डाटा - Data
डाटा - Data
डाटा तथ्यों एवं सूचनाओं का अव्यवस्थित संकलन है। अव्यवस्थित तथ्य अंक और सांख्यिकी का समूह, जिस पर प्रक्रिया करने से वह संकलन अर्थपूर्ण सूचना में परिवर्तित हो जाता है। डाटा को दो प्रकार से विभाजित किया जा सकता है-
1. संख्यात्मक डाटा (Numerical Data) :
यह अंकों से बना डेटा है जिसमे 0,1,2,3 9 तथा दशमलव चिह्न (.) का प्रयोग किया जाता है। इस तरह के डाटा पर हम अंकगणितीय क्रियाओं का उपयोग कर सकते है। जैसे-- विद्यार्थियों की आयु, कर्मचारी का वेतनमान आदि। कंप्यूटर का विकास अंकगणितीय गणनाओं को स्वतः करने के लिए किया गया था। कंप्यूटर की खोज संख्यात्मक डाटा की गणना तथा उसका विश्लेषण करने के लिए किया गया था।
जबकी आजकल इस समय कंप्यूटर का उपयोग संख्यात्मक डाटा की गणना तथा विश्लेषण के लिये केवल 20% ही उपयोग किया जा रहा है 80% कंप्यूटर का उपयोग संख्यात्मक डाटा से परे किया जाता है।
2. गैर संख्यात्मक डाटा (Non Numerical Data)
इसमें अक्षरों, अंकों तथा चिह्नों का उपयोग कर बने डाटा को चिन्हात्मक डाटा कह सकते है। इस पर अंकगणितीय प्रक्रियाओं का प्रयोग नहीं किया जा सकता है बल्की इस तरह के डाटा में हम तार्किक गणना कर सकते है। जिसके बजह से
प्रक्रिया
डाटा जैसे- अक्षर, अंक, सांख्यिकी या किसी चित्र को सुव्यवस्थित करना तथा उनकी गणना करना प्रक्रिया कहलाती है।
डाटा को संकलित करने के उपरांत उसे जाँचा परखा जाता है और किसी क्रम में व्यवस्थित करने के बाद संग्रहित कर लिया जाता है। ऐसा करने पर हम इन संग्रहित सूचनाओं को अन्य व्यक्तियों या समूहों को भेज सकते है जिन्हें इन सूचनाओ की आवश्यकता होती है।
प्रक्रिया में निम्नलिखित पदों का समावेश होता है।
प्रक्रिया को दो भागो में विभक्त किया जा सकता है-
अंकगणितीय गणना
गणना : जोडना, घटाना, गुणा करना, भाग देना। ये सभी कार्य अंकगणितीय गणना के अंतर्गत आएंगे।
तार्किक गणना :
तुलना: बराबर बड़ा छोटा, शून्य, धनात्मक ऋणात्मक ।
निर्णय लेना: किसी शर्त के आधार पर विभिन्न अवस्थाएँ ।
तर्कः आवश्यक परिणाम को प्राप्त करने के लिए पदों का क्रम।
केवल संख्यात्मक डेटा (अंकों) की गणना को ही प्रक्रिया नहीं कहते हैं। कम्प्यूटर की सहायता से दस्तवेजो में त्रुटियाँ ढूढ़ना, टैस्पट को व्यवस्थित करना आदि भी प्रक्रिया कहलाता है। कंप्यूटर आविस्कार अंकगणितीय गणना को त्रुटि रहित लेकिन जल्दी से एवं स्वचालित ढंग से करने के लिए किया गया था। कुछ समय बाद ही इसमें तार्किक इकाई भी जोड़ दिया गया जिसके कारण कंप्यूटर अंकगणितीय गणना के साथ साथ तार्किक गणना ( logical Calculation) करने में भी सक्षम हो गया। इसी कारण कंप्यूटर गैर संख्यात्मक डेटा को समझने तथा उस पर कार्य करने में सक्षम हो गया। इस समय, कंप्यूटर का उपयोग लगभग 20 प्रतिशत संख्यात्मक गणना के लिए किया जाता है जबकि 80 प्रतिशत उपयोग तार्किक गणना पर आधारित होता है।
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