स्वतंत्र संचालक - independent director
स्वतंत्र संचालक - independent director
'स्वतंत्र संचालक' की अवधारणा को पहली बार कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा कंपनी विधि में शामिल का गाया। सूचीयत कंपनियों के संचालक मंडल में स्वंतत्र संचालकों को नियुक्त करने का उद्देश्य अच्छे कार्पोरेट प्रशासन मानकों के पालन को सुनिश्चित करना है। स्वतंत्र संचालकों से यह उम्मीद की जाती है। कि वे यह सुनिश्चित करें कि कंपनी के प्रवर्तक प्रबंधक वर्ग द्वारा अनुचित तरीके अपनाकर स्वयं को वित्तीय फायदा न पहुँचाया जाय। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि स्वतंत्र संचालक उत्कृष्ट गुणों वाला एवं ईमानदार व्यक्ति होना चाहिए तथा उनका कंपनी या उसके प्रवर्तकों या संचालकों के साथ कोई आर्थिक संबंध नहीं होना चाहिए जिससे वे वास्तव में स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 149 (6) में के अंतर्गत स्वतंत्र संचालक को विस्तृत रूप से निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया गया है :
कंपनी के संबंध में स्वतंत्र संचालक का आशय एक ऐसे संचालक से है:
क) जो संचालक मंडल के विचार में ईमानदार व्यक्ति है तथा जिसके पास सुसंगत विशेषज्ञा एवं अनुभव है;
ख) (i) जो कंपनी अथवा इसकी नियंत्रक, सहायक या सहयुक्त कंपी का प्रवर्तक नहीं है। अथवा नही था
(ii) जो कंपनी, इसकी नियंत्रक, सहायक या सहयुक्त कंपनी के प्रर्वतकों या संचालकों का रिस्तेदार नहीं है।
ग) जिसका कंपनी, इसकी नियंत्रक, सहायक या सहयुक्त कंपनी, या इसके प्रवर्तकों या संचालकों के साथ ठीक दो पूर्ववर्ती वित्ती वर्ष या चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कोई आर्थिक संबंध नहीं है अथवा नही था
घ) जिसके किसी रिस्तेदार का कंपनी, इसके प्रर्वतकों या सहायक, था सहयुक्त कंपनी या इसके प्रवर्तकों या संचालकों के साथ कोई ऐसा आर्थिक संबंध या संव्यवहार ठीक दो पूर्ववर्ती वित्तीय वर्षों में या चालू वित्तीय वर्ष में नहीं है या नहीं था जो इसके कुल टर्नओवर या कुल आय का 2% था अधिक है। अथवा पचास लाख रूपये या निर्धारित उच्च राशि, इनमें से जो भी कम हो;
ड) जो न तो स्वयं और न ही उसका कोई रिस्तेदार
1) कंपनी या इसकी नियंत्रक, सहायक या सहयुक्त कंपनी में उसकी नियुक्ति के प्रस्तावित होने के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष से 3 वर्षों में कोई प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक नहीं है और न ही था, तथा नही कोई कर्मचारी है और न ही था;
ii) इसकी नियुक्ति के प्रस्तावित किए जाने वाले वित्तीय वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती तीन वित्तीय वर्षों में निम्नलिखित का कर्मचारी या स्वामी था साझेदार है अथवा रह चुका है :
अ) कंपनी या इसकी नियंत्रक, सहायक या सहयुक्त कंपनी का लागत लेखा परीक्षको,
अथवा प्रैक्टिस करने वाले लेखा-परीक्षकों या कंपनी सचिवों की फर्म अथवा
ब) कोई कानूनी या सलाहकारी फर्म जिसका कंपनी इसकी नियंतक, सहायक या सहयुक्त कंपनी के साथ ऐसी फर्म के कुल टर्नओवर का 10% या अधिक अपने रिस्तेदारों के साथ मिलकर धारण करता है। कंपनी के कुल मताधिकार का 2% या अधिक अपने रिस्तेदारों के साथ मिलकर धारण करता है।
iv) जो किसी गैर-लाभकारी संगठन का मुख्य कार्यकारी अधिकारी या संचालक है, चाहे किसी भी नाम से पुकार जाये, जो कंपनी, इसके किन्हीं प्रवर्तकों, संचालकों,
या इसकी नियंत्रक सहायक या सहयुक्त कंपनी से अपने कुल प्राप्तियों का 25% या अधिक प्राप्त करता हो अथवा जो कंपनी के कुल मताधिका के 2% या अधिक पर नियंत्रण रखता हो; या
(च) जो कोई अन्य निर्धारित अर्हताएं रखता हो।
अतः उपरोक्त परिभाषा से यह स्पष्ट होता है कि स्वतंत्र संचालक की परिभाषा देने में बहुत सावधानी बरती गई है जिससे कि स्वतंत्र संचालक द्वारा स्वतः या अपने रिस्तेदारों या एसोसिएट के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय लाभ लेने के संभावना न रहे।
वार्तालाप में शामिल हों