अल्पसंख्यकों की सुरक्षा - protection of minorities

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा - protection of minorities


फॉस बनाम हारबोटल के बाद में प्रतिपादित सिद्धांत से यह स्पष्ट हो जाता है कि बहुसंख्यकों के निर्णय कंपनी पर बाध्यकारी होते हैं और अल्पसंख्यकों की, चाहे उनकी संख्या 491 भी हो कंपनी के नियंत्रण एवं प्रबंधन के मामलों में कोई सुनवाई नहीं होती है। ऐसी स्थिति में खतरे भी हो सकते हैं। यदि बहुसंख्यक सदस्य दुष्ट हैं और वे वस्तुतः पूरी कंपनी के हित में कार्य नहीं करते तो फॉस बनाम हारबोटल के सिद्धांत को पूरी तरह लागू करने पर बहुसंख्यक अल्पसंख्यकों का शोषण कर सकते हैं और इसके विरूद्ध अल्पसंख्यक कोई कार्यवाही नहीं कर सकते। न्याय की दृष्टि से बहुसंख्यकों की सर्वोपरिता के सिद्धांत के कुछ अपवाद स्वीकार किए गए हैं।