सम्प्रेषण की प्रकृति, महत्व और भूमिका - Nature, Importance and Role of Communication
सम्प्रेषण की प्रकृति, महत्व और भूमिका - Nature, Importance and Role of Communication
आधुनिक युग तकनीकी युग है, जहाँ एक ओर विशाल उत्पादन सम्भव हुआ है वहीं दूसरी ओर प्रत्येक उद्योग में कार्य करने वाले व्यक्तियों की संख्या में भी पर्याप्त वृद्धि हुयी है। अतः किसी संस्था में सभी व्यक्तियों को एक सूत्र में पिरोने के लिये सम्प्रेषण व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। सम्प्रेषण का अर्थ दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य तथ्यों, विचारों, अनुमानों या संवेगों (Emotions) के पारस्परिक आदान-प्रदान से है। वर्तमान समय में तार, टेलीफोन, टेलीविजन तथा रेडियो आदि ने विचारों के सम्प्रेषण को अधिक सुलभ बना दिया है परन्तु ये सभी साधन स्वयं सम्प्रेषण नहीं हैं। चाल्र्स ई) रेडफील्ड (Charles E. Redfield) के अनुसार सम्प्रेषण से आशय मानवीय तथ्यों एवं विचारों के पारस्परिक विनिमय से है, न कि टेलीफोन, तार, रेडियो आदि तकनीकी साधनों से। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सफल सम्प्रेषण हेतु सूचना देने वाला और सूचना पाने वाला विषय वस्तु का एक-सा अर्थ बोध करने में समर्थ हो।
किसी व्यक्ति द्वारा कोई बात कह देना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि आवश्यकता इस बात की भी होती है कि सूचना पाने वाला सूचना को उसी प्रकार प्राप्त करे एवं उसका वही अर्थ लगावे जो सूचना देने वाला का है। यद्यपि किसी तथ्य पर कहने और सुनने वाले में एक मत होना आवश्यक नहीं है परन्तु सम्प्रेषण हेतु उन दोनों ही व्यक्तियों को सम्बन्धित तथ्य या सूचना का एक-सा अर्थ समझना आवश्यक है।
आधुनिक व्यावसायिक युग में व्यापार अथवा उपक्रम की सफलता का मूल तत्व न केवल सम्प्रेषण बल्कि प्रभावी सम्प्रेषण के कारण ही सम्भव है। सम्प्रेषण ही वह साधन है जिसके द्वारा व्यवहार को क्रियान्वित किया जाता है, परिवर्तनों को लागू किया जाता है, सूचनाओं को उत्पादक बनाया जाता है
एवं व्यावसायिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है। सम्प्रेषण में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचनाओं का आदान-पद्रान शामिल होता है। आधुनिक सम्प्रेषण क्रान्ति के युग में समस्त व्यावसायिक उपक्रमों की सफलता काफी सीमा तक प्रभावी सम्प्रेषण प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
सम्प्रेषण (Communication) शब्द अंग्रेजी के 'Common' शब्द से बना है जिसकी उत्पत्ति लैटिन शब्द 'Communis' से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ है एक समान सम्प्रेषण वह साधन है जिसमें संगठित क्रिया द्वारा तथ्यों, सूचनाओं, विचारों, विकल्पों एवं निर्णयों का दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य अथवा व्यावसायिक उपक्रमों के मध्य आदान-प्रदान होता है। सन्देशों का आदान-प्रदान लिखित, मौखिक अथवा सांकेतिक हो सकता है।
माध्यम बातचीत, विज्ञापन, रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, ई मेल, पत्राचार आदि कुछ भी हो सकता है। सम्प्रेषण को सन्देशवाहन, सम्प्रेषण अथवा संवहन आदि समानार्थी शब्दों से पुकारा जाता है।
सम्प्रेषण विचारों के आदान-पद्रान की ऐसी प्रणाली है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है, उसके विचार समझ सकता है तथा दूसरे को अपने बारे में या अपने विचारों से अवगत करा सकता है। इस प्रकार, सम्प्रेषण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे एक व्यक्ति को किसी वक्ता के विचार अन्य व्यक्ति के समक्ष, उसी रूप में जिसमें कि वक्ता चाहता है, प्रस्तुत करने की प्रेरणा प्राप्त होती है। औद्योगिक सम्प्रेषण किसी औद्योगिक इकाई में विभिन्न स्तरों पर कार्यरत मानव संसाधनों के मध्य औद्योगिक मुद्दों अथवा उत्पादन एवं आपूर्ति प्रणाली से सम्बन्धित सभी मामलों पर यथा जरूरत विचारों, सूचनाओं एवं निर्देशों का आदान-प्रदान है।
• "सम्प्रेषण का अर्थ किसी अन्य या आदान-प्रदान के विचारों या जानकारी को देने के लिए करना
है। " वेबस्टर
• "सम्प्रेषण दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा तथ्यों, विचारों या भावनाओं का आदान-प्रदान है।" डब्ल्यू एच न्यूमैन और सी एफ जूनियर
• "सम्प्रेषण अपने सबसे सरल रूप में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति की जानकारी का संदेश देता है।"
हडसन
• "सम्प्रेषण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को जानकारी और समझ को पारित करने की प्रक्रिया है।"
कीथ डेविस
• "सम्प्रेषण एक सतत और सोच प्रक्रिया है जो विचारों तथ्यों और कार्यों के पाठ्यक्रमों को
समझने के साथ संचरण और विनिमय के साथ काम करता है।" जॉर्ज आर टेरी
• "सम्प्रेषण प्रतीकों, शब्दों, चित्रों, आंकड़ों ग्राफ इत्यादि के उपयोग से सूचना, विचार, भावनाओं, कौशल इत्यादि का संचरण है। यह परिवर्तन या कार्य की प्रक्रिया है जिसे आम तौर पर सम्प्रेषण कहा जाता है। "बेरेलो और स्टीनर
इस प्रकार सम्प्रेषण एक व्यक्ति से दूसरी तरफ जानकारी और समझ को पारित करने की प्रक्रिया है, जिसमें तीन पक्ष हैं:
(i) विषय-वस्तु या संदेश का प्रसारण,
(ii) सम्प्रेषण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो पक्षों की भागीदारी, और
(iii) जिस व्यक्ति को संदेश प्रेषित किया जाता है वह उसी अर्थ में समझता है जिसमें संदेश प्रेषक उसे समझना चाहता है।
हैरोल्ड डी लॉस के अनुसार, सम्प्रेषण के एक अधिनियम का वर्णन करने का एक सुविधाजनक तरीका निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर देना है:
• कौन
• क्या कहता है।
• कौन से माध्यम से
● किसको
• क्या प्रभाव के साथ
Who
Communicator
Says What
Message
In Which Channel
Medium
To Whom
Receiver
With What |Effect?
Reaction
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