नए व्यवसाय को प्रभावित करने वाले वातावरण संबंधी तत्व - environmental factors affecting new business
नए व्यवसाय को प्रभावित करने वाले वातावरण संबंधी तत्व - environmental factors affecting new business
वातावरण तथा व्यावसायिक वातावरण
ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार वातावरण का अर्थ आस-पास की वस्तुओं, क्षेत्र तथा परिस्थितियों से है। वातावरण तथा व्यवसाय का प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार से संबंध होता है। व्यवसाय के लिए आंतरिक एवं बाहरी दोनों तरह का वातावरण होता है। व्यवसायी जिन आंतरिक एवं बाह्य परिस्थितियों से अपना व्यवसाय चलाता है उसे व्यावसायिक वातावरण कहा जाता है। इसमें नियंत्रित हो सकने या न हो सकने वाले तत्व शामिल होते हैं तथा वे मूर्त में विद्यमान होते हैं। व्यावसायिक वातावरण की कई शर्तें होती हैं जो व्यवसाय के लिए अनुकूल या प्रतिकूल हो सकती हैं। उद्यमी को इस प्रकार के वातावरण में रहते हुए व्यवसाय करना होता है। उद्यमी तथा उद्यमिता का जन्म अचानक नहीं होता है, अपितु इनकी उत्पत्ति तथा विकास पर सामाजिक, राजनैतिक,
आर्थिक, मनोवैज्ञानिक आदि बहुत सारे तत्वों का प्रभाव पड़ता है। ये सभी सत्व व्यवसाय की सफलता पर भी प्रभाव डालते हैं। ये सभी वातावरण संबंधी तत्व उद्यमी के व्यवसाय की सफलता पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों ही तरह का प्रभाव डालते हैं। आतंरिक वातावरण में वे सभी अंदरुनी तत्व होते हैं जिन पर उद्यमी का नियंत्रण होता है तथा बाहरी वातावरण में वे सभी तत्व होते हैं जिन पर उद्यमी का नियंत्रण नहीं होता है। व्यवसाय की सफलता बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करती है कि उद्यमी व्यावसायिक वातावरण में स्वयं को कैसे नए व्यवसाय को प्रभावित करने वाले वातावरण संबंधी तत्त्व समायोजित करता है, तथा इसमें होने वाले परिवर्तनों को व्यवसाय में कितने प्रभावी ढंग से लागू करता है । अत: इसे विस्तृत रूप से समझने से पहले व्यावसायिक वातावरण के अर्थ को समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसकी कुछ परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं :
1. आर्थर एम. वीमर के अनुसार, "व्यावसायिक वातावरण में सभी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक या संस्थागत दशाओं को शामिल किया जाता है जिनके अंतर्गत व्यावसायिक कार्यकलापों का संचालन किया जाता है।"
2. बेयर्ड ओ. व्हीलर के अनुसर, “व्यावसायिक वातावरण, व्यावसायिक फर्मों एवं उद्योगों के बाहर के इन सभी तत्वों का योग है जो उसके संगठन एवं संचालन को प्रभावित करते हैं। " नये व्यवसाय की सफलता पर प्रभाव डालने वाले वातावरण संबंधी घटक/तत्व व्यवसाय की सफलता को प्रभावित करने वाले वातावरण संबंधी तत्वों को दो हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है – आतंरिक तथा बाहरी तत्व । इन तत्वों का वर्णन इस प्रकार से है:
1. आंतरिक वातावरण संबंधी तत्व आंतरिक वातावरण में उन सभी तत्वों को शामिल किया जाता है जो उद्यम / संगठन के अंदर ही विद्यमान होते हैं तथा उद्यम की सफलता को प्रभावित करते हैं । आतंरिक वातावरण में 5 M को शामिल किया जाता है जिनका अर्थ है मनुष्य, सामग्री, धन, मशीनरी तथा प्रबंध । आतंरिक वातावरण के ये तत्व आमतौर पर संस्था के नियंत्रण में होते हैं। इसमें मानवीय संसाधन एक महत्वपूर्ण घटक है
जो व्यवसासय की सफलता या असफलता के लिए उत्तरदायी होता है। यदि किसी संस्था के कर्मचारी योग्य, कुशल एवं कार्य पद्धति के प्रति समर्पित हैं तो वे व्यवसाय को सफलता की नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं। यदि व्यवसाय के कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं तो उनका मनोबल कम होता है तथा उससे उद्यम के निष्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी प्रकार यदि संस्था के उच्च स्तरीय अधिकारी योग्य, कुशल, अनुभवी एवं दूरदर्शी हैं तो वे वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को समझ सकते हैं तथा उनके अनुसार व्यवसाय में बदलाव करके व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला सकते हैं। नये व्यवसाय या स्थापित व्यवसाय की विपणन क्रियाएँ, अनुसंधानव विकास क्रियाओं पर यदि उचित ध्यान दिया जाता है तो व्यवसाय प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकता है तथा व्यवसाय की प्रगति को बनाए रखा जाना संभव होता है। इसी प्रकार यदि संस्था के भौतिक एवं वित्तीय साधन पर्याप्त हैं, तो वे भी नये व्यवसाय की सफलता को प्रभावित करते हैं। अत: आंतरिक वातावरण का व्यवसाय की सफलता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक उद्यमी को इस महत्व को समझते हुए आवश्यकतानुसार योजनाएँ एवं रणनीतियाँ तैयार करनी चाहिए जिससे कि वह एक सफल व्यवसायी के रूप में स्थापित हो सके।
2. बाहरी वातावरण संबंधी तत्व
बाहरी वातावरण से अर्थ उन सभी तत्वों से हैं जो व्यवसाय के बाहर तथा उसके पास-पास विद्यमान होते हैं तथा उनका प्रभाव व्यवसाय की सफलता पर पड़ता है। आमतौर पर सभी बाहरी तत्व उद्यमी के नियंत्रण से बाहर ही होते हैं। व्यवसाय की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उद्यमी बाहरी वातावरण के बारे में कितना जागृत है तथा वह आस-पास होने वाले परिवर्तनों के अनुसार व्यवसाय को कैसे समायोजित करता है विलियम ग्लूक एवं जॉक ने बाहर वातावरण को इस प्रकार पारिभाषित किया है, वातावरण में फर्म के बाहर के घटक शामिल किये जाते हैं, जो फर्म के लिए लगातार अवसर तथा खतरे उत्पन्न करते हैं। इनमें सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक दशाएँ प्रमुख हैं।"
बाहरी वातावरण दो प्रकार का होता है :
1. व्यष्टि / कार्यात्मक वातावरण
2. समष्टि / सामान्य वातावरण
1. व्यष्टि बाहरी वातावरण के तत्व
व्यष्टि वातावरण को कार्यात्मक, प्रतिस्पर्धात्मक या कार्य वातावरण भी कहा जाता है। ये सभी तत्व उद्यमी द्वारा प्रभावित या नियंत्रित किए जा सकते हैं। इसमें उद्यम के वे सभी तत्व सम्मिलित होते हैं जो उसके तत्काल निर्माण नियंत्रण में होते हैं तथा व्यवसाय पर प्रभाव भी डालते हैं। इनमें पूर्तिकर्ता, ग्राहक, मध्यस्थ, प्रतियोगी तथा जनता आदि को शामिल किया जाता है।
1. पूर्तिकता प्रत्येक उद्यमीको पूर्तिकर्ताओं की आवश्यकता होती है जो उसे उद्यम के लिए कच्चा माल तथा अन्य सामग्री उपलब्ध करवाते हैं। यदि पूर्तिकर्ताओंके साथ व्यवसायी के मधुर संबंध होते हैं
तो इससे व्यवसाय बिना किसी बाधा के अपना कार्य कर सकता है। यदि उद्यमी के संबंध पूर्तिकर्ताओं से अच्छे नहीं होते हैं तो इससे पूर्तिकर्ताओं से सामग्री समय पर नहीं मिल पाती तथा उत्पादन प्रक्रिया पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अतः व्यवसाय की सफलता के लिए उद्यमी को पूर्तिकर्ताओं के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए ।
2. ग्राहक - व्यवसाय की सफलता के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि उद्यमी ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करें। व्यवसाय की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि व्यवसायी अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं, रुचियों, प्राथमिकताओं, अपेक्षाओं को समझें तथा उनके अनुसार ग्राहकों की संतुष्टि बढ़ाने का प्रयास करें। प्रतिस्पर्धा में वृद्धि हो जाने के कारण ग्राहकों को आकर्षित एवं संतुष्ट करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता जा रहा है।
इसके लिए अब व्यवसायी ग्राहकों पर शोध कार्य करते हैं। उसके पश्चात ग्राहकों की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं के अनुसार उत्पाद में परिवर्तन किए जाते हैं। उसके अतिरिक्त वैश्वीकरण के बढ़ने से भी उपभोक्ता संतुष्टि का कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके कारण नई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बाजारमें शामिल हो रही हैं तथा उन्हें विभिन्नि सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं जिससे बाजार में आयातित उत्पाद सस्ते भी उपलब्ध हो रहे हैं। इसी कारण से उपभोक्ताओं को और अधिक उत्पाद चुनने के अवसर मिलते जा रहे हैं। उद्यमी को इस बात को भी ध्यान में रखकर उत्पाद के किस्म, गुण तथा उसकी कीमत पर भी ध्यान देना चाहिए।
3. बाजार मध्यस्थ - पूर्तिकर्ताओं की तरह बाजार मध्यस्थ भी व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं । ये उद्यम को उनके उत्पादों के प्रोत्साहन बेचने तथा वितरण के कार्यों को पूरा करके, अंतिम उत्पाद को उपभोक्ताओं तक पहुँचाते हैं। ये कंपनी, फर्म या एजेंसी के रूप में हो सकते हैं इनमें निम्नलिखित शामिल होते हैं:
पुनर्विक्रेता इनमें थोक व्यापारी, फुटकर व्यापारी आदि शामिल होते हैं जो -- उद्यमियों/व्यवसायियों से वस्तुएँ खरीद कर उन्हें बाजार में ग्राहकों को बेचने का कार्य करते हैं।
• भौतिक मध्यस्थ- इसके अंतर्गत भण्डारगृहों, शीत भण्डारों तथा यातायात एजेन्सियों को शामिल किया जाता है। यह सभी व्यवसाय के उत्पादों का भण्डारण करने में सहायता करते हैं, जब तक किए उत्पाद अंतिम उपभोक्ता तक नहीं पहुँच जाते
• विपणन एजेन्सियाँ इनमें विज्ञापन एजेन्सियाँ, सलाहकार फर्मों, विपणन अनुसंधान फर्में आदि शामिल होते हैं। ये उद्यमी को उसके उत्पादके लिए सही बाजार तलाश करने तथा उसके उत्पादों को वहाँ बेचने में सहायता करते हैं।
• वित्तीय मध्यस्थ इनमें बैंक, बीमा कंपनियाँ, मुद्रा बाजार तथा अन्य वित्तीय सहायता उपलब्ध करवानेवाली संस्थाओं को शामिल किया जाता है।
यह व्यवसाय को सुगमता एवं स्थिरता से चलाने में सहायता करती है तथा जोखिमों का सामाना करने में भी मदद देती हैं।
उपरोक्त सभी (मध्यस्थ) मिलकर व्यवसाय की सफलता पर गहरा प्रभाव डालते हैं अतः प्रत्येक उद्यमी को चाहिए कि व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने के लिए वह इन सभी मध्यस्थों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखें।
4. प्रतियोगी प्रतियोगी इकाइयाँ ऐसी इकाइयाँ होती हैं जो बाजार में एक जैसे उत्पाद या प्रतिस्थापन उत्पादों का विपणन कर रही होती हैं। अतः इससे निपटने के लिए प्रभावशाली विपणन नीतियाँ तैयार करने की आवश्यकता होती है। सभी कंपनियों के लिए एक जैसी रणनीति संभव नहीं होती। प्रत्येक उद्यमी को संबंधित उद्योग में अपने व्यापार के आकार व बाजार की प्रतियोगी इकाइयों के आकार व बाजार के साथ तुलना करनी चाहिए। बड़े आकार की रणनीतियाँ अलग तथा प्रभावी होती हैं जो छोटे व्यवसायों द्वारा तैयार की जानी संभव नहीं होती।
अतः छोटे व्यवसायों को अपनी वित्तीय सीमाओं को ध्यान में रखते हुए रणनीतियाँ तैयार करनी चाहिए जो उसे बेहतर परिणाम दें। प्रत्येक उद्यमी को प्रतियोगिता के महत्व को समझना चाहिए तथा उनके अनुसार ही रणनीतियाँ, प्रति-रणनीतियाँ तैयार करनी चाहिए । यदि वह इस कार्य को सफलतापूर्वक कर सकता है तो व्यवसाय की सफलता भी सुनिश्चित हो जाती है अन्यथा उसकी सफलता का रास्ता चुनौतियों से भरा ही रहता है।
5. जनता जनसमूह एक ऐसे समूह को कहा जाता है, जिसका व्यवसाय में वास्तविक या संभावित हित होता है। व्यापक रूप से इसमें निम्न को शामिल किया जाता है :
• वित्तीय जनसमूह इसमें बैंकों, निदेशकों, अंशधारियों आदि को शामिल किया जाता है। ये कंपनी की वित्तीय साधन इकठ्ठा करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
• मीडिया जनसमूह इसमें समाचार-पत्रों, मैगजीन, रेडियो तथा टेलीविजन आदि को शामिल किया जाता है। इससे कंपनी की जनता में छवि प्रभावित होती है क्योंकि इसमें कंपनी के उत्पाद, विज्ञापन, योजनाओं आदि की जानकारी जनता तक पहुँचती है।
• सरकारी जनसमूह इसमें विभिन्न सरकारी विभाग, एजेन्सियाँ आदि शामिल होती हैं। सरकारी नियमों के पूर्ण रूप से पालन के लिए उद्यमी को अपने कानूनी सलाहकारों की मदद लेनी चाहिए उत्पाद की सुरक्षा, विज्ञापन संबंधी नियम सबका ध्यान रखा जाना चाहिए।
• आंतरिक जनसमूह इसमें प्रबंधक, कर्मचारियों तथा अन्य लोगों को शामिल किया जाता है ।
उद्यमी को अपने इस जनसमूह को संतुष्ट करने के लिए सभी तरह के प्रयास करने चाहिए। इस जनसमूह की संतुष्टि से व्यवसाय को बहुत सारे लाभ प्राप्त हो सकते हैं ।
• स्थानीय जनसमूह स्थानीय जनता में व्यावसायिक इकाई के आस-पास रह रहे लोगों को शामिल किया जाता है। बड़े स्तर की इकाइयाँ इन लोगों से अच्छे संबंध स्थापित करने के लिए जनसंपर्क अधिकारी की भी नियुक्ति करती हैं। स्थानीय जनता द्वारा उठाए जाने वाले विभिन्न मुद्दों पर यह उन्हें संतुष्टि की सीमा तक शांत करता है। कई बार प्रदूषण जैसे विषयों को लेकर स्थानीय जनता का दबाव भी झेलना पड़ता है, ऐसी परिस्थितियों को सावधानी से निपटाना चाहिए, जिससे व्यवसाय की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अतः यह स्पष्ट है कि ये सभी तत्व व्यवसाय की सफलता को प्रभावित करते हैं। उद्यमी को प्रत्येक प्रकार के जनसमूह की आशाओं के अनुरूप कार्य करने या व्यवसाय चलाने का प्रयास करना चाहिए।
वार्तालाप में शामिल हों