समामेलन प्रमाण-पत्र का प्रभाव , समामेलन प्रमाण-पत्र की निश्चायता - Effect of certificate of amalgamation, certainty of certificate of amalgamation

समामेलन प्रमाण-पत्र का प्रभाव , समामेलन प्रमाण-पत्र की निश्चायता - Effect of certificate of amalgamation, certainty of certificate of amalgamation


कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2015 द्वारा यथा संशोधित धारा के अनुसार, समामेलन प्रमाण-पत्र में लिखी गई तिथि से ज्ञापन पत्र के अभिदानकर्ता कंपनी के सदस्य बन जाते है; कंपनी ज्ञापन पत्र में दिये हुए नाम से समामेलित निकाम बन जाती है। यह समामेलित कंपनी वाले सभी कार्य कर सकती है एवं इसका शाश्वत उत्तराधिकार होता है।


समामेलन प्रमाण-पत्र की निश्चायता


कंपनी अधिनियम, 2013 में समामेलन प्रमाण-पत्र की निश्चायकता के संबंध में कोई उपबंध नहीं किया गया है। परन्तु न्यायिक निर्णयों में यह माना गया है कि एक बार जारी किया गया समामेलन प्रमाण-पत्र इस बात का निश्चायक साक्ष्य होगा कि कंपनी का समामेलन विधिवत हुआ है।


यह ध्यान देने योग्य है कि यदि कोई अवैधानिक उद्देश्य वाली कंपनी पंजीकृत कर दी गई है तो प्रमाण-पत्र के निर्गमन से अवैधानिक उद्देश्य वैद्य नहीं बन जाते। परन्तु समामेलन का प्रमाण-पत्र कंपनी अस्तित्व का निश्चायक प्रमाण बना रहता है और कंपनी के विविध व्यक्तित्व को प्रमाण-पत्र को रद्द करके समाप्त नहीं किया जा सकता।


3. पूँजी अभिदान (Capital Subscription)


पूँजी अभिदान अवस्था के अंतर्गत कंपनी के लिए आवश्यक पूँजी प्राप्त करने का कार्य किया जाता है। चूँकि शेयर पूँजी वाली एक निजी कंपनी अपने अंतर्नियमों द्वारा अपनी प्रतिभूतियों को क्रय करने के लिए जनता को आमंत्रित करने पर प्रतिबंध लगाती है

इसलिए इसे 'पूँजी अभिदान अवस्था से नहीं गुजरना होता है। निजी कंपनी द्वारा कंपनी अधिनियम की धारा 42 के अनुसार, प्राइवेट प्लेसमेन्ट के माध्यम से लोगों के चुनिंदा समूह में अपनी प्रतिभूतियों को बिक्री के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है। सार्वजनिक कंपनी अपनी प्रतिभूतियों को क्रय करने के लिए जनता को आमंत्रित कर सकती है तथा विवरण पत्रिका के माध्यम से शेयर जनता को बेच सकती है।


जनता से पूँजी निर्गमन करने को नियंत्रित करने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना 1992 में की गई। सेबी के पास प्रतिभूतियों में निवेशकों के हित को सुरक्षित करने तथा प्रतिभूति बाजार को नियंत्रित करने के लिए नियम एवं विनियम बनाने का अधिकार है। निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए सेबी ने 'सेबी विनियम, 2009 को जारी किया हैं।


जनता से पूँजी का निर्गमन करने के संबंध में सेबी द्वारा जारी किये गये सेबी विनियम, 2009 का अनुपालन करने के बाद संचालक विवरण पत्रिका की एक प्रतिलिपि रजिस्ट्रार के पास भेजते हैं तथा विवरण पत्रिका को जनता में निर्गमित करके जनता को कंपनी के शेयर क्रय करने के हेतु निमंत्रित करते हैं। तत्पश्चात् कंपनी के बैंकर के माध्यम से शेयरों के लिए आवेदन प्राप्त किए जाते हैं। यदि प्रार्थित पूँजी प्रस्तावित निर्गमन राशि की कम से कम 90% न्यूनतम अभिदान राशि के बराबर हो जाती है, तथा वैद्य आबंटन की अन्य शर्तों को पूरी की जाती है तो संचालक आबंटन का औपचारिक संकल्प पारित करते है; तत्पश्चात आबंटितियों को आवंटन पत्र भेजे जाते है; आबंटन का विवरण रजिस्ट्रार को भेजा जाता है तथा आबंटितियों को आबंटन प्रमाण-पत्र के बदले शेयर प्रमाण-पत्र निर्गमित किये जाते हैं। आवश्यक पूँजी प्राप्त करने के बाद कंपनी के निर्माण की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तथा कंपनी व्यवसाय शुरू करने में सक्षम हो जाती है।


कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2015 के लागू होने से पहले धारा 11 के अधीन कंपनी का व्यवसाय प्रारंभ करने का प्रमाण-पत्र प्राप्त करना आवश्यक था। परन्तु अब कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2015 द्वारा धारा 11 को हटा दिया गया है।