औद्योगिक सम्प्रेषण का महत्व - importance of industrial communication
औद्योगिक सम्प्रेषण का महत्व - importance of industrial communication
आधुनिक युग में मानव सभ्यता का विकास ही सम्प्रेषण प्रणाली के अभाव में अवरूद्ध हो जाएगा। प्रत्येक स्तर पर, चाहे व्यक्ति औद्योगिक उपक्रम में हो, समाज में, परिवार में, अथवा सामुदायिक जीवन में, बिना सम्प्रेषण के वह अपनी भूमिकाओं का निष्पादन सही ढंग से नहीं कर सकता। औद्योगिक उपक्रम की स्थापना किन्हीं सुपरिभाषित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए होती है। इन लक्ष्यों की प्राप्ति इस बात पर निर्भर करती है कि प्रबंधन कर्मचारियों की क्रियाओं से किस प्रकार तादात्म्य एवं समन्वय स्थापित करते हैं। इस कार्य में उचित संचार माध्यम एवं सम्प्रेषण प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार, संगठन • अपने लक्ष्यों व उद्देश्यों को सुगमता से हासिल कर लेते हैं। सम्प्रेषण प्रणाली जितनी कारगर होगी, उतना ही नीतियों, नियमों,
प्रतिमानों व निर्देशों को कर्मचारी उचित समय पर स्पष्ट रूप से समझ सकेंगे, जोकि न केवल गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन बल्कि अच्छे मानवीय समबन्धों की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण होगा।
प्रबन्धन या नियोक्ता अपनी नीतियों, निर्णयों, विचारों आदि को कर्मचारियों तक उपयुक्त ढंग से तभी प्रेषित कर सकता है, जब संचार व्यवस्था भली भाँति विकसित हो। औद्योगिक सम्प्रेषण, वास्तव में, एक स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा अपने मनोभावों, विचारों तथा निर्णयों से दूसरे स्तरों के अधिकारियों व कर्मचारियों को अवगत कराने की प्रक्रिया है। इसके लिए प्रबन्धकों को चाहिए कि विभिन्न पर्यवेक्षकीय तथा प्रबंधकीय स्तरों का निर्माण करें, जिससे वे श्रृंखलाबद्ध रूप से संगठन की कायर्वाही पर दृष्टि रख सकें। समुचित संचार प्रणाली होने से उच्च प्रबन्धक, विभागीय प्रबन्धक, पर्यवेक्षक तथा अन्य कर्मचारी एक दूसरे से लगातार सम्पर्क बनाए रख सकते हैं।
इनसे सभी स्तरों के कर्मचारियों के आत्मविश्वास को बल मिलता है। इससे उनके बीच पनपने वाली भ्रांतियों को दूर करने में भी सहायता मिलती है। तथा समस्याओं का समयानुकूल निदान व समाधान भी सम्भव हो जाता है। आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न नीतियों, निर्देशों व लक्ष्यों आदि में उद्यम के हित को ध्यान में रखते हुए संशोधन भी किया जा सकता है। इस प्रकार, प्रबन्धक अपने क कर्मचारियों पर निरन्तर प्रभाव बनाए रख सकता है।
औद्योगिक संगठनों (खासकर बड़े उद्यमों में) में प्रभावी सम्प्रेषण प्रणाली का विकास व उसका पोषण किया जाना आवश्यक है क्योंकि इसके अभाव में संदेश वांछित व्यक्ति तक पहुँचते-पहुँचते इतना विकृत हो जाएगा कि अर्थ का अनर्थ होने की सम्भावना बलवती हो जाएगी। कुशल सम्प्रेषण प्रणाली वही है। जिसमें प्रत्येक स्तर पर विचारों की समरूपता बनी रहे। तथा हर स्तर पर उसी रूप में उन विचारों का सम्प्रेषण, संग्रहण व अर्थ निरूपण हो सके, जैसा कि अपेक्षित है। इस प्रकार, उचित संचार प्रणाली का होना संगठन की सफलता के लिए अपरिहार्य है।
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