प्रभारों का पंजीकरण - registration of charges
प्रभारों का पंजीकरण - registration of charges
अधिनियम की धारा 77 के अनुसार, कंपनी द्वारा अपनी संपत्ति या आस्तियों या उपक्रमों, चाहे भारतमें स्थितहो या भारत के बाहर पर सृजित प्रत्येक प्रभार का कंपनी रजिस्ट्रार के पास अनिवार्यतः पंजीकरण कराना चाहिए। प्रभार का निर्धारित विवरण तथा इसको सृजित करने वाला प्रपत्र अथवा इसकी एक प्रमाणित प्रति प्रभार सृजितकरने के 30 दिन के भीतर पंजीकरण के सलिए रजिस्ट्रार के पास दाखिल किए जाने चाहिए। यदि कंपनी निलंब के पर्याप्त कारण बताकर रजिस्ट्रार का विश्वास दिलाए तो वह 30 दिन की उक्त अवधि के अतिरिक्त शुल्क देकर 300 दिन तक करा सकता है।
धारा 77 (2) के अनुसार, रजिस्ट्रार प्रभार के पंजीयन के बाद ऐसे पंजीयन का प्रमाण-पत्र कंपनी तथा उस व्यक्ति को देगा जिसके पक्ष में ऐसा प्रभार उत्पन्न किया गया हो। धारा 78 के अनुसार,
यदि विहित अवधि के भीतरकंपनीद्वाराप्रभार का पंजीयन नहींकराया जाता तो उस लेनदार के आवेदन पर भी पंजीयन किया जा सकता है जिसके पक्ष में प्रभार किया गया हो तथा ऐसा लेनदार कंपनी से पंजीकरण शुल्क वसूल कर सकता है।
प्रभारी की सूचना की तिथि :- अधिनियम की धारा 80 के अनुसार, यदि कंपनी की किसी संपत्ति पर ऐसे प्रभार पंजीकृत कर दिया गया है जिसका पंजीकृत होना धारा 77 के अधीन आवश्यक है, तो यह मान लिया जायेगा कि ऐसी संपत्ति अथवरा इसके किसी भाग को प्राप्त करने वाली व्यक्ति को पंजीकरण की तिथि से उपर्युक्त प्रभार की सूचना थी।
पंजीकरण न करने का प्रभाव :- कोई पंजीकरण योग्य प्रभार विहित अवधि के भीतर पंजीकृत न कराने के निम्नलिखित परिमणाम होंगे :
i) कंपनी के समापन और लेनदारों के विरूद्ध प्रभा शून्य होगा।
ii) जिस ऋण के संबंध में प्रभार दिया गया हो वह ऋण अरक्षित ऋण के रूप में वैद्य रहता है। कंपनी तथा त्रुटि करने वाले अधिकारी पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। त्रुटि करने वाले अधिकारी को 6 माह तक का कारावास भी हो सकता है।
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