संचालकों की योग्यताएं , अयोग्यताएं - Qualifications, Disqualifications of Operators

संचालकों की योग्यताएं , अयोग्यताएं - Qualifications, Disqualifications of Operators


कंपनी अधिनियम में सचालक के लिए कोई क्षैणिक अथवा शेयरधारण संबंधी योग्यताएं निर्धारित नहीं की गई है। किसी कंपनी का संचालक बनने के लिए उसका शेयरधारी होना अनिवार्य नहीं है बशर्ते कंपनी की अंतर्नियमावली में अन्यथा व्यवस्था न की गई हो। किन्तु आर्थिक चातुरी की दृष्टि से यह आवश्यक है कि संचालकों का कुछ पैसा भी कंपनी में विनियोजित रहे । इसलिए अंतर्नियमावली में सामान्यत: संचालको के लिए कुछ योग्यता शेयरोंकी व्यवस्था की जाती है। ऐसे योग्यता शेयरों का अंकित मूल्य कम रखना चाहिए ताकि एक साधारण शेयरधारक भी संचालक बनने के बारे में सोच सके।


संचालकों की अयोग्यताएं


1) जिसे विकृत मस्तिष्क का घोषित कर दिया गया हो :


2) जो दायित्वमुक्त दिवालिया न हो;


3) जिसने दिवालिया घोषित किए जाने के लिए आवेदन दे रखा हो:


4) जिसे न्यायालय न नैतिक अपराध के लिए दोषी ठहराया हो और कम-से-कम छः मास के करावास का दंड दिया हो और दंड की समाप्ति की तारीख से अभी पाँच वर्ष या अधिक के कारावास की सजा हुई हो


5) जिसने कोई अपराध किया हो तथा जिसके संबंध में 7 वर्ष या अधिक के करावास की सजा हुई हो।


6) जिसने अपने शेयरों पर मांगी गई राशि छः मास तक अदा न की हो;


7) जिसे न्यायालय या ट्रिब्यूनल ने संचालक के रूप में नियुक्त करने के अयोग्य होने का आदेश दिया हो तथा ऐसा आदेश प्रभावशाली हो;


8) जिसे विगत 5 वर्षों के दौरान किसी भी समय धारा 188 के अधीन संबद्ध पक्षकार संव्यवहार' के संबंध में अपराध करने का देषी माना गया हो;


9) जिसने धारा 152 (3) के प्रावधानों का पालन न किया हो, अर्थात् 'संचालक पहचान संख्या आबंटित न कराई हो;


10) जो एक ऐसा सार्वजनिक कंपनी का पर्वतः संचालक रहा है या संचालक है जिसने:


क) कंपनी रजिस्टार के पास किन्हीं लगातार तीन वित्तीय वर्षों के लिए वित्तीय विवरण और वार्षिक विवरणियां फाइल नहीं की है, या


ख) अपने निक्षपों या उन पर अर्जित ब्याज का देय तिथि को भुगतान करने या अपने ऋणपत्रों या उन पर अर्जित ब्याज का देय तिथि को अदायगी करने या उन पर अर्जित ब्याज का देय तिथि को अदायगी करने या घोषित लाभांश का भुगतान करने में त्रुटि की हो और ऐसी त्रुटि एक वर्ष या अधिक के लिए चलती रही हो;


ऐसा संचालक चूक की तिथि से 5 वर्ष तक उस कंपनी में संचालक के रूप में पुनः नियुक्त होने या अन्य कंपनी में सचालक के रूप में नियुक्त किए जाने योग्य नहीं होगा।