प्रभावी श्रवण की रणनीतियाँ - effective listening strategies

प्रभावी श्रवण की रणनीतियाँ - effective listening strategies


मानव मस्तिष्क के विकसित होने में श्रवण एवं दृश्य की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है एवं एक साधारण मनुष्य बातचीत के द्वारा ही अपने विचारों को एवं दृष्टिकोण को विकसित करता है। अतः यदि हम श्रवण प्रक्रिया से पूर्व ही स्वयं को सीखने की रणनीति के अनुसार नियन्त्रित करके बैठते हैं तो हम अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। यदि आप सुनने में अत्यन्त कुशल हैं तो आपको आपकी नेतृत्व क्षमता के विकास में, टीम को संगठित करने में, सम्बन्ध बनाने आदि में महत्वपूर्ण सफलता अर्जित हो सकती है। यदि आप निम्नांकित रणनीतिक सुझावों पर अमल करें तो श्रवण क्षमता एवं कुशलता में वृद्धि की अपेक्षा की जा सकती है।


बातचीत के लिए अपने लक्ष्य को निर्धारित करना


एक कुशल श्रोता बातचीत की प्रक्रिया हेतु अपनी भूमिका के बारे में अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं तथा अपने बोलने एवं सुनने की पसंद को इन लक्ष्यों के आधार पर ही चुनते हैं। किसी व्यापारिक बातचीत के लिए निम्नांकित रणनीतियाँ हो सकती है।


(1) प्रायः हम बातचीत के दौरान कुछ सूचनाओं के आदान प्रदान में ज्यादा इच्छुक होते हैं। अतएव बातचीत के दौरान हमें किस प्रकार की सूचनाओं की आवश्यकता है, इसका पूर्व आंकलन हमारे लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है ताकि हम उन बिन्दुओं को अवश्य शामिल कर लें।


(2) व्यापारिक बातचीत के दौरान हम यदि कार्यकारी सम्बन्धों को बनाने में सक्षम होते हैं तो ये सम्बन्ध


भविष्य में हमारी व्यापारिक गतिविधियों के लिए लाभप्रद हो सकते हैं। उदाहरणार्थ, एक विक्रेता को


अपने उपभोक्ताओं से अच्छे सम्बन्ध विकसित कर लेने चाहिए ताकि भविष्य में उनकी सहायता से


व्यापार को बढ़ाया जा सके।


(3) जब कभी हम व्यापारिक बातचीत करें तो यह ध्यान रखें कि जो भी प्रस्ताव इस बातचीत में रखें वे अच्छा महसूस करने वाले हों तथा दूसरे की भावना एवं सम्मान का पूरा ध्यान रहे।


अपने विकल्पों का ज्ञान होना


जब कभी भी अप बातचीत का एक हिस्सा होते हैं तो आपके पास बोलने एवं सुनने की ही भूमिकायें हो सकती हैं।

आपको अपने विकल्पों के बारे में पता होना चाहिए अर्थात किस समय आपको बोलना है तथा किस समय आपको ध्यानपूर्वक सुनना है। यदि आप बात चीत के दौरान तीव्रता से अपने बोलने या सुनने के विकल्प को कार्यान्वित कर लेते हैं तो आप निश्चित ही इसका लाभ उठा सकते हैं।


जब कभी आप किसी व्यापारिक उद्देश्य से बातचीत के लिए या उपभोक्ता सम्बन्ध विकसित करने के लिए या किसी सौदेबाजी के लिए वार्तालाप में प्रतिभाग करते हैं तो याद रखिए कि एक कुशल श्रोता होने का लाभ आपको सदैव मिलेगा। यद्यपि आप अधिकारी के में हो तो इसका तात्पर्य यह कदापि नहीं निकालना चाहिए कि आपका अधिक बोलना ही आपके लिए हितकर होगा अपितु ज्यादा से ज्यादा सूचनाओं को एकत्र करने के लिए आपका ज्यादा श्रवण करना अधिक लाभदायक हो सकता है।

यदि आप साक्षात्कार में जाएं तो भी आप यह सुनिश्चित कर लें कि साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों को भली भाँति सुनकर ही आपको उनके उचित उत्तर देने हैं ताकि अपने हिसाब से ज्यादा बोलना और कम सुनना कि


आप दोषी न रहें। यदि अनवरत रूप से वार्तालाप चल रहा हो तो आप आज्ञा लेकर बोलने का प्रयत्न करें।


अपने बोलने को केन्द्रित एवं स्पष्ट करना


प्रायः ऐसा होता है कि हम श्रवणोपरान्त प्रश्न पूछते समय कहना कुछ और चाहते हैं तथा कह कुछ और जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि बहुत अधीरता दिखाने पर हम बात पूरी तरह से सुनते नहीं है। तथा परिणाम स्वरूप अपने प्रश्न को भी बहुत स्पष्ट एवं केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। यदि आपको कुछ प्रस्तुतीकरण करना है तो आपको चाहिए कि जो मुख्य श्रोत्र आप बोलना चाहते हैं उनको भली भाँति तैयार कर लें ताकि आपके श्रोतागण उस विषय को अच्छे से समझ जाएं तथा आप एक कुशल श्रवण में मदद कर सकें।