द्वितीयक संग्रहण - secondary storage

द्वितीयक संग्रहण - secondary storage


यह एक स्थाई संग्रहण युक्ति है। इसमें संग्रहित डेटा तथा प्रोग्राम्स कम्प्यूटर के ऑफ होने के बाद भी इसमे स्थित रहते है।


मैगनेटिक टेप


डाटा को स्थाई तौर पर संग्रहित करने वाले उपकरणों में मैगनेटिक टेप का नाम प्रमुखता से आता है। इसका इस्तेमाल अधिक मात्रा में डाटा को संग्रहित करने के लिए किया जाता है। इसमें ½ इन्च चौड़ाई या 1/4 इन्च चौड़ाई वाली प्लास्ट्रिक की बिना जोड़ वाली लम्बी पट्टी होती है। जिसकी लम्बाई सामान्यतया 50 - 2400 फीट होता है। जिस पर आयरन ऑक्साइड या क्रोमियम डाई ऑक्साइड की परत चढ़ाई जाती है। इस पट्टी को ही हम टेप कहते हैं।


टेप पर डाटा लिखने के लिए टेप पर मेग्नेटाइज्ड या नॉन मैग्नेटाईज्ड बिन्दु अंकित होते है जो दिखाई नहीं देते है। एक अक्षर के लिए 7 बिट या 9 बिट कोड प्रयोग में लाया जाता है। मैग्नेटाइज्ड एवं नॉन मैग्नेटाइज्ड बिन्दुओं की कतारें टेप की लम्बाई के समानान्तर बन जाती है। इन्हें हम Tracks कहते हैं


मैगनेटिक डिस्क


मैग्नेटिक डिस्क बहुत लोकप्रिय द्वितीयक संग्राहक है इसमें डाटा को लिखने और पढ़ने की विधि यादृच्छिक अभिगम है। मैग्नेटिक डिस्क मे पतली गोलाकार पट्टी है जिसके दोनो तरफ़ पर आयरन ऑक्साइड या क्रोमियम डाई ऑक्साइड की परत चढ़ाई जाती है।

इस पर डाटा दिखाई न देने वाले मेग्नेटाइज्ड और नॉन मैग्नेटाईज्ड बिन्दुओं (जो और 0 को प्रतिनिधित्व करता है। ) से किया जाता है। इस पर किसी प्रकार के एन्कोडिंग (ASCII, UNICODE,EBCDIC) डाटा को लिखा जा सकता है। डिस्क को एक कंटेनर में एक के उपर एक करके रखा जाता है। सभी डिस्कों के बने इस माध्यम को डिस्क पैक कहते हैं। प्रायः सबसे ऊपरी तथा सबसे निचली सतह पर डाटा नहीं लिखा जाता है। इस ड्राइव में रीड व राइट हेड लगे होते हैं जिससे डाटा लिखा और पढ़ा जाता है। ये डाटा को Tracks के रूप में डिस्क पैक पर लिखते हैं।


फ्लॉपी डिस्क


एक लचीली प्लास्टिक शीट के ऊपर मैग्नेटिक ऑक्साइड की कोटिंग करके इसे तैयार किया जाता है। इसमे डाटा संग्रहण की क्षमता कम होती है

इसी कारण इसकी कीमत कम होता है। इसके एक रीड / राइट हेड होता है जो फ्लॉपी की सतह से स्पर्श करके डाटा लिखता व पढ़ता है। फ्लॉपी का उपयोग एक कंप्यूटर से डाटा को दूसरे कंप्यूटर तक ले जाने में किया जाता है। इसे कंप्यूटर में जरूरत पड़ने पर लगाया या निकला जा सकता है इसी कारण इसे रिमूवेबल स्टोरेज कहा जाता है।


फ्लॉपी डिस्क दो आकार के होते है


3 1/2 इंच फ्लॉपी डिस्क


इस फ्लॉपी डिस्क में डाटा संग्रहण की क्षमता 1.4 MB होती है।


5 1/2 इंच फ्लॉपी डिस्क


इस फ्लॉपी डिस्क में डाटा संग्रहण की क्षमता 1.2 MB होती है।


ऑप्टिकल डिस्क


मैग्नेटिक डिस्क और मैग्नेटिक टेप के तुलना में ऑप्टिकल डिस्क का उपयोग अधिक होता है। इसे भी रिमूवेबल स्टोरेज श्रेणी में रखा जाता है। इसका उपयोग फ्लॉपी के भाति कंप्यूटर से डाटा स्थान्तरण के लिए किया जाता है। इसकी डाटा संग्रहण क्षमता 500 MB से 4 GB तक होता है। इसमें डाटा संग्रहण के लिए प्रकाशीय गुणों का उपयोग किया जाता है।


ऑप्टिकल डिस्क कई प्रकार के होते है जैसे-


सी.डी-रोम (CD-ROM), एक बार लिखे कई बार पढ़े WORM (Write Once Read Many), सी.डी-आर डब्लू ( CD-RW), डी.वी.डी (DVD)


सी.डी-रोम (CD-ROM)


CD-ROM का पूर्ण रूप compact Disk Read Only Memory है। सी.डी-रोम की आकर 5 1/4 इंच होता है जिसमे 650 MB से 700 MB तक के डाटा को संग्रहण किया जा सकता है । इतने छोटे आकर के डिस्क में अधिक मात्रा में डाटा संग्रहण होने के कारण इस का नाम सघन डिस्क हैं।

यह डिस्क पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक पदार्थ से बना है इस पर अलुमिनियम की पतली परत चढाई गई होती है जिससे इसकी सतह प्रकाश का परावर्तक बन जाता है। 120 मिली मीटर व्यास के डिस्क को मिनी सी. डी। कहा जाता है। जिसकी संग्रहण क्षमता लगभग 184 MB होता है। सी.डी रोम में सूचनाएँ पूर्ववत रिकॉर्ड किया होता है जिसे केवल पढ़ कर उपयोग में लाया जा सकता है।


लेकिन इसमें फिर नए जानकारी संग्रहित या उपलब्ध जानकारी को परिवर्तित भी नहीं किया जा सकता है अतः इसे रीड ओनली मेमोरी कहा जाता है।


WORM (Write Once Read Many) :


इसके माध्यम से प्रयोक्ता अपनी डिस्क बना सकता है जिसमे वो अपनी आवश्यकता के अनुसार चीजों को रख कर सी.डी बना सकता है। इसके लिए उसे सी. डी आर (CD-Recordable) ड्राइव की आवस्यकता होती है। सी.डी आर (CD-Recordable) ड्राइव के माध्यम से WORM डिस्क पर सूचनाओं को अंकित किया जा सकता है। जैसा WORM डिस्क के पूर्ण रूप Write Once Read Many से पता चलता है कि इस तरह के डिस्क पर सूचनाओं को एक बार लिखा जा सकता है फिर उन सूचनाओं को बार बार सी. डी आर ड्राइव या सी.डी-रोम ड्राइव के माध्यम से पढ़ा जा सकता है | WORM डिस्क में मल्टी सेशन लिखने वाला डिस्क आता है जिसमे एक बार डिस्क में लिखने के बाद खाली स्थान पर फिर से लिखा जा सकता है लेकिन पूर्व में लिखे गए सूचनाओं को परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।


सी.डीआर/ डब्लू ( CD R/W) डिस्क :


सी.डी-आर/डब्लू ( CD R/W) डिस्क WORM डिस्क के जैसा ही होता है बस इसमें पूर्व में लिखे हुए सूचनाओं को फिर मिटाकर नए सूचनाओं को लिखने की सुविधा होती है। इस कारण सी. डी आर/ डब्लू ( CD R/W) डिस्क की कीमत अन्य डिस्क से अधिक होती है। इसमें पूर्व सूचनाओं को मिटने के लिए लेज़र किरण पुंज (Laser Beam) का सहारा लिया जाता है जो सी.डी । के सतह के रसायनिक गुणों को परिवर्तित कर देता है। एक सी.डी-आर/ डब्लू ( CD R/W) डिस्क में लगभग 100 बार सूचनाओं को लिखा या मिटाया जा सकता है।


डी.वी.डी. ( Digital video (or Versatile) Disk ) डिस्क 


डी.वी.डी का मुख्य रूप से मूवी को वितरित करने लिए डिजाईन किया गया था लेकिन जल्द ही इसका उपयोग अधिक मात्रा में डाटा संग्रहित करने के लिए किया जाने लगा है।

डी.वी.डी । सैदांतिक तौर पर सी. डी-रोम की तरह का होता है पर इसमें डाटा संग्रहण सघन होता है। डी.वी.डी। दो प्रकार के आते हैं सिंगल लेयर जिसकी धारिता 3.5 से 4.7 GB तक होता है डबल लेयर वाले डी.वी.डी की धारिता 8.5 GB तक होता है।


डी.वी.डी। ड्राइव भी कई प्रकार के होते है जैसे- डी.वी.डी। आर, डी.वी.डी। आर/ डब्लु, डी.वी.डी. विडियो और डी.वी.डी । - ऑडियो ।


डी.वी.डी। में काफी जगह होने के करण इसमें मूवी को बहुभाषी उप शीर्षक (Multilingual Subtitle) सुविधा के साथ रखा जा सकता है।

इसमें पूर्वक्त रिकॉर्ड मीडिया के पायरेसी को रोकने के लिए सुरक्षा तकनीक को समर्थन करता है जिससे डी.वी.डी । की सूचनाओं को प्रतिलिपि बनाने से रोका जा सकता है।


फ़्लैश ड्राइव


फ़्लैश ड्राइव का आकर पेन के बराबर होने से इसे पेन ड्राइव भी कहा जाता है। यह विभिन्न आकर और आकर्षक डिजाईन में आता है। इसका उपयोग एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर में डाटा को स्थानातरण में किया जाता है। यह एक प्रकार का प्लग एन प्ले डिवाइस है। कंप्यूटर के USB पोर्ट में जोड़ने पर कंप्यूटर स्वतः इसे एक रिमूवेबल डिवाइस के रूप समझ जाता है

और इसमें से कंप्यूटर में और कंप्यूटर से इसमें किसी प्रकार के डाटा जैसे- ऑडियो, विडियो, फ़ाइल, एप्लीकेशन प्रोग्रामों का स्थान्तरण किया जाना संभव है। इसमें इलेक्ट्रिकली इरेजेबिल प्रॉम ( EEPROM) तकनीक का इस्तेमाल होता है। यह एक प्रकार का सेमी कंडक्टर पदार्थ से बना हुआ है। इसकी धारिता 512 MB, 1GB, 2GB, 4GB, 8GB, 16GB, 32GB और 64GB तक होती है।


मेमोरी कार्ड


यह भी फ़्लैश मेमोरी तकनीक पर आधारित मेमोरी कार्ड है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस में किया जाता है जैसे- कंप्यूटर, डिजिटल कैमरा, सेल फ़ोन इत्यादि ।


यह कई प्रकार के होते है जैसे- सिक्योर डिजिटल (SD Card) कार्ड, मल्टी मीडिया कार्ड (MMC) आदि।