व्यावसायिक सम्प्रेषण के आवश्यक तत्व - essential elements of business communication
व्यावसायिक सम्प्रेषण के आवश्यक तत्व - essential elements of business communication
सम्प्रेषण के परम्परागत स्वरूप में पांच तत्व (1) सन्देशवाहक, वक्ता अथवा लेखक, (2) विचार जो सन्देश आदेश या अन्य रूप में हैं, (3) संवाहन कहने, लिखने अथवा जारी करने के रूप में, (4) सन्दश प्राप्त करने वाला, (5) सन्देश प्राप्तकर्ता की प्रतिपुष्टि या प्रतिक्रिया आदि तत्व होते हैं। लेकिन सम्प्रेषण के आधुनिक स्वरूप का विश्लेषण किया जाए तो सम्प्रेषण के निम्नलिखित तत्व प्रकाश में आते हैं:
1. सम्प्रेषण एक सतत प्रक्रिया- व्यावसायिक सम्प्रेषण निरन्तर (सतत्) चलने वाली प्रक्रिया है। क्योंकि ग्राहकों, कर्मचारियों, सरकार आदि बाह्य एवं आन्तरिक पक्षों के मध्य सन्देशों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया व्यवसाय में निरन्तर बनी रहती है। सम्प्रेषण में सूचना आदेश, निर्देश, सुझाव, सलाह, क्रियान्वयन, शिक्षा, चेतावनी, अभिप्रेरणा, ऊँचा मनोबल उठाने वाले संदेशों का आदान प्रदान निर्बाध रूप से सतत प्रक्रिया में चलता रहता है।
2. सम्प्रेषण अर्थ सम्प्रेषित करने का माध्यम-सम्प्रेषण का आशय सूचनाओं एवं सन्देशों को एक व्यक्ति (समूह) से दूसरे व्यक्ति (समूह) को भेजना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इसके लिए यह भी आवश्यक है
कि सूचना अथवा सन्देश प्राप्तकर्ता उसे उसी भाव (अर्थ) में समझे जिस भाव से उसे सूचना दी गई है। इसलिए सम्प्रेषण प्रक्रिया में सूचना प्रेषण करने वाले को कूटलेखक (Encoder) तथा सूचना प्राप्त करने वाले को कूटवाचक (Decoder) कहा जाता है।
3. सम्प्रेषण द्विमार्गी प्रक्रिया सम्प्रेषण दो तरफा प्रक्रिया है। सम्प्रेषण में दो व्यक्तियों अथवा समूहों के मध्य सन्देश का आदान प्रदान होता है। सम्प्रेषण प्रक्रिया में सन्देश प्राप्तकर्ता सन्देश भेजने वाले के सही अर्थ / भाव को समझता है एवं अपनी प्रतिपुष्टि अथवा प्रतिक्रिया (Feedback) सन्देश प्रेषक को प्रदान करता है। इस तरह सम्प्रेषण मूलतः द्विमार्गी प्रक्रिया है।
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