उद्यमिता तथा आर्थिक विकास या उद्यमिता के सामाजिक एवं आर्थिक लाभ - Entrepreneurship and economic development or social and economic benefits of entrepreneurship
उद्यमिता तथा आर्थिक विकास या उद्यमिता के सामाजिक एवं आर्थिक लाभ - Entrepreneurship and economic development or social and economic benefits of entrepreneurship
आर्थिक विकास का तात्पर्य उस स्थिति से है जिसके अंतर्गत एक देश की प्रति व्यक्ति आय में समय के साथ-साथ वृद्धि होती जाती है। उद्यमिता की आर्थिक विकास में भूमिका का वर्णन करने से पहले, यह आवश्यक हो जाता है कि आर्थिक विकास की अवधारणा का अर्थ समझा जाए। विभिन्न विद्वानों ने आर्थिक विकास को इस प्रकार पारिभाषित किया है:
1. डब्ल्यू. करेवेश के अनुसार, “आर्थिक विकास का अर्थ एक अर्थव्यवस्था के अंदर होने वाले आर्थिक विकास से है इसका मुख्य केंद्र देश की ऊँची तथा बढ़ती हुई प्रति व्यक्ति आय होता है ।"
2. विलियमसन एवं बट्रिक के अनुसार, “आर्थिक विकास का अर्थ उस स्थिति से है जिसके अंतर्गत एक देश या उसके हिस्से के लोग उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग करते हुए देश की प्रति व्यक्ति उत्पादन तथा सेवाओं की मात्रा में निरंतर वृद्धि करते रहते हैं।"
इस प्रकार आर्थिक विकास केवल एक घटना मात्र नहीं है बल्कि इसके लिए दृष्टि, कड़ी मेहनत और अच्छी रणनीति की आवश्यकता होती है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह एक उद्यमी ही होता है जो देश में अनुकूल परिस्थितियों को खोजता है, लोगों की आवश्यकताओं को समझता है तथा उसके अनुसार संसाधनों को इकट्ठा करता है ताकि वह उद्यम की स्थापना करके उन आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इसमें उद्यमिता ही है जो उद्यमी को उद्यम करने के लिए प्रेरित करती है। इस संदर्भ में शुम्पीटर ने कहा है कि, आर्थिक विकास में विभिन्न नये उत्पादन के संसाधनों को नये तरीके से संयोजित किया जाता है तथा नये उत्पादन के साधनों की भी खोज की जाती है। उद्यमिता द्वारा नये विचार उत्पन्न होते हैं जिन्हें आर्थिक विकास के लिए लागू किया जाता है। उद्यमी आर्थिक विकास के लिये एक ट्रिगर दबाने का कार्य करता है तथा आर्थिक विकास की चिंगारी पैदा करता है।
बदलते वातावरण उद्यमियों को नए-नए अवसर प्रदान करता है जिसके परिणामस्वरूप उद्यमिता द्वारा देश में आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जाता है। उद्यमिता के कुछ सामाजिक एवं आर्थिक लाभ निम्नलिखित हैं :
1. नवप्रवर्तन / नये विचारों का निर्माण एक उद्यमी हमेशा परिवर्तन के लिए प्रयत्नशील रहता है। संसाधनों को इकट्ठा करने के अलावा वह नये-नये विचारों तथा नये उत्पादन के साधनों को समाज में लागू करता रहता है। नये-नये उद्यमों की स्थापना से अर्थव्यवस्था में नए उत्पादन व सेवाएँ अस्तित्व में आते हैं। जैसे-जैसे इन उत्पादों एवं सेवाओं की माँग बढ़ती है उद्यमिता का गुण उद्यमी को अपने उद्यम के विस्तार के लिए प्रेरित करता है। उद्यमी इस प्रकार नए-नए विचारों से अपने उद्यम का भी आवश्यकतानुसार विकास करते हैं।
2. आर्थिक विकास को ईशन देना उद्यमिता अर्थव्यवस्था में लघ स्तर के व्यवसाय को विशेष रूप से बढ़ावा देती है इसे आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समझा जाता है । लघु क्षेत्र का विकास उत्पादन बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा कम करने, गुणवत्ता वाले उत्पाद लाने, एकाधिकार को कम करने जैसे महत्त्वपूर्ण लाभ देश को देता है तथा देश के आर्थिक विकास में योगदान भी करता है।
3. स्वामित्व के अवसरों की पहचान उद्यमिता लोगों को पारंपरिक नौकरी के विकल्प के रूप में व्यवसाय शुरू करने का विकल्प प्रदान करती है। नए संभावित उद्यमी समाज में नए अवसरों की पहचान करके नए-नए उद्यम स्थापित करते हैं। उद्यमिता नए उद्यमियों को अपना व्यवसाय स्थापित करके कार्य करने की अपेक्षा कार्य/रोजगार देने वाले व्यक्तियों के रूप में तैयार करती है।
4. व्यवसाय तथा समाज की संरचना में परिवर्तन लाना नए उद्यम तथा उनके नए-नए उत्पाद वर्तमान व्यवसाय की संरचना में परिवर्तन लाते हैं। उससे समाज का स्वरूप भी धीरे-धीरे बदलता है। उद्यमिता व्यवसाय करने की विधियों में परिवर्तन लाता है जिससे सामाजिक संरचना में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
5. आर्थिक शक्ति का बँटवारा (विकेंद्रीकरण) उद्यमिता देश में आर्थिक विकास के लिए वातावरण तैयार करता है। देश में सामान्य आर्थिक शक्तियों का केंद्रीयकरण सामान्यतया कुछ गिने-चुने हाथों में होता है । इसके कारण कई क्षेत्रों में एकाधिकार की स्थिति बनी रहती है। परंतु आजकल उद्यमिता, उद्यमियों को बड़े स्तर के व्यापारों में भी प्रवेश करने के लिए प्रेरित करती है इससे देश में उद्यमों की संख्या में काफी वृद्धि हो जाती है। बढ़ती हुई औद्योगिक इकाइयों से आर्थिक शक्तियों का विकेंद्रीयकरण भी होता है।
6. बेहतर जीवन स्तर उद्यमिता किसी उद्यमी की सफलता प्राप्त करने के लिए विशिष्ट रूप से कार्य करने की इच्छा है। उद्यमी आर्थिक विकास की दर में तेजी लाने में प्रमुख भूमिका निभाता है। वह वस्तुओं को कम कीमत पर तथा गुणवत्ता बनाए रखते हुए तैयार करता है तथा बाजार में इनकी पूर्ति करता है। इस प्रकार वह लोगों को कम कीमत पर अच्छे उत्पाद उपलब्ध करवा कर उनके जीवन स्तर को समृद्ध करने में भी योगदान देता है।
7. उच्च उत्पादकता उत्पादकता एक विशेष योग्यता है जिसके द्वारा उत्पादन के संसाधनों का कुशलतम प्रयोग करते हुए उत्पादन को उच्च स्तर पर ले जाया जाता है। उद्यमिता, उद्यमी का वह गुण है जो उसे संसाधनों का प्रभावी तथा कुशलतम प्रयोग करने में मदद करता है।
उच्च उत्पादकता मुख्य रूप से उत्पादन की तकनीक में प्रभावशाली ढंग से परिवर्तन करना होता है, यह कार्य एक उद्यमी शानदान ढंग से करने का प्रयत्न करता है।
इस प्रकार उद्यमिता का हमारे देश के आर्थिक विकास में वृद्धि करने में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है । इसके द्वारा देश के आर्थिक विकास की दर में वृद्धि, बेरोजगारी, गरीबी, असंतुलित क्षेत्रीय विकास, संसाधनों का अनुचित प्रयोग, आर्थिक शक्तियों का केंद्रीयकरण, कम उत्पादकता दर आदि प्रमुख समस्याओं से निपटा जा सकता है। इस कार्य में उद्यमियों की भूमिका भी सराहनीय होती है। उद्यमियों द्वारा इन चुनौतीपूर्ण समस्याओं के मध्य भी व्यावसायिक इकाइयों की स्थापना की जाती है।
अतः विकासशील तथा विकसित देशों में उद्यमिता के कारण उद्यमी एक सकारात्मक व्यावसायिक वातावरण तैयार करते हैं जिससे आर्थिक विकास की दर में वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, उत्पादकता में वृद्धि जैसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं।
यहाँ इस बात का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है कि उद्यमिता की आर्थिक विकास में भूमिका बहुत सारे तत्त्वों पर निर्भर करता है। इसमें से मुख्य घटक उपलब्ध संसाधन, औद्योगिक, सामाजिक तथा राजनीतिक वातावरण होते हैं। यह घटक सभी स्थानों पर अलग-अलग ढंग से उद्यमिता को प्रभावित करते हैं इस संदर्भ में देश की सरकार को एक मुख्य भूमिका निभानी होती है। सरकार को स्वयं भी इकाइयाँ स्थापित करनी होती है जो सार्वजनिक इकाइयाँ कहलाती है। सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न संस्थाओं की स्थापना की गई हैं जो देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न उद्यमिता विकास के कार्यक्रम भी इस बात को स्पष्ट करते हैं कि देश में उद्यमिता की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, जिसका संबंध आर्थिक, सामाजिक एवं औद्योगिक विकास से है।
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