतः विकसित देशों में अधिक होते हैं। विकासशील देशों को इस तरह के उद्यमी की आवश्यकता हमेशा ही बनी रहती है। कम विकसित या गैर औद्योगिक अर्थव्यवस्था में इस तरह के उद्यमी आमतौर पर देखने को नहीं मिलते।
(2) नकली / अंगीकारी उद्यमी: इस प्रकार के उद्यमी सफलतापूर्वक पहले से विद्यमान विधियों को अपनाते है अथवा उनकी नकल करते हैं। ये नए विचार की खोज नहीं करते तथा जोखिम से बचते रहते हैं। यह किसी नई तकनीक या विधि को न अपनाकर पहले से सफलतापूर्वक स्थापित तकनीकों का पालन करते हैं। इस प्रकार ये वे उद्यमी होते हैं जो सफल तथा स्थापित उद्यमियों के पीछे-पीछे चलने का ही प्रयत्न करते हैं। वे अन्वेषक उद्यमी का ही अनुसरण करते हैं इस प्रकार के उद्यमी विकासशील देशों के लिए अत्यंत उपयुक्त माने जाते हैं । इन अर्थव्यवस्थाओं में लोग विकसित देशों के उत्पाद, उसकी तकनीक, ज्ञान आदि को अधिक पसंद करते हैं। आजकल ये उद्यमी विकसित देशों जैसे जापान, फ्रांस, जर्मनी आदि के स्थापित उत्पादों को अपने देश की आवश्यकतानुसार तैयार कर बाजार में लाते हैं तथा लाभ कमाने का प्रयास करते हैं।
(3) सावधान उद्यमी इस प्रकार के उद्यमी उपरोक्त दोनों वर्णित श्रेणियों में नहीं आते हैं। वे न तो अन्वेषक तथा न ही नकल करने की प्रवृत्ति वाले होते है। वे बेहद सावधानीपूर्वक कार्य करने वाले व्यक्ति होते हैं। इस तरह के उद्यमियों में न तो नए उत्पादों को बाजार में लाने की इच्छा होती हैं तथा न ही नई-नई तकनीकों को अपनाने की। वे शर्मीले तथा आलसी स्वभाव के समझे जाते हैं। वे अपने पूर्वजों के कदमों का पूर्ण रूप से पालन करते हैं। ऐसा करने से उन्हें कई बार भारी विफलता का भी सामना करना पड़ता है। वे केवल उन परिस्थितियों में परिवर्तन को अपनाने के लिए तैयार होते हैं जब उन्हें यह लगता है कि अब यदि ऐसा न किया गया तो उनके व्यवसाय को भारी हानि का सामना करना पड़ सकता है। वे सीमा शुल्क, परंपराओं, प्रयासों आदि को बहुत अधिक महत्व देते हैं तथा नियमों का पालन सख्ती से करते हैं तथा जोखिम उठाने के लिए कभी भी तैयार नहीं होते हैं।
(4) आलसी उद्यमी: ये उद्यमी अधिक कठोर व अडिग प्रवृत्ति के होते हैं तथा परिवर्तनों का प्रतिरोध करते हैं । वे आँखें बंद करके अपने उत्पादन की पुरानी तकनीकों का पालन करते हैं चाहे उन्हें इससे हानि ही क्यों न हो रही हो। वे अपने पहले से स्थापित उत्पादन के तरीकों में कोई परिवर्तन नहीं करते। वे रूढिवादी विचारधारा के होते हैं तथा अपने पारंपरिक तरीकों को आवश्यकता से अधिक महत्व देते हैं। इस प्रकार की प्रवृत्ति के उनके अपने ही कारण होते हैं। धन की कमी, नई तकनीक को समझने की असमर्थता, पुरानी विचारधारा आदि जैसे कारण उन्हें पुरानी विधियों से चलने को मजबूर करते रहते हैं। उन्हें फिसड्डी माना जाता है क्योंकि वे पुरानी तकनीकों को नहीं छोड़ते तथा व्यवसाय में नुकसान उठाते रहते हैं। धीरे-धीरे वे या तो अर्थव्यवस्था से बाहर धकेल दिए जाते हैं या अपना व्यापार बंद करने की स्थिति तक ले आते हैं।
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