उद्यमिता का अर्थ एवं परिभाषाएँ - Meaning and Definitions of Entrepreneurship
उद्यमिता का अर्थ एवं परिभाषाएँ - Meaning and Definitions of Entrepreneurship
उद्यमिता शब्द औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ अन्य कई संबंधित क्षेत्रों में भी अपना महत्त्व बढ़ाता जा रहा है। आर्थिक क्षेत्र के कई अन्य शब्दों की तरह इस पर लंबे समय से बहस चल रही है। इसका अर्थ कई रूपों व स्वरूपों में किया जा रहा है। उद्यमिता शब्द के कई अन्य नाम भी लिए जाते हैं; जैसे जोखिम - उठाना', 'नवप्रवर्तन', दुस्साहस आदि । संयोग से विभिन्न समाजशास्त्री, मनोवैज्ञानिक तथा अर्थशास्त्री भी उद्यमिता में अपनी रुचि दिखा रहे हैं। एक समाजशास्त्री उद्यमिता के लक्ष्यों में सामाजिक स्तर, पारिवारिक पृष्ठभूमि आदि को शामिल करते हैं। मनोवैज्ञानिक एक उद्यमी के व्यक्तिगत गुणों; जैसे - जोखिम उठाने की क्षमता, पहल करने की क्षमता, रचनात्मकता, नेतृत्व का गुण, आदि को उद्यमिता के साथ संबंधित करते हैं।
अर्थशास्त्री इसका विश्लेषण उद्यमी की व्यावसायिक पृष्ठभूमि, पूँजी तक पहुँच,
व्यावसायिक व तकनीकी अनुभव के संदर्भ के साथ करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में उद्यमी तथा उद्यमिता शब्द का बहुत अधिक विकास हुआ है तथा विकसित तथा विकासशील देश दोनों ही उसके महत्त्व को समझाने तथा स्वीकार करने लगे हैं। उद्यमिता एक बहुआयामी शब्द है तथा इसका विश्लेषण विभिन्न विद्वानों द्वारा, विभिन्न तरीकों से किया गया है। उद्यमिता की कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं :
1. बी. हिगिन्स के अनुसार, “उद्यमिता से अभिप्राय, निवेश तथा उत्पादन अवसरों को खोजना, एक नयी उत्पादन प्रक्रिया को स्वीकार कर एक नये उद्यम का गठन करना, पूँजी जुटाना, श्रम उपलब्ध करवाना, कच्चे माल की पूर्ति की व्यवस्था करना, स्थान का चयन, नई तकनीकों,
सामग्री के स्रोतों के बारे में जानकारी प्राप्त करना और उद्यम के दैनिक संचालन हेतु उच्च प्रबंधकों की नियुक्ति आदि क्रियाओं का संयोजन करना है।"
2. शुम्पीटर के अनुसार, “उद्यमिता की परिभाषा के अंतर्गत इसमें मूल रूप से ऐसे कार्य शामिल किए जाते हैं जो कि व्यवसाय के साधारण व्यवहार में नहीं आते।"
3. रान्सटैड्ट रॉबर्ट सी. के अनुसार, “उद्यमिता अतिरिक्त धन सृजन करने की गतिशील प्रक्रिया हैं। यह
धन उन व्यक्तियों द्वारा सृजित किया जाता है जो समय तथा गति की वचनबद्धता द्वारा किसी उत्पादन
अथवा सेवा में मूल्य प्राप्त करते हैं। उत्पाद अथवा सेवा स्वयं में एकाकी न भी हो परंतु उद्यमी द्वारा
आवश्यक गुणों एवं साधनों के संयोजन द्वारा उनमें मूल्य सृजन किया जाता है।”
4. ए. एच. कोल के अनुसार, “उद्यमिता एक व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह की एक उद्देश्यपूर्ण क्रिया है, जिसमें निर्णयों की एक एकीकृत श्रृंखला सम्मिलित होती है। यह आर्थिक वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन अथवा वितरण के लिए एक लाभप्रद व्यावसायिक इकाई का निर्माण, संचालन एवं विकास करता है।"
5. पीटर एफ. ड्रकर के अनुसार, “उद्यमिता न तो विज्ञान है और न ही कला। यह एक व्यवहार है। इसका आधार ज्ञान है। ज्ञान उद्यमिता है तथा अंत तक पहुँचने का साधन है।”
6. रॉबर्ट के. लैम्ब के अनुसार, “उद्यमिता सामाजिक निर्णयन का वह स्वरूप है जो आर्थिक नवप्रवर्तकों द्वारा सम्पादित किया जाता है।"
7. एच. एन. पाठक के अनुसार, " उद्यमिता उन व्यापक क्षेत्रों को सम्मिलित करती है, जिनके संबंध में अनेक निर्णय लेने होते हैं। उन निर्णयों को व्यापक रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
1. अवसर का ज्ञान करना,
2. औद्योगिक इकाई का संगठन करना,
3. औद्योगिक इकाई को एक लाभप्रद, गतिशील तथा विकासशील संस्था के रूप में संचाति करना।"
8. जे. इ. स्टेपनेक के अनुसार, “उद्यमिता किसी उपक्रम में जोखिम उठाने की क्षमता, संगठन की योग्यता तथा विविधीकरण करने एवं नवप्रवर्तनों को जन्म देने की इच्छा है।"
9. रिचमेन तथा कोपेन के अनुसार, “उद्यमिता किसी सृजनात्मक, बाह्य अथवा खुली प्रणाली की ओर संकेत करता है। यह नवप्रवर्तन, जोखिम वहन तथा गतिशील नेतृत्व का कार्य है।”
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