प्रतिभूतियों का प्रीमियम पर निर्गमन - issue of securities at a premium

प्रतिभूतियों का प्रीमियम पर निर्गमन - issue of securities at a premium


सामान्यतः प्रतिभूतियों का निर्गमन अपने सम-मूल्य अथवा अंकित मूल्य अर्थात् प्रतिभूति प्रमाणपत्र पर लिखे मूल्य पर किया जाता है। प्रतिभूतियों के सम मूल्य पर निर्गमन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। परन्तु कभी कभी एक सफल कंपनी अपनी प्रतिभूतियों को प्रीमियम पर निर्गमित करती है। प्रतिभूतियों को अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर निर्गमित करना प्रीमियम पर निर्गमन' कहलाता है। कंपनी अधिनियम में इस प्रकार के निर्गमन पर कोई प्रतिबंध नहीं है और कंपनी अपनी स्वेच्छानुसार जब चाहे इस प्रकार का निर्गमन करने के लिए स्वतंत्र है। साथ ही, कंपनी एक ही प्रकार की प्रतिभूतियों पर विभिन्न दरों से प्रीमियम प्राप्त कर सकती है।


अधिनियम की धारा 52 द्वारा प्रतिभूतियों पर प्राप्त प्रीमियम की राशि के प्रयोग पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस धारा के अनुसार प्रीमियम को राशि प्रतिभूति प्रीमियम खाते में जमा की जानी चाहिए तथा इस राशि को कंपनी की दत्त शेयर पूँजी के समान ही समझा जाना चाहिए।


प्रतिभूति प्रीमियम खाते की धन राशि का प्रयोग निम्नलिखित पाँच उद्देश्यों के लिए प्रयोग करने की स्वतंत्रता दी गई है :


1) कंपनी के सदस्यों में पूर्णदत्त बोनस शेयर जारी करने के लिए।


2) कंपनी के प्रारंभिक व्ययों को राइट ऑफ करने के लिए।


3) कंपनी के विमोचनशील पूर्वाधिकार शेयरों अथवा ऋण-पत्रों के विमोचन पर दिए जानेवाले प्रीमियम का भुगतान करने के लिए।


4) कंपनी के शेयरों या ऋण-पत्रों के निर्गमन पर किए गए व्ययों, कमीशन या कटौती को राइट-ऑफ करने के लिए।


5) धारा 68 के उपबंधों के अधीन रह कर कंपनी द्वारा अपनी प्रतिभूतियों को वापस क्रय करने के लिए।