व्यावसायिक सम्प्रेषण की अवधारणा, उद्देश्य एवं विशेषतायें - Concept, Objectives and Characteristics of Business Communication

व्यावसायिक सम्प्रेषण की अवधारणा, उद्देश्य एवं विशेषतायें - Concept, Objectives and Characteristics of Business Communication


व्यावसायिक सम्प्रेषण के उद्देश्य


व्यवसाय करने में सम्प्रेषण की अत्यधिक आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति तब तक व्यवसाय नहीं कर सकता जब तक कि उसके पास व्यवसाय से सम्बन्धित सूचना के आदान-प्रदान की व्यवस्था न हो। यदि किसी व्यक्ति को रूपया देकर ताले में बन्द करके बिठा दिया जाये तो वह व्यवसाय नहीं कर सकता, ठीक उसी प्रकार व्यवसाय में सम्प्रेषण के निम्न मुख्य उद्देश्य हैं:


1. सूचना का आदान-प्रदान सम्प्रेषण प्रक्रिया का प्रयोग इसलिये किया जाता है ताकि व्यवसाय से सम्बन्धित समस्त सूचनाओं का विनिमय अथवा आदान-प्रदान किया जा सके। इसके माध्यम से क्रय-विक्रय,

ग्राहक, पूर्तिकर्ता तथा अन्य पक्षों के बारे में सभी प्रकार की सूचनायें प्राप्त की जा सकती हैं अथवा भेजी जा सकती हैं।


2. कार्यवाही सम्प्रेषण इस उद्देश्य से किया जाता है कि निश्चित किये गये लक्ष्यों के बारे में क्या कार्यवाही हो रही है, इसका पता लग सके। इसी कारण प्रबन्धक समय-समय पर अनेक प्रकार के विवरण मंगवाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक स्तर पर कार्यवाही हो रही है।


3. निष्पादन सम्प्रेषण के माध्यम से वास्तव में किये गये कार्य की प्रगति का मूल्याकन हो सकता है। यदि कोई कमी हो तो इसे सुधारा जा सकता है। यदि किसी स्थान पर कोई कार्य नहीं हो रहा है तो उचित कार्यवाही की जा सकती है।


4. समन्वय सभी व्यावसायिक क्रियाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिये यह आवश्यक है कि . विभिन्न विभागों तथा अनुभागों में समन्वय स्थापित किया जाये और इस कार्य के लिये सम्प्रेषण का सहारा लिया जाता है। सम्प्रेषण का प्रयोग सभी स्तरों पर सूचनायें भेजने, नीतियों को अपनाने तथा श्रमिकों के मनोबल को बढ़ाने आदि में भी प्रयोजित किया जाता है। अत: सम्प्रेषण, समन्वय के लिए बहुत सहायक है।


5. प्रबन्धकीय कार्यों का आधार किसी भी व्यावसायिक संगठन में प्रबन्ध एक ऐसी प्रक्रिया है। जिसके द्वारा लोगों से कार्य कराया जाता है। प्रबन्ध के मुख्य कार्य हैं- नियोजन, संगठन,

मानवीय संसाधनों को जुटाना, नियुक्ति, अभिप्रेरणा आदि। इन सभी कार्यों के लिये सूचना का आदान प्रदान आवश्यक है जो कि सम्प्रेषण द्वारा किया जाता है। यहाँ तक कि प्रबन्धकीय निर्णय भी सूचना के आधार पर लिये जाते हैं। अतः सम्प्रेषण की अत्यधिक आवश्यकता है।


6. अभिप्रेरणा - कमर्चारियों को कार्य के लिये प्रोत्साहित करने हेतु उन्हें सभी प्रकार की जानकारी देना आवश्यक है और यह कार्य सम्प्रेषण की सहायता से किया जाता है। यदि कर्मचारियों को इस बात का पूर्ण ज्ञान हो कि अच्छा कार्य करने पर उनकी तरक्की होगी अथवा पारितोषिक प्राप्त होगा तो वे निश्चित रूप से ही अच्छा कार्य करेंगे।


7. शिक्षा- व्यावसायिक सगंठनों में कामिकों के शिक्षण तथा प्रशिक्षण हेतु सम्प्रेषण की अत्यधिक आवश्यकता है। सम्प्रेषण के माध्यम से समस्त कर्मचारियों और अधिकारियों का ज्ञान वर्धन किया जाता है, ताकि वह अपने कार्य को अधिक निपुणता से कर सकें।


संक्षेप में, यह कह सकते हैं कि व्यावसायिक सम्प्रेषण एक व्यवसाय की आधारशिला है और इसी की सहायता से सभी प्रकार के व्यावसायिक उद्देश्यों की पूर्ति की जा सकती है। आधुनिक जगत में व्यावसायिक कार्यकलाप इतने अधिक बढ़ चुके हैं कि उन्हें निपटाने के लिये एक कुशल सम्प्रेषण पद्धति की अत्यन्त आवश्यकता है, विशेषकर बैंकों की प्रबन्धकीय सूचना पद्धति की कुशलता इसी पर आधारित है।