उद्यमियों की समस्याएँ/कठिनाइयाँ - Entrepreneurs' problems/difficulties
उद्यमियों की समस्याएँ/कठिनाइयाँ - Entrepreneurs' problems/difficulties
व्यावसायिक उद्यमों की स्थापना बड़े-बड़े सपनों को सच करने की आशा के साथ की जाती है। परंतु व्यवसाय की सफलता केवल उद्यमी के व्यक्तिगत प्रयासों पर ही निर्भर नहीं होती। सपनों को सच्चाई में • परिवर्तित करना भी आसान कार्य नहीं होता। उद्यमियों को ऐसा करते समय विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कठिनाइयां या समस्याएं उद्यमी के साथ परछाई की तरह चलती हैं। यदि वह उनका सामना सही तरह से न करे तो उसे अपने व्यवसाय को बंद भी करना पड़ सकता है। उद्यमियों की कुछ मुख्य समस्याएं निम्नलिखित हैं:
(1) अनुभवी प्रबंधन की कमी यह उद्यमियों की सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक है। आमतौर पर उद्यमी के प्रबंधन की टीम नई होती है। सामान्यतया उसके विभिन्न स्तर के कर्मचारियों का प्रबंधन के क्षेत्र में बहुत अधिक अनुभव भी नहीं होता है।
उनका पेशेवर क्षेत्र में ज्यादा अनुभव न होना कई प्रकार की समस्याओं को जन्म देता है तथा एक जोखिम भरा वातावरण भी तैयार कर देता है। कई बार उद्यमी के पास अनुभवी कर्मचारी तो होते हैं परंतु एक नई कंपनी में उत्पन्न होने वाली नई तरह की समस्याओं को समझने में उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार एक अनुभवी प्रबंधन की कमी एक मुख्य समस्या बन जाती हैं ।
(2) विकास की तेज गति: उच्च ऊर्जा स्तर तथा नए-नए विचारों के साथ उद्यमी कुछ उद्यम को सफलतापूर्वक स्थापित कर लेते हैं। परंतु कई बार यह सफलता भी उनके लिए समस्याएं उत्पन्न करती हैं। व्यवसाय का तेजी से हो रहा विस्तार उनके लिए एक अलग तरह की समस्याएं लेकर आता है। तेज विकास उनके व्यापार में उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक पूँजी की आवश्यकता को जन्म देता है।
इससे उत्पादन की मशीनों पर अधिक दबाव पड़ता है। इस प्रकार यदि उद्यमी इन चुनौतियों का सामना सहीं ढंग से न कर पाए तो वह मुसीबत में फंस सकता है कुछ उद्यमियों को तो इस कारण से अपने उद्यम को बंद भी करना पड़ सकता है।
(3) व्यावसायिक संबंधों का अभावः किसी भी व्यवसाय की सफलता टीम वर्क पर निर्भर करती है। इस टीम में विनियोजक, साझेदार, कमर्चचारी, ग्राहक आदि सभी शामिल होते हैं। इनमें प्रत्येक उद्यम की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होता है। एक उद्यमी को इन सभी के साथ अपने व्यावसायिक संबंध स्थापित करने होते हैं तथा उनमें सामंजस्य भी स्थापित करना होता है। ऐसा करने के पश्चात ही वह प्रतिस्पर्धा का सामना करते हुए सफल हो सकता है। यह संबंध व्यवसाय की सफलता को निर्धारित करते हैं, परंतु ऐसा करना आसान कार्य नहीं होता है।
(4) कमजोर विपणन विपणन एक ऐसा क्षेत्र है जो किसी भी उद्यम की सफलता की दिशा व दशा को निर्धारित करता है व्यवसाय में तैयार किए गए उत्पाद को तेजी से बाजार में बेचा जाना आवश्यक होता है ताकि उनके रख-रखाव के खर्चों से तथा अनावश्यक उत्पादन की अधिकता से बचा जा सके। इसके लिए प्रभावशाली विपणन करते हुए विज्ञापन आदि के रूप में काफी राशि भी खर्च करनी पड़ती है। सामान्यतया छोटे उद्यमी आमतौर पर कमजोर विपणन नीति के 1 कारण समस्याओं से घिरे रहते हैं। विज्ञापन के लिए उनका बजट भी अधिक नहीं होता तथा साहस भी अधिक नहीं होता। वे इस क्षेत्र में अधिक राशि खर्च करने से डरते भी हैं क्योंकि यह बिक्री की वृद्धि का एकमात्र तरीका नहीं है। कई बार बिक्री की धीमी गति की वजह से उन्हें अत्यधिक स्टॉक के इकट्ठा हो जाने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
(5) प्रशिक्षित एवं अनुभवी मानवशक्ति की कमी: मानवीय संसाधन किसी भी उद्यम की सफलता के लिए आजकल अत्यंत महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
इनका मुख्य कारण यह है कि उत्पादन के सभी संसाधनों का कुशलतम प्रयोग इन पर निर्भर होता है। संगठन में प्रशिक्षितत एवं अनुभवी कर्मचारियों की कमी का सामना नए उद्यम को करना पड़ता है जिसके कारण जोखिम भरी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसा होने का मुख्य कारण यह होता है कि अनुभवी कर्मचारी नई संस्था में आने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें अपने भविष्य को संवारना होता है। वे स्थापित संगठनों में कार्य करना ज्यादा पसंद करते हैं। नए उद्यम कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं विकास पर अधिक खर्च नहीं करते, जिसके कारण से अधिक अनुभवी कर्मचारी इन संस्थाओं में आने से परहेज करते हैं। इस तरह की समस्या व्यवसाय की उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है ।
(6) खराब वित्तीय स्थिति: व्यवसाय छोटा हो या बड़ा, वित्तीय संसाधन उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। वित्तीय संसाधन व्यवसाय को स्थापित करने तथा उसे आगे ले जाने के लिए आवश्यक होते हैं।
इसके अतिरिक्त आसान शर्तों पर वित्त की उपलब्धता तथा सही समय पर उपलब्धता भी आवश्यक होती है। कई बार उद्यमी व्यवसाय के संचालन के अन्य आवश्यक कार्यों में व्यस्त रहता है तथा वित्तीय प्रबंधन पर अधिक ध्यान नहीं देता। इस कारण से वह वित्तीय स्थिति खराब कर बैठता है। कई बार वित्तीय प्रबंधन में वह सामान्य गलतियाँ करता जाता है।
(7) अकुशल स्कंध प्रबंध: स्कंध का उचित प्रबंधन प्रत्येक संस्था के सामान्य प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है | स्टॉक की मात्रा कम हो जाने से उत्पादन की प्रक्रिया पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है इसके विपरीत अत्यधिक स्कंध रखने से इसके रख-रखाव की लागत, नुकसान, अपव्यय आदि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नाशवान प्रकृति वाली वस्तुओं के मामले में तो वस्तुओं के खराब होने का भी डर रहता है।
तकनीकी उत्पादों के संबंध में अधिक स्टॉक रखना जोखिम भरा होता है क्योंकि नई तकनीक आने पर पुराने उत्पाद अप्रचलित हो जाते हैं। इसलिए संस्था को उचित स्कंध प्रबंधन अवश्यक करना चाहिए। बहुत
-सी कंपनियाँ या उद्यम ऐसा नहीं कर पाते तथा समस्याओं में घिर जाते हैं।
(8) अनुचित मूल्य निर्धारण: व्यवसाय की सफलता में उसके उत्पादों की कीमत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कीमत निर्धारण के क्षेत्र पर बहुत अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है। कई नए उद्यम कीमत का निर्धारण करते समय विभिन्न अत्याधुनिक तकनीकों की मदद लेते हैं। ऐसा करते समय बहुत सी बातों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे- लागत संरचना, मांग की प्रकृति, प्रतियोगिता का स्तर, बाजार में संभावनाएं आदि । परंतु कीमत निर्धारण आसान प्रक्रिया नहीं है तथा उद्यमियों को ऐसा करने में कई तरह की समस्याएं आती है।
(9) लक्ष्य: व्यावसाय की स्थापना हो जाने के पश्चात प्रत्येक उद्यमी का पूरा ध्यान व्यवसाय के लक्ष्य को स्थापित करने पर ही लगा रहता है। वह अपना ध्यान वर्तमान परिस्थितियों पर ही केंद्रित करते हैं तथा लंबी अवधि के लिए तय किए उद्देश्यों / लक्ष्यों पर उनका ध्यान ही नहीं जा पाता । वे रोजमर्रा की समस्याओं को सुलझाने में ही लगे रहते हैं। कई बार समस्याएं अपने मुख्य लक्ष्यों से ध्यान हटाने की वजह से उत्पन्न हो जाती हैं। इससे व्यवसाय समस्याओं में घिर जाता है। इसलिए प्रत्येक उद्यमी को अपने उद्यम के दीर्घकालीन लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही कार्य करना चाहिए।
इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि समस्याएं उद्यमी का पीछा एक परछाई की तरह करती है। सीमित संसाधनों, अनिश्चितता भरा वातावरण, अनुभवहीन कर्मचारी कड़ी प्रतियोगिता जैसे तत्व एक स्थापित तथा नए उद्यमियों को समस्याओं से घेरे रखते हैं। यदि उद्यमी इस क्षेत्र में नया हैं तो उसका जोखिम तथा समस्याओं का स्तर कहीं अधिक होता हैं। अतः प्रत्येक उद्यमी को कड़ी मेहनत करनी चाहिए तथा दीर्घकालीन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने का प्रयास करते रहना चाहिए।
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