नए व्यवसाय की स्थापना - setting up new business

नए व्यवसाय की स्थापना - setting up new business


परियोजना का अर्थ


परियोजना शब्द का सटीक अर्थ पहले से स्पष्ट रूप से परिभाषित उद्देश्यों, कार्यक्रमों तथा बजट के साथ तैयार की गई योजना से लिया जाता है। इसे एक वैज्ञानिक ढंग से तैयार की गई कार्य योजना भी कहा जा सकता है जिसके अंतर्गत एक निश्चित समय में पूर्व निश्चित उद्देश्यों को प्राप्त करने की योजना होती है। इस प्रकार एक परियोजना अपने आकार, प्रकृति तथा उद्देश्यों तथा जटिलताओं के कारण अलग-अलग होती है। इस प्रकार, एक परियोजना को एक स्पष्ट वर्णित योजना कहा जा सकता है जिसमें विभिन्न विकल्पों पर विचार करना, मुख्य मुद्दों को पहचानना, विस्तृत भागीदारी, विशेष एवं स्पष्ट तैयार योजनाएँ तथा इन सबको लागू करना शामिल है इसलिए परियोजना या नए व्यवसाय की कल्पना स्पष्ट, समय आने योग्य तथा उद्देश्यों की स्पष्टता जैसी विशेषताओं से परिपूर्ण होनी चाहिए ।


परियोजना का वर्गीकरण


विभिन्न विद्वानों द्वारा परियोजना शब्द को अलग-अलग तरह से परिभाषित किया गया है। सामान्य रूप से प्रत्येक परियोजना में तीन मुख्य बों होती हैं जैसे एक विशेष क्रिया, विशेष उद्देश्य, निश्चित समयावधि । परंतु यह भी एक स्वीकृत अवधारणा है कि प्रत्येक परियोजना के अपने कुछ विशेष लक्षण भी होते हैं । अतः परियोजना को विभिन्न आधारों पर भिन्न-भिन्न रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है। इनका विस्तृत विवरण यहाँ दिया जा रहा है:


1. मात्रात्मक एवं गैर-मात्रात्मक परियोजना इन दोनों तरह की परियोजना को लिटल तथा मिरलस द्वारा वर्णित किया गया था उनके अनुसार संख्यात्मक या मात्रात्मक परियोजना वे होती हैं

जिससे प्राप्त होने वाली लाभों का सफलतापूर्वक अनुमान लगाया जा सकता है तथा गैर संख्यात्मक या मात्रात्मक में ऐसा अनुमान लगाया जाना संभव नहीं होता है। विभिन्न परियोजनाएँ: जैसे -  औद्योगिक विकास, विद्युत उत्पादन, खनिज विकास आदि संख्यात्मक परियोजनाएँ होती है तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, सुरक्षा आदि से संबंधित परियोजनाएँ गैर-संख्यात्मक मानी जाती है।


2. सेक्टर - परियोजनाएँ देश के योजना आयोग द्वारा परियोजना को विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित करके वर्गीकृत किए जानेको स्वीकृति दी गई है। योजना आयोग के अनुसार एक परियोजना विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हो सकती हैं; जैसे


1. कृषि तथा संबंधित क्षेत्र


2. सिंचाई एवं विद्युत क्षेत्र


3. औद्योगिक एवं खनन क्षेत्र


4. यातायात एवं संचार क्षेत्र


5. सामाजिक सेवा क्षेत्र


6. मिश्रित क्षेत्र


इस तरह से परियोजनाओं का वर्गीकरण संसाधनों के उचित आवंटन एवं प्रयोग के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है।


3. तकनीकी आर्थिक परियोजनाएँ इस आधार पर परियोजनाएँ निम्न श्रेणियों में विभाजित की जा सकती है:


1. साधन उन्मुख साधनों की उन्मुखता के आधार पर परियोजनाएँ दो प्रकार की हो सकती हैं पूँजी उन्मुख तथा श्रम उन्मुख यदि परियोजना में अधिकतम पूँजी प्लांट एवं मशीनरी, भूमि, संयंत्रों आदि पर अधिक मात्रा में खर्च करनी पड़ती है तो इसे पूँजी उन्मुख परियोजना कहा जाता है। यदि परियोजना को स्थापित करने एवं संचालित करने के लिए मानवीय संसाधनों की अधिक संख्या में आवश्यकता होती है तो इसे श्रम उन्मुख परियोजना कहा जाता है।


2. कारण उन्मुख ये परियोजना उद्देश्य या कारण के आधार पर वर्णित की जाती है। ये माँग पर या कच्चे माल पर आधारित होती हैं। किसी विशेष माँग पर संबंधित परियोजना को माँग आधारित कहा जाता है। इसमें उन संबंधित माँगों को पूरा करने के लिए उद्यम की स्थापना की जाती है।

यदि परियोजना किसी विशेष कच्चे माल की उपलब्धता एवं विशेष कौशल वाले श्रमिकों की उपलब्धता पर आधारित हो तो इसे साधन संबंधी परियोजना कहा जाता है।


3. परिमाण उन्मुख इसे परियोजना में किए जाने वाले विनियोग की राशि की मात्रा के आधार पर परिमाण उन्मुख परियोजना कहा जाता है। इसमें विनियोजित होने वाली राशि के आधार पर परियोजनाएँ बड़े स्तर, मध्यम स्तर तथा लघु स्तर की श्रेणियों में विभाजित एवं परिभाषित की जाती है।


4. वित्तीय संस्थानों द्वारा वर्गीकरण राष्ट्रीय स्तर तथा राज्य स्तर पर कार्यरत अलग-अलग वित्तीय संस्थाएँ परियोजनाओं को उनकी समयावधि, उद्देश्य, आदि के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित करती हैं। इसके आधार पर परियोजना निम्न प्रकार की हो सकती हैं:


1. नई परियोजना


2. विस्तार परियोजना


3. आधुनिकीकरण परियोजना


4. विविधीकरण परियोजना


आमतौर पर ये सभी प्रकार की परियोजनाएँ लाभ कमाने के लिए स्थापित की जाती हैं।


5. अन्य कुछ अन्य सेवा क्षेत्र की परियोजनाएँ निम्न प्रकार की हो सकती हैं:


1. सामाजिक कल्याण परियोजना


2. सेना क्षेत्र परियोजना


3. शोध एवं विकास परियोजना


4. शैक्षणिक क्षेत्र परियोजना


इस प्रकार परियोजना के भिन्न-भिन्न प्रकार होते हैं। प्रत्येक परियोजना अपने-अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए तैयार की जाती है। परियोजना के उद्देश्य व्यावसायिक भी हो सकते हैं तथा सामाजिक भी। व्यावसायिक उद्देश्य का सीधा एवं साधारण उद्देश्य लाभ कमाना ही होता है तथा सामाजिक उद्देश्य में समाज सेवा या सामाजिक उत्तरदायित्व को भी उद्देश्यों में शामिल किया जाता है। एक परियोजना में व्यवसायी की पूँजी, श्रम, संसाधनों का निवेश होता है जिसके आधार पर ही वह उद्देश्य प्राप्त करने के प्रयत्न करता है। अतः व्यवसाय परियोजना के उद्देश्यों का निर्धारण करते समय उद्यमी को अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए।