कंपनियों के अन्य भेद - Other Distinctions of Companies

कंपनियों के अन्य भेद - Other Distinctions of Companies


कंपनी अधिनियम में निदिष्ट कंपनियों के कुछ अन्य भेद निम्नलिखित हैं:


1. धर्मार्थ उद्देश्य या बिना लाभ वाली कंपनियाँ :- धर्मार्थ उद्देश्य वाला कंपनियों का पंजीकरण भी अन्य कंपनियों के समान कंपनी अधिनियम के अंतर्गत ही कराया जाता है परन्तु इसके पंजीकरण से पहले केन्द्र सरकार से एक लाइसेन्स प्राप्त करना होता है। यदि व्यक्तियों को कोई समूह


→ वाणिज्य, कला, विज्ञान, खेल-कूद, शोध सामाजिक कल्याण, धर्म, दान-पुण्य, पर्यावरण संरक्षण, अथवा किसी उपयोगी उद्देश्य को प्रोत्साहन देने के लिए आरंभ किया जाने वाला है, तथा


→ उसके लाभ, यदि कोई हो, का उपयोग सदस्यों को लाभांश के रूप में भुगतान करने के बजाय उसके उद्देश्यों को प्रोत्साहन देने के लिए ही किया जाने वाला है, तो केन्द्र सरकार ऐसे संगठन को लाइसेन्स प्रदान करती है। 


इसके बाद वह संगठन अपने को सीमित दायित्व वाली कंपनी के रूप में पंजीकृत करा सकता है। इस प्रकार की कंपनियों को यह छूट रहती है कि वे अपने नामों के साथ लिमिटेड' अथवा 'प्राइवेट लिमिटेड' शब्दों का प्रयोग न करें। केन्द्र सरकार द्वारा ऐसे लाइसेन्स की ऐसी कंपनियों के पंजियन के लिए निर्धारित की जाने वाली नियम व शर्तों के अधीन जारी किया जाता है। पंजीयोजन हो जाने पर इस कंपनियों को कुछ छूटें मिलती है तथा कुछ प्रतिबंध भी लगाये जाते हैं।


2. विदेशी कंपनी : विदेशी कंपनी का अभिप्राय एक ऐसी कंपनी अथवा समामेलितनिकाय से है जिसका समामेलन भारत से बाहर हुआ तथा


→ भारत में जिसके व्यवसाय का स्थान हो जहाँ से व्यवसाय इसके स्वयं द्वारा या एजेन्ट के माध्यम से, भौतिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक पद्धति द्वारा संचालित हो सकता हैं, एवं


→ जो किसी अन्य तरीके से भारत में कोई व्यावसायिक कार्य करती थे।


3. सरकारी कंपनी कंपनी अधिनियम की धारा 2(45) के अनुसार, "सरकारी कंपनी का आशय एक ऐसी कंपनी से है जिसकी प्रदत्त शेयर पूँजी का कम से कम 51 प्रतिशत भाग केन्द्र सरकार या किसी एक या अधिक राज्य सरकारों या अंशत: केन्द्र सरकार तथा अंशत: एक या अधिक राज्य सरकारों के पास है।"

इसके अंतर्गत उन कंपनियों को भी सम्मिलित किया जाता है. जो सरकारी कंपनी की सहायक होती है।


4. नियंत्रक कंपनी एवं सहायक कंपनी जब एक कंपनी का किसी अन्य कंपनी के प्रबंधन पर नियंत्रण होता है तो नियंत्रण करने वाली कंपनी नियंत्रककंपनी' कहलाती है तथा नियंत्रित कंपनी *सहायक कंपनी' कहलाती है।


नियंत्रण कंपनी- कंपनी अधिनियम की धारा 2 (46) के अनुसार, "एक या अधिक अन्य कंपनियों के संबंध में नियंत्रक कंपनी या आशय उस कंपनी से है जिसकी अन्य कंपनियाँ सहायक कंपनिया हैं।"


सहायक कंपनी- कंपनी अधिनियम की धारा 2 (87) के अनुसार, “किसी अन्य कंपनी (नियंत्रण कंपनी) के संबंध में सहायक कंपनी का आशय एक ऐसी कंपनी से है जिसमें नियंत्रक कंपनी" → संचालन मंडल के गठन पर नियंत्रण करती है; अथवा → या तो स्वयं या अपनी एक था अधिक कंपनियों के साथ मिलकर कुल शेयर पूँजी के आधे से अधिकपर नियंत्रण करती है।


5. सहयोजित कंपनी सहयोजित कंपनी की अवधारणा कंपनी अधिनियम, 2013, द्वारा दी गई है। कंपनी अधिनियम की धारा 2 (6) कके अनुसार, “एक अन्य कंपनी के संबंध में सहयोजिता कंपनी का आशय एक ऐसी कंपनी से है जिसमें उस अन्य कंपनी का महत्वपूर्ण प्रभाव हो, लेकिन ऐसा प्रभाव रखने वाली कंपनी की वह सहायक कंपनी नहीं है तथा इसमें संयुक्त उद्यम कंपनी भी शामिल है।"


6. लघु कंपनी - कंपनी अधिनियम, 2013 ने निजी कंपनी के उप-वर्ग के रूप में "लघु कंपनी" को जन्म दिया है। कंपनी अधिनियम की धारा 2 (85) के अनुसार, "लघु कंपनी से तात्पर्य, सार्वजनिक कंपनी की छोड़कर ऐसी कंपनी से है।"


→ जिसका प्रदत्त शेयर पूँजी 50 लाख रूपये से अधिक नहीं है या उस उच्चतर रकम से, जो निर्धारित की जाये अधिक नहीं है, जो 5 करोड से अधिक नहीं होगी, अथवा


→ जिसका विगत लाभ-हानि लेखे के अनुसार टर्नओवर 2 करोड रूपये से अधिक नहीं है या उस उच्चतर रकम से, जो निर्धारित की जाये, अधिक नहीं है, जो 20 करोड़ से अधिक नहीं होगी।


7. निष्क्रिय कंपनी कंपनी अधिनियम की धारा 455 के अनुसार, "एक ऐसी कंपनी जिसका निर्माण एवं पंजीकरण अनुबंध अधिनियम 2013 के अंतर्गत किसी भावी परियोजना के लिए अथवा किसी संपत्ति या बौद्धिक संपदा को प्राप्त करने के लिए होता है

और जिसने कोई महत्त्वपूर्ण लेखांकन व्यवहार नहीं किया है तो उसे एक निष्क्रिय कंपनी की हैसियत प्राप्त करने के लिए रजिस्ट्रार को आवेदन दे सकती है।"


प्रत्येक निष्क्रिय कंपनी में अपनी निष्क्रिय प्रस्थिति बनाए रखने के लिए यथानिर्धारित न्यूनतम संस्था में संचालक होने आवश्यक होंगे प्रथा ऐसी कंपनी को निर्धारित प्रपत्रोंको फाइल करना होगा तथा वार्षिक मुल्क जमा करना होगा। यदि निष्क्रिय कंपनी निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है तो रजिस्ट्रार द्वारा निष्क्रिय कंपनियों वाले रजिस्टर से ऐसी कंपनी का नाम हटा दिया जायेगा। निष्क्रिय कंपनी निर्धारित प्रपत्रों एवं शुल्क के साथ आवेदन पत्र देकर सक्रियकंपनी बन सकती है।