उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का महत्व - Importance of Entrepreneurship Development Programs
उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का महत्व - Importance of Entrepreneurship Development Programs
उद्यमिता विकास कार्यक्रम एक प्रभावशाली मानव संसाधन विकास एक कार्यक्रम है इससे समाज को बेरोजगारी दूर करके, लघु व्यवसायों का विकास, संतुलित क्षीय कार्यक्रम, स्थानीय संसाधनों का उचित प्रयोग, आर्थिक विकास में योगदान जैसे अनक लाभ प्राप्त होते है। यह कार्यक्रम विशेष तौर पर प्रथम श्रेणी के उदयमियों के लिए अत्यंत आवश्यक होते है क्योंकि वे तब तक सफल नही हो सकते जब तक उन्हे आवश्यक प्रशिक्षण व प्रेरणा उचित ढंग से न दे दे जाए। यह कार्यक्रम सभी समस्याओं का समाधान तो नही होता परंतु यह उद्यमियों को प्रोत्साहित करने तथा समस्याओं से निपटने के लिए आत्मविश्वास अवश्य प्रदान करता है ऐसे कार्यक्रम उद्यमियों का पहल करने तथा आर्थिक विकास में योगदान करने के लिए प्रेरित करते है । इनका महत्व निम्न प्रकार से वर्णित किया जा सकता है।
1. रोजगार के अवसर उत्पन्न करना बेरोजगारी अविकसित देशों की एक प्रमुख समस्या है। ऐसे कार्यक्रम संभावित उद्यमियों को अपने व्यवसाय स्थापित करके स्वरोजगार के लिए योग्य बनाते है। नए नए व्यवसाय लघु, मध्यम तथा बड़े स्तर पर भी स्थापित होते हैं। इनकी संख्या धीरे धीरे बढ़ती जाती है तथा ये अधिक से अधिक लोगों को रोजगार भी प्रदान करते है। इस प्रकार उद्यमी अपने साथ साथ दूसरो का भी विकास करता है। ऐसे कार्यक्रम नौकरी वालों को नौकरी देने वालों के रूप में परिवर्तित करते हैं। भारत सरकार द्वारा भी इस दिशा में कदम उठाए गए है तथा विभिन्न् योजनाएं शुरू की गई है। नेहरू रोजगार योजना राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना, एकीकृत ग्रामीण विकास योजना आदि । इन योजनाओं का मुख्य उददेश्य गरीबी को दूर करना तथा रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उत्पन्न करना है।
2. पूंजी निर्माण किसी भी उद्यम को वित्त के बिना स्थापित नही किया जा सकता है उद्यमी एक तरफ तो अपने वित्तीय साधनों को प्रयोग में लाता है तथा दूसरी तरफ से वह समाज के विभिन्न हिस्सों ेस लोगों के पास पड़ी अनुत्पादक बचतों को इक्ठठा करके उत्पादक कार्यों में निवेश करने का कार्य करता है। इस प्रकार वह पूंजी निर्माण का कार्य करता है यह पूंजी निर्माण देश के औद्योगिक विकास के लिए लाभदायक सिद्ध होता है। इसके अतिरिक्त देश में विभिन्न वित्तीय संस्थाएं जैसे: आईसीआईसीआई, आई डी बी आई एस आई डी सी आदि भी उद्यमिता के विकास के कार्यक्रमों में शामिल है तथा आवश्यकतानुसार उद्यमियों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है। इस प्रकार पूंजी निर्माण औद्योगिक विकास को और अधिक गति प्रदान करता है।
3. संतुलित क्षेत्रीय विकास सफल उद्यमिता विकास कार्यक्रम देश औद्योगिकीकरण को बढावा देते है, विशेष रूप से पिछड़े और दूर दराज क्षेत्रों में उद्यमी इन कार्यक्रमों से प्रेरित होकर पिछडे तथा दूरदराज क्षेत्रों में व्यावसायिक इकाइयां स्थापित करके वहां के स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते है। ऐसे क्षेत्रों में अधिकाधिक इकाइयों की स्थापना से वहां अधिक रोजगार, अधिक आय, अधिक बचत, उच्च जीवन स्तर जैसे लाभ धीरे-धीरे उस क्षेत्र को मिलना प्रारंभ हो जाता है। औद्योगिक इकाइयों के विकास के कारण वहां अन्य ढांचागत सुविधाओं का विकास होने लगता है। इस प्रकार यह प्रक्रिया संतुलित क्षेत्रीय विकास में सहायक सिद्ध होती है।
4. प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि उद्यमिता विकास कार्यक्रम समाज में और अधिक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में एक सकारात्मक भूमिका निभाते है तथा रोजगार के अधिक से अधिक अवसर प्रदान करके लोगों की आय में भी वृद्धि करते है।
यह युवा उद्यमियों को अवसरों को पहचानने एवं उन्हे भूनाने के लिए भी प्रेरित करते है। उद्यमी प्रेरित होकर संसाधनों का संगठित करते हैं तथा नए व्यावसाय की स्थापना करते है। इससे अर्थव्यवस्था में वस्तुओं का उत्पादन तथा उत्पादकता दोनो ही बढ़ते है, परिणाम स्वरूप आर्थिक विकास के द्वारा राष्ट्रीय आय में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है इस प्रकार देश में प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि होती है।
5. जीवन स्तर में सुधार ऐसे कार्यक्रम नई इकाइयों की स्थापना के लि ए संभावित उद्यमियों को तैयार करते है तथा स्थापित उद्यमियों को भी व्यावसाय के विकास के लिए प्रेरित करते है। उद्यमियों के द्वारा ऐसा किए जाने से नई इकाइयां स्थापित होती है जो वस्तुओं तथा सेवाओं की कमी को दूर करती है।
वस्तुओं का व्यापक पैमाने पर उत्पादन शुरू हो जाने से उनकी लागत में कमी आती है। कम कीमत पर वस्तुओं तथा सेवाओं की उपलब्धता से लोगो द्वारा इनका उपभोग व उपयोग कर पाना संभव हो जाता है इससे इनकी जीवन शैली में परिवर्तन आता है तथा जीवन स्तर में सुधार आता है।
6. उद्यमों में नव प्रवर्तन उद्यमिता विकास कार्यक्रम मुख्य रूप से छोटे व्यावसायों के विकास को गति देने के उददेश्य के साथ काम करते है। ऐसा माना जाता है कि छोटे व्यवसायों में कुछ नया करने की प्रेरणा तथा आवश्यकता दोनो होते हैं। छोटे व्यवसाय अपनी आवश्यकतानुसार उत्पाद, उत्पाद के संयोजनों, तकनीकों आदिक में अन्वेषण करते हैं।
7. आर्थिक स्वतंत्रता - उद्यमी देश में बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण करता है तथा विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक स्तर की सेवाएं भी प्रदान करता है । वह सेवाओं के क्षेत्र को भी प्रभावशाली बनाता है वह आयात की जाने वाली वस्तुओं के प्रतिस्थापन उत्पादन अपने देश में तैयार करता है इससे विदेशों पर निर्भरता कम होती है। वह निर्यात में भी वृद्धि के लिए कार्य करता है इस प्रकार आर्थिक निर्यात और कम आयात द्वाा वे विदेशी मुद्रा में भी भारी बचत करते हैं। यह आर्थिक स्वतंत्रता का ही एक प्रारूप है जो देश में चलाए जा रहे विभिन्नन उद्यमशीलता का विकास कार्यक्रमों के कारण ही संभव है या होता है।
8. स्थानीय संसाधनों का प्रयोग आमतौर पर हर देश में स्थानीय संसाधनों का उचित उपयोग नही किया जा रहा होता है तथा वे बेकार पड़े रहते है।
यह एक स्वीकृत तथ्य है कि स्थानीय संसाधनों का उचित उपयोग उस क्षेत्र का भी विकास करता है तथा वह भी बिना अधिक निवेश के । उद्यमिता विकास कार्यक्रम उचित मार्गदर्शन, सहायता, शिक्षा और प्रशिक्षण द्वारा संभावित उद्यमियों को स्थानीय संसाधनों के प्रयोग के लिए प्रेरित करते हैं। इस संदर्भ में विभिन्न संस्थाएं भी उनकी सहायता करती है।
9. युवाओं के सामिजक तनाव में कमी- युवाओं के साथ जुडी कई सामाजिक समस्याएं उनकी उर्जा का उत्पादक कार्यों में प्रयोग न हो पाने के कारण ही उत्पन्न होती है। देश को चाहिए कि वह संभावित उद्यमिता वाले गुणों से परिपूर्ण व्यक्तियों की पहचान करे तथा उन्हे अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रेरित करें। इस प्रकार कई अनुत्पादक कार्यों में लगे युवाओं को भी उत्पादक कार्यो में लगाया जा सकता है।
उद्यमिता विकास कार्यक्रम ऐसा कार्य प्रभावशाली ढंग से करते हैं। तथा युवाओं की योग्यताओं के पहचान कर उन्हें सही दिशा पर लाते हैं। वे उन्हें अपने व्यवसाय स्थापित करने के लिए उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण तथा सहायता प्रदान करते हैं। इस प्रकार से समाज में युवाओं में बेरोजगारी कम होती हैं तथा सामाजिक तनाव भी कम होता है।
10. संपूर्ण विकास में सहायता किसी भी देश का आर्थिक विकास मुख्य रूप से उद्यमियों पर निर्भर करता है। वास्तव में उद्यमिता एक विकसित देश के लिए आवश्यक तथा व्यापक महत्त्व वाली अवधारणा है जो आर्थिक विकास को संतुलित बनाए रखती है। व्यवसाय स्थापित होते रहने से औद्योगिक क्षेत्र तथा अर्थव्यवस्था दोनों ही गतिशील रहते हैं। उद्यमिता विकास कार्यक्रम द्वारा देश में उद्यमी एवं उद्यमिता दोनों को ही बढ़ावा दिया जाता है तथा एक सकारात्मक तैयार करके उद्यमियों की मदद से देश के संपूर्ण विकास में सहायता करने का प्रयास किया जाता है।
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