शेयर की वैध प्रकृति - lawful nature of the share

शेयर की वैध प्रकृति - lawful nature of the share


भारत में कंपनी का शेयर माल (Goods) के समान माना जाता है। कंपनी अधिनियम की धारा 44 अनुसार, "कंपनी में किसी सदस्य के शेयर अथवा ऋण-पत्र चल संपत्ति होते हैं तथा उनका अन्तरण के कंपनीकी अंतर्नियमावली में दी गई रीति से हो सकता है।" यह ध्यान देने योग्य है कि, शेयर कपड़े की गाँठ या चावल के बोरे के समान चल संपत्ति नहीं है। ये वस्तुएँ कोई कानून पारित करके अस्तित्व में नहीं लाई जा सकती। कंपनी का शेयर एक सर्वथा अलग किस्म की संपत्ति होता है। वह अमूर्त प्रकृति का होता है,

तथा अधिकार एवं दायित्वों का एक समूह मात्र होता है।” अतः शेयर कंपनी अधिनियम और कंपनी की अंतर्नियमावली में दी गई रीतिके अधीन ही अंतरणीय होते हैं और इनके अंतरण पर कुछ प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं।


कंपनी अधिनियम की धारा 45 के अनुसार शेयर पूँजी वाली कंपनी के प्रत्येक शेयर का एक अंकित मूल्य होना आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक शेयर पर पृथक-पृथक संख्यांकन भी किया जाना चाहिए। परंतु पृथक-पृथक संख्यांकन की यह आवश्यकता 'निक्षेपागार के साथ घाटित किए गये शेयरों पर लागू नहीं होती।