लेसिकर, पेटाइट एवं फ्लैटले मॉडल - Lasikar, Petite and Flatley models
लेसिकर, पेटाइट एवं फ्लैटले मॉडल - Lasikar, Petite and Flatley models
लेसिकर, पेटाइट और फ्लैटले ने संचार का एक महत्त्वपूर्ण एवं संवेदनशील मॉडल प्रणित पादित किया है। इस माडल की व्याख्या निम्नलिखित प्रकार से उनके द्वारा माने गए दो व्यक्तियों केविन व मर्सी को आधार मानते हुए दी गई है।
1. प्रारम्भः मर्सी एक सन्देश भेजता है जो केविन के संवेदन तंत्र द्वारा प्राप्त किया जाता है संवेदन तंत्र में मनुष्य के पास का वातावरण मनुष्य की ज्ञानेन्द्रियां आखें, कान, नाक, जीभ तथा त्वचा अनुभव करने वाली होती हैं।
2. संवेदन तन्त्र द्वारा सूचना खोजनाः संवाद के साथ-साथ पहले से प्राप्त सूचनाएं भी इस बारे में यदि कोई हों तो सवेदन तंत्र द्वारा खोजी जाती हैं
व एकत्रित की जाती हैं जो सूचना को अशुद्ध भी कर सकती हैं।
3. संवेदन तन्त्र द्वारा निष्कर्ष निकालना: संवेदन तन्त्र सन्देश को निस्पंदन करके अर्थात् कोलाहल वगैरह से या शोर से अलग निकालकर संदेश का अर्थ निकालता है।
4. प्रतिक्रियाः मर्सी के संवाद को जो अर्थ दिया जाता है उसके बदले में उसे केविन के संवाद से भी कुछ प्रतिक्रिया प्राप्त हो सकती है।
5. पुनरावृत्ति जब केविन अपना संवाद मर्सी को भेज देता है तो संचार प्रक्रिया का एक चरण पूरा हो जाता है तथा दूसरा चरण प्रारम्भ होता है। जिसमें वे अपना-अपना स्थान बदल लेते हैं।
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