छोटे शेयरधारकों का संचालक - director of small shareholders
छोटे शेयरधारकों का संचालक - director of small shareholders
कंपनी अधिनियम की धारा 151 के अंतर्गत एक सूचनीय कंपनी एक संचालकका चुनाव छोटे शेयरधारकों द्वारा, ऐसी रीति तथा नियम व शर्तोंके अधीन जो निर्धारित की जाएं, या करा सकती है। इस प्रावधान के प्रयोजन के लिए छोटे शेयरधारक का आशय ऐसे शेयरधारक से है जो 20,000 रूपये से अधिक, अथवा अन्य निर्धारित राशि से अधिक, अंकित मूल्य के शेयर न रखता हो ।
उपरोक्त उपबंधों से निम्नलिखित बातें स्पष्ट होती है:
1) कंपनी की दशा में कम-से-कम तीन संचालकों में से छोटे शेयरधारियों द्वारा एक सूचनीयत संचालक चूना जा सकता है और ऐसा चुना गया संचालक स्वयं भी कंपनी को छोटा संचालक होना चाहिये।
2) छोटे शेयरधारियों के प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने वाले संचालक के चुनाव में केव छोटे शेयर धारी ही मतदान कर सकते हैं और उनमें इिक्वटी शेयरधारी तथा पूर्वाधिकार शेयरधारी, दोनों शामिल होंगे।
केंद्र सरकार ने कंपनी (संचालकोंकी नियुक्ति एवं योग्यता) नियमावली, 2014 को लागूअधिसूचित किया है। यह नियमावली, अप्रैल 2014 से लागू हुए। इस नियमावली का नियम 7, अन्य बातों के साथ-साथ, निम्नलिखित व्यवस्था करता है :
(i) कोई सूचीयत कंपनी या तो अपने आप या छोटे शेयरधारियों की कुल संख्या के कम से कम 1 / 10 या 1000 छोटे शेयरधारियों, जो भी कम हो,
द्वारा लिखित नोटिस दिये जाने पर छोटे शेयरधारियों द्वारा संचालक का चुनाव करा सकती है।
ii) छोटे शेयरधारियों द्वारा चुना गकया संचालक एक समय पर 3 वर्ष से अधिक के लिए नहीं चुना जा सकता है।
iii) ऐसा संचालक प्रबंध-संचालक अथवा पूर्णकालिक संचालक के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता।
iv) कोई भी व्यक्ति एक ही समय में दो कंपनियों से अधिक कंपनियों में छोटे शेयरधारियों द्वारा चुने गये संचालक के रूप में काम नहीं कर सकता।
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