छोटे व्यवसायों की प्रकृति तथा विशेषताएँ - Nature and Characteristics of Small Businesses

छोटे व्यवसायों की प्रकृति तथा विशेषताएँ - Nature and Characteristics of Small Businesses


बड़े आकार के व्यवसायों की तुलना में छोटे स्तर के व्यवसायोंकी अपनी विशेषताएँ होती हैं। ये उनकी अवधारणा को स्पष्ट भी करती हैं तथा बड़े आकार के व्यवसायों से अलग भी करती हैं। लघु व्यवसाय की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:


(1) स्वामी का प्रबंधक होना : छोटे व्यवसाय में सामान्यतया मालिक ही प्रबंधक होता है। इस प्रकार ये व्यवसाय मालिक द्वारा ही नियंत्रित एवं संचालित होते हैं। मालिक व्यवसाय के प्रत्येक निर्णय में सक्रिय रूप से भाग लेता है क्योंकि वह स्वयं प्रबंध का मुख्य हिस्सा होता है।


(2) एक व्यक्ति वाली संस्था : छोटे व्यवसाय पर स्वामित्व एक या थोड़े से व्यक्तियों के समूह का होता है। एकल व्यापार एवं साझेदारी को आम तौर पर से इसके मुख्य प्रारूपों के रूप में देखा जाता है।


(3) संचालन का स्थानीय क्षेत्र: लघु व्यवसाय की क्रियाएं या क्षेत्र आमतौर पर स्थानीय ही होती हैं। यह आवश्यक नहीं है कि उसके उत्पाद स्थानीय क्षेत्र में ही बेचे जाते हो, उनका क्षेत्र उससे कहीं अधिक भी हो सकता है। परंतु छोटे व्यवसाय में स्थानीय संसाधनों पर निर्भरता अधिक होती है।


(4) श्रम पर आधरित लघु व्यवसाय आमतौर पर श्रम पर आधारित होते हैं इससे पूंजी तथा तकनीक की मात्र सीमित होती है। इस प्रकार के व्यवसायों को अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कार्यशील पूंजी की अधिक आवश्यकता होती है।


(5) स्वदेशी संसाधन : छोटे व्यवसाय स्थानीय संसाधनों पर अधिक निर्भर होते हैं तथा असी के कारण उनमें स्वदेशी संसाधनों की भूमिका बहुत अधिक होती है।


(6) छोटे व्यवसाय के प्रबंध के बहुत अधिक स्तर नहीं होते। श्रम के विभाजन या विशिष्टीकरण भी कम होते है तथा उनके साधन एवं संसाधन भी सीमित ही होते हैं।


(7) संचालन का सीमित दायरा : छोटे व्यवसाय का आकार सीमित होता है तथा इसका व्यवसाय भी बाजार के एक सीमित क्षेत्र तक हही होता है।