सांकेतिक सन्देशवाहन - Gestural Communication or Non-Verbal Communication

सांकेतिक सन्देशवाहन - Gestural Communication or Non-Verbal Communication


सांकेतिक या शब्द रहित (Non-Verbal) सन्देशवाहन में भावनाओं अथवा सूचनाओं का आदान-प्रदान मात्र संकेतों द्वारा किया जाता है। इस सन्देशवाहन में न बोलना पड़ता है और न ही लिखना, सन्देशों को शरीर की हलचल, चेहरे के भाव, इशारों आदि द्वारा दूसरे लोगों को समझाया जाता है। उदाहरण के लिए किसी बात पर गर्दन हिलाकर हाँ या ना में जवाब देना। चेहरे के हाव-भाव से एक कुशल प्रबन्धक प्रतिपुष्टि का शीघ्र पता लगता लेता है। इस सन्देशवाहन का लगातार प्रयोग करने से व्यक्ति इसको आसानी से समझने लगते हैं और सूचनाओं को अति शीघ्र प्रेषित किया जा सकता है।


सांकेतिक सन्देशवाहन के लाभ (Advantages of Non-Verbal Communication)


सांकेतिक सन्देशवाहन के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं


1. सूचनाओं का शीघ्रता से प्रेषण |


2. कम खर्चीली पद्धति।


3. शीघ्र प्रप्ति पुष्टि


4. समय की बचता


5. कार्यक्षमता में वृद्धि


सांकेतिक सन्देशवाहन की सीमाएं (Limitations of Non-Verbal Communication)


सांकेतिक सन्देशवाहन की सीमाएं अथवा दोष निम्नलिखित हैं


1. गोपनीयता की कमी।


2. बहुत कम सूचनाओं के लिए उपयुक्ता


3. इशारों का विपरीत अर्थ समझा जा सकता है।


4. दोनों पक्षकारों का आमने-सामने होना आवश्यक


5. लिखित प्रमाण का अभावा


6. केवल बहुत छोटे सन्देशों के लिए उपयुक्त


सांकेतिक सन्देशवाहन के प्रारूप (Forms of Non-Verbal Communication)


सांकेतिक सन्देशवाहन के निम्नलिखित प्रारूप हो सकते हैं


1. टेलिविजन पर मूक समाचार


2. हाथ हिलाकर अभिवादन करना।


3. खेलों में निर्णायक के इशारे।


सांकेतिक सन्देशवाहन की उपयोगिता (Utility of Non-Verbal Communication)


सांकेतिक सन्देशवाहन निम्नलिखित परिस्थितियों में उपयोगी हैं।


1. जब सन्देश बिल्कुल छोटा या संक्षिप्त हो ।


2. यह सन्देशवाहन खेलों में बहुत उपयोगी है, जैसे क्रिकेट में खिलाड़ी के आउट होने के निर्णय के लिए। निर्णायक के मात्र उंगली ऊपर करते ही खिलाड़ी व दर्शक समझ जाते हैं कि वह आउट हो गया है।


3. जो सुन नहीं सकते, केवल देख सकते हैं,

उनके लिए भी यह सन्देशभवाहन उपयोगी है। निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि सन्देशवाहन के प्रत्येक माध्यम के अपने लाभ तथा सीमाएं हैं, प्रत्येक माध्यम कुछ विशेष परिस्थितियों में ही उपयोगि हो सकता है। सन्देशवाहन के माध्यम का चुनाव सन्देश भेजने वाले व प्राप्तकर्ता की योग्यता, सूचनाओं की प्रकृति तथा वे परिस्थितियाँ जिनमें कोई निर्णय लिया जाना है को ध्यान में रखकर करना चाहिए।


सन्देशवाहन के प्रकार (Types of Communication)


एक व्यावसायिक संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को सन्देशवाहन के द्वारा जोड़ने के अनेक मार्ग और माध्यम होते हैं। इन सभी श्रृंखलाओं के जोड़ को सन्देशवाहन का जाल या ताना-बाना कहते हैं।

सन्देशवाहन के जाल में मुख्यत दो प्रकार के सन्देशवाहन को शमिल किया जाता है, औपचारिक एवं अनौपचारिक सन्देशवाहना दोनों ही, संगठन के लिए उपयोगी होते हैं। इन श्रृंखलाओं को सन्देशवाहन के प्रकार भी कहा जाता है, जो निम्नलिखित हैं


सन्देशवाहन की श्रंखलाएं


(Channel of Communication)


औपचारिक सन्देश वाहन


(Formal Communication)


(Downward Communication) 2. ऊपर की तरफ सन्देशवाहन


1. नीचे की तरफ सन्देशवाहन (Upward Communicatin) 3. समतल सन्देशवाहन (Horizontal Communication)


अनौपचारिक सन्देशवाहन (Informal Communication)


1. मुक्त प्रवाही सन्देशवाहन (Free Flow Communication)


2. घूमता हुआ सन्देशवाहन


(Circular Communication) 3. अं खलावद्ध सन्देशवाहन


(Chain Communication)


4. केन्द्रित सन्देशवाहन (Wheel Communication)


औपचारिक सन्देशवाहन- विचारों का ऐसा आदान-प्रदान एक पूर्व निश्चित रास्ते से होकर गुजरता है,

जिससे सूचनाएँ बिना किसी रुकावट के कम लागत पर और सही समय व सही स्थान पर पहुंच जाती हैं। इसको "Bandwagon Bank" भी कहा जाता है।


विशेषताएँ (Characteristics)- औपचारिक सन्देशवाहन की महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।


1. मौखिक व लिखित- यह लिखित व मौखिक दोनों प्रकार का हो सकता है।


2. औपचारिक सम्बंध यह सन्देशवाहन उन कर्मचारियों के बीच होता है जिनके मध्य संगठन द्वारा औपचारिक सम्बंध स्थापित किए गए हैं।


4. इस सन्देशवाहन के लिए निश्चित मार्ग निर्धारित होता है। जैसे:- श्रमिक फोरमन- प्रबन्धक


5. सूचनाएँ- इस सन्देशवाहन में केवल संगठन की अधिकृत सूचनाएँ ही दी जाती हैं।

6. निर्माण इस श्रृंखला सन्देशवाहन का संगठन की आवश्यकतानुसार निर्माण किया जाता है।


लाभ (Advantages)- औपचारिक सन्देशवाहन के बहुत से लाभ हैं जिनमें से महत्त्वपूर्ण निम्नलिखित हैं.


1. पद की गरिमा बनाए रखना औपचारिक सन्देशवाहन में अधिकारियों व अधीनस्थों का लगातार संबन्ध बना रहने के कारण, लाइन अधिकारियों के पद की गरिमा बनी रहती है। फलस्वरूप नियंत्रण करने व उत्तरदादित्व निर्धारण करने में सुविधा बनी रहती है।


2. स्पष्ट एवं प्रभावपूर्ण औपचारिक सन्देशवाहन में प्रबन्धकों व अधीनस्थों के मध्य की सीधा सम्पर्क होता है एक-दूसरे की योग्यता, भावनाओं आदि को समझते है अतः यह सन्देशवाहन प्रभावपूर्ण व स्पष्ट होता है।


सीमाएँ (Limitations) - औपचारिक सन्देशवाहन की सीमाएँ अथवा दोष निम्नलिखित हैं


1. कार्य का अधिक बोझ औपचारिक सन्देशवाहन को एक पूर्व निश्चित मार्ग से भेजा जाता है


जिससे अधिकारियों का अधिक समय इसी कार्य में व्यस्त हो जाता है।


2. सूचनाओं का स्वरूप बदलना कई बार प्रेषक व प्राप्तकर्ता के बीच रास्ता इतना लम्बा होता है कि सूचना को अनेक लोगों के हाथों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे पहुंचते पहुंचते सूचना का स्वरूप ही बदल जाता है।


3. लापरवाही अधिकाकरी कई बार लापरवाह हो जाते हैं और अपने अधिनस्थों द्वारा की गई शिकायत या सुझाव की तरफ विशेष ध्यान नहीं देते और अधिकारी अपनी तरफ से उसमें कुछ न कुछ जोड़ देते हैं संचालकों तक सही बात नहीं पहुं चपाती।


औपचारिक सन्देशवाहन के प्रकार (Types of Formal Communication) औपचारिक


सन्देशवाहन निम्न तीन प्रकार का होता है


प्रबन्धक


प्रबन्धक


फोरमन


फोरमैन


श्रमिक


श्रमिक



ऊपर की ओर सन्देशवाहन (Upward Communication)


(Horizontal Communication)


1. नीचे की ओर सन्देशवाहन ऐसा सन्देशवाहन जो उच्च अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थों को करना है, नीचे की ओर सन्देशवाहन कहलाता है। उदाहरण के लिए,


Marketing Manager


Sales Mangaer


Salesman


इस सन्देशवाहन में आदेश, नियम, सूचनाएँ नीतियाँ व निर्देश आदि को सम्मिलित किया जाता है।


2. ऊपर की ओर सन्देशवाहन इसका प्रवाह अधीनस्थों से उच्च अधिकारियों की ओर जाता है यह सन्देशवाहन पहले वाले से बिल्कुल विपरीत है। इसमें सुझाव, प्रतिक्रियाएँ, प्रतिवेदन, शिकायत आदि • शामिल की जाती हैं।


3. समतल सन्देशवाहन समतल सन्देशवाहन उस समय होता है जब एक ही स्तर के दो व्यक्ति


सूचनाओं का विनिमय करते हैं। समतल सन्देशवाहन का प्रयोग एक ही स्तर के अधिकारी समान प्रकृति की समस्याओं को सुलझाने तथा अन्य लोगों के अनुभव का लाभ उठाने के लिए करते हैं।