कार्यशील पूँजी का महत्त्व - importance of working capital

कार्यशील पूँजी का महत्त्व - importance of working capital


कार्यशील पूँजी उद्यम में जीवन शक्ति की तरह कार्य करती है। जब एक व्यवसाय शुरू किया जाता है, उसके लिए कच्चा माल खरीदने के लिए कार्यशील पूँजी की आवश्यकता पड़ती है। कच्चा माल बाद में निर्मित माल बन जाता है और बाजार में बेंच दिया जाता है। लेकिन उधार विक्रय होने के कारण कुल विक्रय रोकड़ में शीघ्र परिवर्तित नहीं होता। इस प्रकार, उधार विक्रय वरोकड़ प्राप्ति के बीच समय का अंतर पाया जाता है।

कच्चे माल को निर्मित माल में परिवर्तित करनेतथा निर्मित माल को दोबारा रोकड़ में परिवर्तित करने की समयावधि को संचालन चक्र कहा जाता है। इस अवधि में व्यावसायिक क्रियाएँ चालू रखने के लिए व्यय करने पड़ते हैं जिसके लिए कार्यशीलपूँजी की आवश्यकता पड़ती है। कार्यशील पूँजी की आवश्यकता संचालन चक्र की अवधि पर निर्भर करती है। अवधि जितनी अधिक होगी, कार्यशील पूँजी उतनी ही अधिक मात्रा में आवश्यक होगी। संचालन चक्र की अवधि व्यवसाय की प्रकृति पर निर्भर करती है। एक निर्माणी कार्य में लगे उपक्रम में संचालन चक्र की अवधि व्यापारिक संस्था की तुलना में अधिक होगी।