परियोजना संचालन संबंधी लागतों का अनुमान - Estimating Project Operational Costs
परियोजना संचालन संबंधी लागतों का अनुमान - Estimating Project Operational Costs
संचालन लागतों में वे सभी व्यय आते हैं जो व्यवसाय को चलाने के लिए किए जो हैं। प्रारम्भिक स्तर पर, संचालन लागतों का अनुमान लगानेके लिए दिशा-निर्देशों का निर्धारण करना पड़ता है। इसके लिए विस्तृत अध्ययन किया जाता है क्योंकि इनमें खर्चों की संख्या बहुत अधिक होती है। संचालन लागत संबंधी व्ययों का अनुमान इसलिए लगाया जाता है ताकि अनावश्यक व्ययों से बचा जा सके। इस प्रकार के व्ययों में निम्न व्यय सम्मिलित होते हैं:
1. माल संबंधी लागत: माल संबंधी लागत कुल लागत का महत्त्वपूर्ण भाग होता है। माल के अंतर्गत कच्चे माल की लागत, रासायनिक पदार्थ, पुर्जे तथा उत्पादन के लिए आवश्यक उपयोग सामग्री को सम्मिलित किया जाता है। माल संबंधी लागत का अनुमान लगाते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए:
(क) उत्पादन की प्रति इकाई के अनुसार विभिन्न प्रकार के माल की आवश्यकता।
(ख) विभिन्न प्रकारके माल निवेशों की कुल आवश्यकता ('उत्पादन की प्रति इकाई के अनुसार
विभिन्न प्रकारके माल की आवश्यकता' को अनुमानित उत्पादन' से गुणा करके)।
(ग) लागत, बीमा तथा भाड़े की शर्तों के आधार पर माल निवेशों का मूल्य ।
(घ) विभिनन माल निवेशों की वर्तमान लागत, इसमें मुद्रा-स्फीति के तत्त्व को शामिल नहीं किया जाता।
(ड.) मूल्यों में नियमित रूप से होने वाले मौसमी परिवर्तन।
2. श्रम लागत : श्रमलागत से अभिप्राय परियोजना में नियुक्त कर्मचारियों की लागत से है। श्रम में
श्रमिकों की संख्या तथा उनकी पारिश्रमिक दर को सम्मिलित किया जाता है। श्रमिकों की संख्या विभिन्न मशीनों को चलाने के लिए ऑपरेटर या सहायकों की आवश्यकता पर निर्भर करती है। सेवाएँ प्रदान करने के लिए भी श्रमिकों की आवश्यकता होती है। पर्यवेक्षकों तथा प्रशासनिक कर्मचारियों की संख्या का अनुमान संबंधित उद्योग में चल रही प्रवृत्ति के आधार पर लगाया जा सकता है।
पारिश्रमिक दरों का अनुमान लगातेसमय संबंधित उद्योगमें चल रही दरोंको ध्यान में रखना चाहिए।
श्रम लागत की गणना उस वर्ष की करनी चाहिए जिस वर्ष में अधिकतम क्षमता का उपयोग किया गया हो प्रारम्भिक वर्षों के लिए जिनमें पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया गया हो, श्रम लारत को कम दरों पर निर्धारित किया जाता है।
3. उपयोगिताओं की लागत: उपयोगिताओं में ऊर्जा, ईंधन तथा पानी को सम्मिलित किया जाता है। इन उपयोगिताओं का अनुमान सलाहकारों, तकनीकी विशेषज्ञों या उद्योग में उपभोग मानकों के आधार पर लगाया जा सकता है। उर्जा की लागत में उसके खरीदने की लागत सम्मिलित होती है जो बिजली बोर्ड की दरों पर निर्भर करती है। ईंधन (कोयला, जलाने वाली लकड़ी आदि) एक महत्त्वपूर्ण घटक होता है तथा इसका अनुमान लगाना कठिन कार्य होता है। पानी की लागतमें स्थानीय प्रशासनको या अन्य को किए गए भूगतान शामिल होते हैं।
4. उपरिव्ययः उपरिव्यय में मरम्मत तथा रख-रखाव के व्यय, किराया, बीमा लागत, ह्रास आदि को सम्मिलित किया जाता है। मरम्मत तथा रख-रखाव के खर्चे मशीन की दशा पर निर्भर करते हैं। अर्थात् प्रारंभिक वर्षों में कम तथा बाद के वर्षों में अधिका किराया, कर तथा बीमा व्यय वर्तमान दरों के आधार पर अनुमानित किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त आकस्मिकता के लिए भी प्रावधान किया जाता है।
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