उद्यमी के कार्य - Entrepreneur's Functions
उद्यमी के कार्य - Entrepreneur's Functions
उद्यमियों के कार्यों के संदर्भ में उपलब्ध जानकारी एक भ्रम की स्थिति पैदा करती है। कार्ल मैन्जर ने उद्यमियों को ऐसा व्यक्तित्व माना है जो परिवर्तन एजेंट के रूप में कार्य करते हुए साधनों को इक्ट्ठा करके उपयोगी वस्तुओं एवं सेवाओं को तैयार करते हैं। वे अपने कार्यों द्वारा औद्योगिक विकास का वातावरण तैयार करते हैं जान स्टूअर्ट मिल के अनुसार उद्यमी गैर मानवीय कार्यों को संगठित करने वाला व्यक्ति होता है, जिसके बदले में उसे भुगतान किया जाता है। मार्क कैसुन के अनुसार, उद्यमी दुर्लभ संसाधनों का समुचि उपायोग करने वाला व्यक्ति होता है। कुछ विद्वानों एवं लेखकों के अनुसार उद्यमी का कार्य व्यावसायिक गतिविधियों का संयोजन करना, उनका प्रभावपूर्ण प्रबंध करना,
जोखिम उठाना, नियंत्रण करना आदि होता है । इस प्रकार संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि उद्यमी कई महत्वपूर्ण कार्य करने वाला व्यक्ति होता है। वह व्यवसाय की स्थापना करता है, जोखिम उठाता है तथा लाभ भी कमाता हैं। एक उद्यमी कई प्रकार के महत्वपूर्ण कार्य करता है जिनमें से कुछ प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
(1) जोखिम उठाना: जोखिम उठाना या अनिश्चितता का अर्थ भविष्य की आकस्मिक तथा पहले से अनुमान न लगाए जाने वाली परिस्थितियों के कारण पैदा होने वाली जोखिम अथवा हानि की संभावना से होता है। एक व्यवसाय में जोखिम हमेशा ही विद्यमान रहता है। इस प्रकार के जोखिम के बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे- उपभोक्ताओं की रूचि में परिवर्तन, उत्पादन की तकनीक में परिवर्तन,
नई खोज, प्रतिस्पर्धा आदि । इस तरह के जोखिमों का कोई बीमा भी नहीं होता है। उद्यमी व्यापार में इस तरह के सभी जोखिमों को उठाने का कार्य करता है। उद्यमी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य जोखिम उठाना तथा अपने ज्ञान और कौशल से उसका व्यवसाय में संतुलित एवं लाभकारी ढंग से प्रयोग करना होता है। अनावश्यक जोखिमों से प्रत्येक उद्यमी को दूरी बनाकर रखनी होती है।
(2) व्यावसायिक निर्णय: उद्यमी को एक निर्णय लेने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। उसे समाज को दी जाने वाली वस्तुओं के उत्पादन के संबंध में निर्णय लेना होता है। उसे यह निर्णय लेना होता है कि वह किस उद्योग में कार्य करेगा ताकि वह लाभ कमा सके।
उसे उत्पादन की सबसे उपयुक्त विधि का चुनाव करना होता है व्यवसाय का आकार, संसाधनों की उपलब्धता, संसाधनों का समुचित प्रयोग, व्यवसाय की जगह, उत्पाद की प्रकृति, उत्पाद का विपणन जैसे सभी महत्वपूर्ण निर्णयों को उसे ही लेना होता है।
(3) प्रबंधकीय कार्य: एक उद्यमी को अपने व्यवसाय के संबंध में अनेक प्रबंधकीय कार्यों के बारे में निर्णय लने होते हैं। ये कार्य उसकी संस्था के आकार एवं प्रकृति के अनुसार होते हैं। इस तरह के कार्यों में मुख्य रूप से उत्पादन की योजना बनाना, वित्त का प्रबंध करना, कच्चा माल खरीदना, उत्पादन के साधन उपलब्ध करवाना, बिक्री को संगठित करना, कर्मचारी भर्ती तथा ट्रेनिंग आदि शामिल होते हैं। यह बहुत ही कठिन एवं महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है। एक बड़े प्रतिष्ठान में ये सभी कार्य करने के लिए प्रबंधकीय कर्मचारी नियुक्त किए जाते हैं, परंतु छोटे प्रतिष्ठान में ये सभी कार्य स्वयं उद्यमी को ही करने होते हैं।
(4) अन्वेषक का कार्य: शुम्पीटर के अनुसार उद्यमी सामान्यतः एक अन्वेषक होता है जो उत्पादन के सभी साधनों को अपने व्यवसाय के लिए संयोजित करता है। वह उद्यमी ही है जो व्यवसाय की अवधारणा के बारे में सोचता है तथा उसे वास्तविक रूप में लाता है। वह परियोजना के आर्थिक तथा तकनीकी पहलुओं के बारे में भी विचार करता है। अतः व्यवसाय की सफलता उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है जो उसे अन्वेषण जैसे कार्यों के लिए प्रेरित करती है। इसके अंतर्गत उद्यमी नए उत्पादों का उत्पादन, नए बाजारों की खोज, उत्पादन की नई तकनीक का विकास, उत्पादन के संसाधनों के नए-नए संयोजन जैसे महत्वपूर्ण कार्य करता है। इस प्रकार उद्यमी के ये कार्य उसके व्यापार की सफलता के लिए समृद्ध आधार तैयार कर सकते हैं।
अतः सामान्यतः एक उद्यमी समाज के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य करता है।
वह विभिन्न हितधारकों की अपेक्षाओं को भी पूरा करता है। वह एक समाजवादी अर्थव्यवस्था में योजनाकार तथा एक पारंपरिक अर्थव्यस्था में पुजारी या राजा भी कहा जा सकता है। उपरोक्त वर्णित कार्यों के अतिरिक्त कुछ अन्य संबंधित बातों का वर्णन यहां किया जाना आवश्यक है:
किलबे के अनुसार उद्यमी के 13 महत्वपूर्ण कार्य होते हैं जिनमें प्रबंधकीय कार्य भी शामिल होते हैं। ये कार्य निम्नलिखित हैं :
(i) बाजार में उपलब्ध अवसरों की पहचान करना
(ii) दुर्लभ संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखना
(iii) व्यवसाय का सामान खरीदना
(iv) उत्पाद का विपणन करना तथा प्रतियोगिता का सामना करना
(v) सार्वजनिक नौकरशाही के साथ व्यवहार करना (रियायतें, लाइसेंस, कर आदि के बारे में)
(vi) संस्था में मानवीय संसाधनों का प्रबंधन करना
(vii) वित्त का प्रबंध करना
(viii) उपभोक्ता एवं आपूर्तिकर्ता से संबंध स्थापित करना
(ix) उत्पादन का प्रबंधन
(x) फैक्ट्री की देखभाल करना
(xi) औद्योगिक तकनीक का प्रबंधन करना
(xii) उत्पादन की तकनीक तथा उत्पाद की गुणवत्ता को बढ़ाते रहना
(xiii) उत्पादन की नई तकनीक लागू करना तथा नए उत्पाद बाजार में लाना
किलबे ने इन सभी कार्यों को चार श्रेणियों में विभाजित भी किया है, जैस- विनिमय कार्य
राजनीतिक प्रशासन, प्रबंधन नियंत्रण तथा प्रौद्योगिकी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उद्यमी को प्रथम दो श्रेणियों के कार्यों को स्वयं करने का प्रयास करना चाहिए तथा अंतिम दो श्रेणियों के लिए वह प्रबंधकीय कर्मचारी अथवा विशेषज्ञों की मदद ले सकता है। एक अन्य विद्वान आर्थर एच. कोल ने उद्यमी को एक निर्णय लेने वाले व्यक्ति के रूप में वर्णित किया है जो सामान्यतः निम्नलिखित कार्य करता है:
(i) उद्यम के लिए उद्देश्यों का निर्धारण करना तथा उनमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन करते रहना जिससे उन्हें और अधिक लाभदायक एवं प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके।
(ii) संगठन का विकास करना तथा अधीनस्थों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करना । (iii) पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखना तथा वर्तमान एवं भावी विनियोजकों के साथ मधुर संबंध स्थापित करना।
(iv) कुशल तकनीकी उपकरणों की मांग तथा उपकरणों में परिवर्तन की मांग को पूरा करना ।
(v) उत्पाद के लिए नए बाजारों की खोज करना तथा उपभोक्ता की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करना ।
(vi) सरकारी अधिकारी तथा समाज के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का प्रयास करते रहना।
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