उद्यमी पर नई विचारधारा - New Idea on Entrepreneur

उद्यमी पर नई विचारधारा - New Idea on Entrepreneur


श्री आर. ए. शर्मा के अनुसार, उद्यमी वह व्यक्ति है जो अपने वातावरण से नई परिस्थितियों की पहचान कर उनका मूल्यांकन करता है तथा आर्थिक तंत्र में उन्हें समायोजित करने का निर्देश देता है।" इसके लिए वह किसी उद्यम की कल्पना करते हुए, योजना को वास्तविक का रूप प्रदान करने के लिए व्यापक साहस, चरित्र बल व निष्ठा प्रदर्शित करते हुए, इस प्रक्रिया में निम्न में किसी किन्हीं कार्यों को करता है:


(i) लाभप्रद निवेश के अवसरों की पहचान करना,


(ii) परियोजना को मूर्त रूप देने हेतु निर्माण उपक्रम / परियोजना आरंभ करने पर विचार करना,


(iii) आवश्यक औद्योगिक लाइसेंस प्राप्त करना,


(iv) आरंभिक पूंजी जुटाना,


(v) वित्तीय संस्थानों को व्यक्तिगत गांरटी प्रदान करना,


(vi) पूंजी में कमी की राशि को पूरा करने का वचन देना तथा


(vii) तकनीकी ज्ञान की पूर्ति करना


उपरोक्त वर्णित परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि उद्यमी अर्थव्यवस्था में परिर्वतन एवं विकास के लिए महत्वपूर्ण एजेंट हैं।

वे किसी भी कार्यवाहीं के लिए शुरूआत करने तथा उसके पश्चात् अपने कार्यों द्वारा अर्थव्यवस्था में सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन लाने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। वे न केवल उत्पादन के संसाधनों को इक्ट्ठा करके उनका उचित उपयोग करते हैं बल्कि वे अपनी गतिविधियों से आर्थिक विकास की सीमाओं का भी विस्तार करते हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि एक बड़ी संख्या में उपलब्ध परिभाषाओं के उपलब्ध होने के पश्चात् भी 'उद्यमी' शब्द की स्पष्ट परिभाषा पर अभी भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। वर्तमान समय में उद्यमी की कोई भी सार्वभौमिक परिभाषा उपलब्ध नहीं है।


किलबे लिंकन ने उद्यमी शब्द को एक बहुत बड़े जानवर के साथ जोड़ा है, जिसके बारे में बहुत से व्यक्तियों का दावा है कि उन्होंने इसका शिकार किया था परंतु इनमें से कोई भी उसे पकड़ने में समर्थ नहीं हुआ सभी व्यक्ति उसकी विशेषताओं का वर्णन अपने-अपने अनुभव के अनुसार करते हैं, परंतु कोई समान्य रूप से स्वीकृत जानकारी उसके बारे में उपलब्ध नहीं है तथा सभी अपने-अपने अनुसार ही उसे परिभाषित करते है।