मौखिक सन्देश वाहन की सीमायें - Limitations of Oral Communication

मौखिक सन्देश वाहन की सीमायें - Limitations of Oral Communication


 जहाँ एक ओर मौखिक सन्देशवाहन के बहुत से लाभ हैं, दूसरी ओर इसकी कुछ सीमाएं अथवा दोष भी हैं जो निम्नलिखित है


1. खर्चीली पद्धति - जब कम उपयोगी सूचनाओं को दूस्थ स्थानों पर टेलीफोन आदि द्वारा भेजा जाता है तो मौखिक सन्देशवाहन खर्चीली पद्धति सिद्ध होती है।


2. लम्बे संदेशों के लिए अनुपयुक्त मौखिक सन्देशवाहन से केवल छोटे व संक्षिप्त विचारों का विनिमय ही लाभप्रद होता है। लम्बे संदेशों को प्राप्तकर्ता द्वारा याद रखना सम्भव नहीं होता।


3. नीति संबंधी तथ्यों के लिए उपयुक्त नही:- जहाँ नीतियों, नियमों व अन्य महत्त्वपूर्ण सन्देशों को भेजना हो वहाँ पर मौखिक सन्देशवाहन का कोई महत्त्व नहीं।


4. स्पष्टता का अभाव- स्पष्टता का अभाव उस समय होता है जब वार्तालाप के लिए समय की कमी हो ।


जल्दी में कोई बात गलत भी कही जा सकती है जिसके परिणाम गलत हो सकते हैं। 5. समय का दुरुपयोग- मौखिक संदेशवाहन में समय का दुरुपयोग इस सन्दर्भ में माना जाता है कि जब सभाओं में किसी बात पर अनावश्यक वार्तालाप बढ़ जाता है।


6. दोनों पक्षों की उपस्थिति आवश्यक मौखिक सन्देशवाहन में प्रेषक व प्रेषणी दोनों का आमने सामने होना आवश्यक है।


मौखिक सन्देशवाहन के प्रारूप (Forms of Oral Communication)


1. व्यक्तिगत निर्देशन


2. रेडियो


3. टेलिविजन


4. सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम


5. दूरभाष एवं वार्ता


6. साक्षात्कार


7. भाषण


8. दूरभाष पर वार्ता ।


9. अगूरीलता।


10. संधीय श्रृंखलाएं।