अनुसमर्थन (Ratification) भी संभव नहीं - Ratification is also not possible

अनुसमर्थन (Ratification) भी संभव नहीं - Ratification is also not possible


समामेलन से पूर्व किए, गये संविदों को, कंपनी समामेलन के बाद अनुसमर्थन करके भी नहीं अपना सकती, क्योंकि अनुसमर्थन का सिद्धांत केवल उसी स्थिति में लागु होता है जब एजेंट किसी ऐसे प्रधान की ओर से संविदा करता है जिसका अस्तित्व है तथा जो एजेंट द्वारा उपर्युक्त संविदा किये जाते समय स्वयं भी संविदा करने में सक्षम था।


अनन्तिम संविदे


अनन्तिम संविदे वे संविदे होते थे जो समामेलन बाद और व्यवसाय प्रारंभ करने का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने से पहले किये जाते थे।

इन संविदों के लिए भी कंपनी को वैधानिक रूप से दायी नहीं ठहराया जा सकता था क्योंकि जब तक कंपनी को व्यवसाय प्रारंभ करने का प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता था कानून की दृष्टि में ये अनन्तिम संविदे ही माने जाते थे और कंपनी पर आबद्धकारी नहीं होते थे।

कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2015 द्वारा धारा 11 को हटाकर व्यवसाय को प्रारंभ करने के प्रमाण पत्र को प्राप्त करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया जिसके कारण अब कोई अनन्तिम संविदा नहीं हो सकता।