ऋण-पत्र जारी करना - issue of debentures

 ऋण-पत्र जारी करना - issue of debentures


ऋण-पत्र सार्वजनिक अथवास निजी, सभी कंपनियों द्वार कभी भी जारी किए जा सकते हैं। ऋए-पत्र आबंटित करने के लिए वे सभी कानूनी व्यवस्थाएं लागू होती हैं जो शेयर आबंटित करने के लिए निर्धारित हैं। ऋण-पत्र जारी करने का अधिकार संचालक मंडल के पास होता है। ऋण-पत्र सममूल्य पर अथवा अधिमूल्य पर जारी किए जा सकते हैं। इन्हें निजी रूप से अथवा विवरण-पत्रिका के माध्यम से जारी किया जा सकता है।


ऋण-पत्रों के निर्गमन के संबंध में कानूनी प्रावधान निम्नलिखित हैं:


1) कंपनी ऐसे ऋण-पत्र जारी कर सकती है जिन्हें शोधन के समय पूर्णतया या अंशतः शेयरों में बदला जा सकता हो। परन्तु ऐसे परिवर्तनीय ऋणपत्रों का निर्गमन विशेष संकल्प द्वार अनुमोदित होना चाहिए 


2) मताधिकार वाले ऋणपत्र जारी नहीं किये जा सकते।


3) ऐसे निबंधनों और शर्तें जो विहित की जाएं, के अधीन केवल रक्षित ऋण पत्र ही जारी किए जा सकते हैं।


कंपनी (शेयर पूँजी एवं ऋण पत्र) नियमावली, 2014 के नियम 18 (1) के अनुसार रक्षित ऋण-पत्र जारी करने के लिए निम्नलिखित शर्ते पूरी की जानी चाहिए:


क) केवल 10 वर्ष में शोधनीय रक्षित ऋण पत्र जारी किये जा सकते हैं। परन्तु आधारभूत संरचना वाली परियोजनाओं को स्थापित करनेवाली कंपनियाँ 10 वर्ष से अधिक 30 वर्ष तक की अवधि वाले रक्षित ऋण पत्र जारी कर सकती हैं।


ख) ऋण-पत्रों का ऐसा निर्गमन कंपनीकी आस्तियों या संपत्तियों का मूल्य ऋणपत्रों एवं इन पर ब्याज की राशि के पुनर्भुगतान के लिए पर्याप्त होगा।


ग) कंपनी अपने ऋणपत्रोंके अभिदान हेतु विवरण-पत्रिका या प्रस्ताव पत्र जारी करने से पहले ऋण-पत्र न्यासी को नियुक्त करेगी तथा ऋण-पत्रों के आबंटन के 60 दिनों के भीतर ऋण-पत्र न्यास संलेख का निष्पादन करेगी जिससे कि ऋण-पत्र धारकों का हित सुरक्षित हो।


घ) प्रभार या बंधक से ऋण पत्रों हेतु जमानत को ऋण-पत्र न्यासीके पक्ष में सृजित किया जायेगा, ऐसी जमानत निम्नलिखित पर हो सकती है: कंपनी को ऋण-पत्रों के आबंटन के 6 माह के भीतर ऋण-पत्रों का प्रमाणपत्र भेजना आवश्यक होता है।