चल प्रभार का स्थायी प्रभार बनना - movable charge becoming permanent charge
चल प्रभार का स्थायी प्रभार बनना - movable charge becoming permanent charge
चल प्रभार निम्नलिखित परिस्थियों में स्थायी प्रभार बन जाता है :
i) जब कंपनी का समापन आरंभ हो जाए, अथवा
ii) जब कंपनी कारोबार करना बंद कर दे, अथवा
(iii) जब ऋणपत्रधारी अपनी प्रतिभूति वसूल करने के हकदार बनने के पश्चात् इस प्रयोजन से कोई प्राप्तकर्ता नियुक्त करके हस्तक्षेप करें।
चल प्रभार पर समापन का प्रभाव : धारा 332 में कंपनी का समाजन आरंभ होने से तुरंत पहले 12 महीनों में सृजित चल प्रभार की विधिमान्यता के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त लगाई गई है। इसमें यह व्यवस्था है कि निम्नलिखित दशाओं के अतिरिक्त इस प्रकार का प्रभाव शन्य होगा:
i) यदि प्रभार सृजित किए जाने के तुरंत बाद कंपनी ऋण-शोधन क्षमता थी, अथवा
ii) यदि प्रभार सृजित किए जाने के समय अथवा उसके पश्चात् सउसके प्रतिफलस्वरूप कंपनी द्वारा वास्तव में नकद राशि प्राप्त की गई हो।
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