उद्यमिता विकास कार्यक्रम के उद्देश्य - Objectives of Entrepreneurship Development Program
उद्यमिता विकास कार्यक्रम के उद्देश्य - Objectives of Entrepreneurship Development Program
उद्यमिता विकास कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यम स्थापित करने, उसका प्रबंध करने तथा उसे संचालित करने के लिए संभावित उद्यमियों को प्रशिक्षित करना तथा उनमें आवश्यक योग्यता का विकास करना होता है। यह प्रबंधकीय विकास की तुलना में एक नई तथा आधुनिक अवधारणा मानी जाती है। NIESBUD द्वारा गठित विशेषज्ञ समूह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उद्यमिता विकास के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उद्यमियों को यह विभिन्न प्रकार से सहायक होना चाहिए। ऐसा कार्यक्रम उनके अनुसार, उद्यमियों को निम्न प्रकार से सहायक होना चाहिए:
(i) अपने उद्यमिता के गुण को और विकसित एवं मजबूत करने में।
(ii) लघु व्यवसाय स्थापित करने के लिए पर्यावरण का विश्लेषण करने में।
(iii) परियोजना / उत्पादन का चयन करने के लिए।
(iv) परियोजना बनाने में।
(v) लघु उद्यम को स्थापित करने की प्रक्रिया एवं विधि को समझने में।
(vi) उद्यम को शुरू करने के लिए आवश्यक सहायक स्रोतों के बारे में।
(vii) आवश्यक प्रबंधकीय कौशल हासिल करने में।
(viii) उद्यमी के पेशे के लाभ एवं हानियों के पक्ष को जानने में।
(iv) सामाजिक उत्तरदायित्व को समझने व निभाने में।
उरोक्त वर्णित उद्देश्यों के अतिरिक्त उद्यमिता विकास कार्यक्रम के आधारभूत उद्देश्य इस प्रकार से हैं:
(1) उद्यमिता अभिप्रेरण विकसित करना इसके द्वारा विभिन्न प्रतिभागियों में उपलब्धि प्राप्ति की इच्छा को जागृत तथा विकसित करने का प्रयास किया जाता है। इसमें प्रतिभागियों में व्यवसाय के प्रति सकारात्मक सोच तथा इसे करने के लिए आत्मविश्वास को भी विकसित करने का प्रयत्न किया जाता है। उनके प्रेरणा के स्तर को अधिकतर स्तर तक पहुँचाने का प्रयास भी इसमें शामिल है। अभिप्रेरण आंतरिक, बाहरी, वित्तीय या गैर-वित्तीय हो सकता है। यह कार्यक्रम ऊर्जा को क्रियान्वित एवं विकसित करने एवं दिशा देने का भी कार्य करता है।
इसका मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण तथा विकास कार्यक्रम के पश्चात उद्यमियों को अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए तैयार करना होता है।
(2) वातावरण का विश्लेषण करना: इन कार्यक्रमों के अंतर्गत व्यावसायिक वातावरण के लिश्लेषण का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। वे सभी कारक तत्व जो व्यवसाय को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं, जैसे- सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, वैधानिक, व्यक्तिगत आदि, इन सब को समझाने का प्रयास किया जाता है। इसमें प्रतिभागी / सम्मिलित उद्यमी इनको समझाने का प्रयास किया जाता है। इससे प्रतिभागी / संभावित उद्यमी इनको समझने तथा आवश्यकतानुसार उनका विश्लेषण भी सीखते हैं। इसका लाभ उन्हें बाद में व्यावसायिक अवसरों को पहचानने तथा प्रतिस्पर्धा का सामना करने में भी सहायक होता है।
(3) परियोजना का चयन एक उद्यमी के लिए प्रमुख समस्या परियोजना तथा उत्पादन का चयन करना होता है। यह निर्णय अत्यंत सावधानीपूर्वक लिया जाना होता है। इसका मुख्य कारण यह होता है कि उद्यमी भविष्य में अपने समस्त प्रयास उसी परियोजना के लिए ही करता है। उद्यमिता विकास कार्यक्रमों द्वारा उद्यमी को इस संदर्भ में मार्गदर्शन दिया जाता है तथा परियोजना तथा उत्पादन के चयन के दौरान आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए भी उन्हें तैयार किया जाता है।
(4) परियोजना रिपोर्ट तैयार करना परियोजना रिपोर्ट तैयार करना प्रत्येक उद्यम का एक प्रमुख कार्य होता है। किसी भी उद्यम की स्थापना की प्रारंभिक अवस्था में यह रिपोर्ट तैयार की जाती है
तथा इसका अपना महत्त्व भी होता है उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के द्वारा उद्यमी को परियोजना रिपोर्ट तैयार करना भी सिखाया जाता है।
(5) प्रबंधकीय कला का ज्ञान प्रत्येक छोटे या बड़े व्यवसाय को चलाने के लिए प्रबंधकीय कौशल की आवश्यकता होती है। इससे उद्यम को अपने व्यवसाय को सुगमता तथा सफलता से चलाने में सहायता मिलती है। उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रबंधकीय कलाओं की जानकारी प्रदान करना भी होता है।
(6) समर्थन प्रणाली तथा प्रक्रिया उन्नयन इन कार्यक्रमों का उद्देश्य उद्यमी को छोटे व्यवसाय स्थापित करने में सहायता करने वाली तथा विभिन्न प्रकार के समर्थन देने वाली सरकारी संस्थाओं एवं एजेंसियों के बारे में भी जानकारी प्रदान करना होता है।
ये संभावित उद्यमियों को सहायता एवं समर्थन प्राप्त करने के लिए की जाने वाली आवश्यक औपचारिकताओं के बारे में अवगत करवाते है।
(7) व्यवसाय के बारे में व्यापक दृष्टिकोण का विकास इस प्रकार के कार्यक्रम संभावित उद्यमियों को विशेषतौर पर युवा एवं महिला वर्ग, स्वरोजगार से प्राप्त होने वाली लाभों की जानकारी देते हैं। ये उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित करते है। ये उद्यमियों को अपने लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। ये व्यवसाय के बारे में व्यापक दृष्टिकोण का विकास करते हैं। इनके अन्य उद्देश्य संभावित उद्यमियों को उद्यमिता की जानकारी देना, व्यवसाय को प्रभावित करने वाले तत्त्वों की जानकारी देना, व्यावसायिक उद्यमिता की आर्थिक विकास में भूमिका, उद्यमिता व्यवहार का विकास, व्यवसाय स्थापित करने की प्रक्रिया आदि भी होते हैं।
(8) परियोजना योग्यता का अध्ययन किसी भी परियोजना को स्थापित करने में पहले विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करना एक जटिलतापूर्ण तथा अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य माना जाता है। ऐसे कार्यक्रम उद्यमियों को परियोजना विश्लेषण की तकनीकी पहलुओं से अवगत कराते हैं जिससे कि वे परियोजना के विपणन, तकनीकी, वैधानिक तथा सामाजिक तत्त्वों के संदर्भ विश्लेषण कर सकें। इससे उद्यमिता को परियोजना का विश्लेषण करके उसका संभावित भविष्य जानने में बहुत मदद मिलती है।
कुल मिलाकर उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों प्रशिक्षण पूरा हो जाने के पश्चात अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए तैयार करना होता है। इन उद्देश्यों को एक अन्य प्रारूप से भी वर्णित किया जा सकता है। इन उद्देश्यों को दो श्रेणियों अल्प अवधि के उद्देश्य तथा दीर्घकाल के उद्देश्य में विभाजित किया जा सकता है। इनका वर्णन इस प्रकार है:
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