सम्प्रेषण की विशेषताएं - Features of communication

सम्प्रेषण की विशेषताएं - Features of communication


सम्प्रेषण की विशेषतायें निम्न प्रकार से समझी जा सकती है:


(i) जानकारी का आदान-प्रदान: मानव सम्प्रेषण की मूल विशेषता यह है कि इसका उद्देश्य सूचना का आदान-प्रदान करना है। यह दो तरह की प्रक्रिया है। सूचना का आदान-प्रदान दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच हो सकता है। यह व्यक्ति या संगठनात्मक स्तर पर हो सकता है।


(ii) निरंतर प्रक्रिया: सम्प्रेषण एक सतत प्रक्रिया है। यह स्थिर नहीं है। यह लगातार परिवर्तन के अधीन हैं और गतिशील है। जिन लोगों के साथ सम्प्रेषण आयोजित किया जाता है, उनकी सामग्री और प्रकृति, और जिस स्थिति में सम्प्रेषण होता है सभी बदलते रहते हैं।


(iii) आपसी समझ: सम्प्रेषण का मुख्य उद्देश्य आपसी समझ लाना है। प्राप्तकर्ता, संदेश को प्राप्त कर उस इरादे को समझना होगा जिस इरादे से प्रेषक ने सन्देश भेजा था।


(iv) प्रतिक्रिया: सम्प्रेषण हमेशा कुछ प्रतिक्रिया की ओर जाता है। एक संदेश केवल तभी सम्प्रेषण होता


है जब प्राप्तकर्ता पार्टी इसे समझती है और उसे स्वीकार करती है, और प्रतिक्रिया या जवाब देती है। (v) सार्वभौमिक कार्य (Universal work): सम्प्रेषण एक सार्वभौमिक कार्य है, जो प्राधिकरण के सभी स्तरों को शामिल करता है।


(vi) सामाजिक गतिविधि: सम्प्रेषण एक सामाजिक गतिविधि है। यह समाज के घटक साझा करने के संबंध में हैं, चाहे वह फिर जानकारी, विचार या भावनाएं ही क्यों न हो। व्यापार सम्प्रेषण के लिए भी यही सच है। इसमें लोगों के एक दूसरे के संपर्क में आने और उन्हें समझने के प्रयास शामिल हैं। जिस प्रक्रिया से लोग अर्थ साझा करने और एक दूसरे से संबंधित होने का प्रयास करते हैं, सम्प्रेषण एक सामाजि गतिविधि भी मानी जा सकती है।