संचालक पहचान संख्या (Director Identification Number ( DIN) - Director Identification Number (DIN)
संचालक पहचान संख्या (Director Identification Number ( DIN) - Director Identification Number (DIN)
कंपनी (संचालकों की नियुक्ति एवं योग्यता) नियमावल, 2014 के अनुसार, संचालक पहचान संख्या" का आशय एक ऐसा पहचान संख्या से हैं जिसे केन्द्र सरकार द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति को, जो किसी कंपनी में संचालक की भांति नियुक्त होने का इच्छुक है, या कंपनी के किसी विद्यमान संचालक को आबंटित किया जाता है, ताकि उसकी पहचान कंपनी के संचालक के रूप में हो सके। संचालकों को आबंटित की जानेवाली संचालक पहचान संख्या' की ई- फाइलिंग विधिक रूप से अनवार्य की गई है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 153 से 169 में संचालक पहचान संख्या के आबंटन संबंधी दिए गए उपबंध इस प्रकार है :
1) धारा 153 के अनुसार कंपनी के संचालक के रूप में नियुक्ति के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को संचालक पहचान संख्या (DIN) आबंटित कराने के लिए निर्धारित फार्म में तथा निर्दिष्ट मुल्य सहित केन्द्र सरकार प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना होगा।
2) धारा 154 के अनुसार, प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के एक महीने के अंदर केन्द्र सरकार निर्देशित स्वरूप में आवेदन को संचालन पहचान संख्या (DIN) आबंटित करेगी।
3) धारा 155 के अनुसार, किसीभी व्यक्ति को उसके जीवनकाल में एक ही संचालक पहचान संख्या (DIN) आबंटित की जाएगी।
4) धारा 156 के अनुसार, संचालक पहचान संख्या ( DIN) आबंटिन की सूचना प्राप्त होने के एक महीने के अंदर, प्रत्येक विद्यमान संचालक अपनी संचालक पहचान संख्या (DIN) उन सभी कंपनियों को सूचित करेंगे जिनमें वे संचालक के रूप में कार्य कर रहे है;
5) धारा 157 के अनुसार, संचालक पहचान संख्या (DIN) की सूचना मिलने के 15 दिन के भीतर अंदर प्रत्येक कंपनी अपने सभी संचलकों की पहचान संख्या कंपनी रजिस्ट्रार अथवा केन्द्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किसी अन्य अधिक या प्राधिकारी को निर्धारित फीस के साथ सूचित करेगी।
6) धारा 158 के अनुसार, यदि किसी विवरणी या सूचना में किसी संचालक का हवाला या ब्यौरा दिया गया हो तो उसे फाइल करने से पहले कंपनियाँ ऐसे संचालक की संचालक पहचान संख्या का भी उल्लेख करेंगी।
7) धारा 159 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संचालक धारा 152,55 व156 के उपबंधों के अधीन बनाए किन्ही प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो दोषी व्यक्ति या संचालक को 6 माह तक की केद एवं 50,000 रूपये तक का जुर्माना किया जा सकता है तथा त्रुटि चलते रहने की अतिरिक्त जुर्माना किया जा सकता है।
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