उद्यमिता एक प्रक्रिया - entrepreneurship is a process

उद्यमिता एक प्रक्रिया - entrepreneurship is a process


उद्यमिता एक विशेष प्रक्रिया होती है। इसके विभिन्न चरण इस प्रकार से हैं:


1. पहला चरण आर्थिक और सामाजिक वातावरण में परिवर्तन से लोगों की जीवन शैली में भी परिवर्तन आता है। यह परिवर्तन नए उत्पादों के लिए रास्ता खोलता है या वातावरण तैयार करता है । इसी कारण से नये उत्पाद तैयार करने का विचार जन्म लेता है।


2. दूसरा चरण - नये उत्पाद का विचार ग्राहकों अथवा प्रतिस्पर्धियों के माध्यम से भी आ सकता है। नया तथा अच्छा विचार प्रेरणा, पहल एवं अन्वेषण के कारण भी आता है।

इस तरह से विभिन्न विचारों की छँटनी की जाती है तथा उनमें सबसे सही विचार को वास्तविकता में लाने के लिए कार्य किया जाता है। 


3. तीसरा चरण विभिन्न विकल्पों में सर्वोत्तम विकल्प चुन लिए जाने के पश्चात अन्तिम चुने हुए विकल्प के आधार पर उत्पाद तैयार किया जाता है। इस चरण में उद्यमी व्यवसाय की स्थापना करता है।


 4. चौथा चरण परियोजना अथवा व्यवसाय शुरू हो जाने के पश्चात उद्यमी को व्यवसाय चलाते रहने के लिए कार्य करना होता है। इसके लिए वह विभिन्न संसाधनों को इकट्ठा करता है। आंतरिक


संसाधन इकट्ठे किए जाने की प्रक्रिया को उद्यमिता कहा जाता है।


5. पाँचवा चरण उद्यम की सफलता साधनों एवं प्रयासों के सफल संयोजन पर निर्भर करती है। उद्यमी को संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए संस्था की विभिन्न गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना होता है। यह उद्यमिता का अन्तिम चरण होता है।


अंत में यह कहा जा सकता है कि एक व्यक्ति उद्यमी विभिन्न तरीकों से बन सकता है; जैसे वह एक स्थापित व्यवसाय को खरीद सकता है, नया व्यवसाय शुरू कर सकता है, फ्रेंचाइजी ले सकता है आदि । इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका उद्यमिता के कार्य के लिए उत्पन्न हुई प्रेरणा की होती है जो उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करती है।