अल्पकालीन वित्तीय साधन - short term financial instruments

अल्पकालीन वित्तीय साधन - short term financial instruments


दैनिक व्यावसायिक कार्यों के लिए भी वित्त आवश्यक होता है। दूसरे शब्दों में, उद्यम कार्यशील पूँजी की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अल्पकालीन वित्त प्राप्त किया जाता है। इसलिए वित्त के ऐसे साधनों को कार्यशील पूँजी अग्रिम भी कहा जाता है। कुछ मुख्य अल्पकालीन साधनों का उल्लेख इस प्रकार है:


(1) बैंक साधन


(2) गैर-बैंक साधन


(1) बैंक साधन :- अल्पकालीन वित्त प्रदान करने के लिए व्यापारिक बैंक सबसे महत्त्वपूर्ण साधन हैं। अल्पकालीन वित्त प्रदान करने के विभिन्न प्रारूपों का वर्णन इन प्रकार है:



(i) नकद साख: नकद साख एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत ऋणी को एक निश्चित सीमा तथा धन निकालने की सुविधा मिल जाती है। नकद साख की अधिकतम सीमा ऋणी की वित्तीय स्थिति तथा साख क्षमता या ऋणी द्वारा प्रदान की गई प्रतिभूति के आधार पर निर्धारित की जाती है। ऋणी बज चाहे, पूर्ण या आंशिक रूप से धन को वापिस कर सकता है। ब्याज के वल उस राशि पर वूसल किया जाता है जो वास्तव में ऋणी द्वारा निकाली गई है। लेकिन इस सुविधा के लिए बैंक न्यूनतम रकम चार्ज कर सकता है।


(ii) अधिविकर्ष: यह एक ऐसी अस्थायी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत उन ग्राहकों को जिनका बैंक में चालू खाता है एक निश्चित सीमा तक जमा से अधिक धन निकालने की सुविधा प्रदान की जाती है।

साधारणतया यह सुविधा बहुत ही अल्पकाल जैसे एक सप्तह या 15 दिन के लिए दी जाती है। अधिविकर्ष की सीमा का निर्धारण बैंक द्वारा किया जाता है तथा ग्राहक उस सीमा तक धन औपचारिकता के बिना निकाल सकता है। बैंक द्वारा ब्याज केवल निकाली गई राशि पर ही लिया जाता है तथा ब्याज की दर सावधि ऋणों की तुलना में अधिक होती है। यह सबसे सरल तथा सुविधाजनक वित्त का साधन है जिससे कार्यशील पूँजीकी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है।


(iii) बिलों को भुनना: यह बैंक द्वारा उधार देने की ऐसी विधि है जिसके अंतर्गत बैंक बिल के धारक को इसकी देय तिथि से पहले कटौती करके राशि दे देता है। देय तिथि पर बैंक इस बिल को इसके स्वीकर्ता के सामने प्रस्तुत करता है

तथा इसका भुगतान प्राप्त करता है। यदि बिल देय तिथि पर अप्रतिष्ठित हो जाता है तो बैंक कुल राशि उस ग्राहक से वसूल कर लेता है जिसने बिल को भुनाया था। (iv) साख पत्रः साख पत्र एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत बैंक अपने ग्राहकों को आपूर्तिकर्ताओं से उधार प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है। जब बैंक अपने ग्राहकों को किसी विशेष खरीद के लिए साख पत्र जारी करता है तो बैंक ग्राहक द्वारा त्रुटि की दशा में स्वयं भुगतान करने का उत्तरदायित्व लेता है।


(2) गैर-बैंक साधन : एसे वित्तीय साधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:


(i) व्यापार साख: व्यापार साख का आशय उस साख से है जो विक्रेताओं द्वारा अपने ग्राहकों को


व्यापारिक


परंपराओं के अनुसार प्रदान की जाती है। जब क्रय किए गए माल का भुगतान तुरंत न करके कुछ समय बाद किया किया जाता है तो यह एक अल्पकालीन वित्त का साधन बन जाता है। व्यापार साख की मात्रा उद्यम की साख क्षमता पर निर्भर करती है।


(ii) व्यापारिक पत्र: व्यापारिक पत्र एक प्रतिज्ञा पत्र के रूप में असुरक्षित मुद्रा बाजार विलेख होता है। ऐसी कंपनियाँ जिनका शुद्ध मूल्य कम से कम रू. 4 करोड़ हो, व्यापारिक पत्र जारी कर सकती हैं। व्यापारिक पत्र 7 दिन से लेकर 1 वर्ष तक की अवधिके लिए पाँच-पाँच लाख रूपये के मूल्य के बराबर जारी किए जा सकते हैं।


(iii) ग्राहकों से अग्रिम भुगतान: कुछ व्यवसायी क्रय ऑर्डर स्वीकार करते समय ग्राहकों से अग्रिम राशि की माँग करते है।

ऐसी अग्रिम राशि ऑर्डर की रकम का कुछ प्रतिशत होती है। ऐसी अग्रिम राशि का समायोजन ऑर्डर की पूर्ण कीमत चुकाने के समय कर दिया जाता है। ऐसी राशि पर व्यवसायी द्वारा कोई ब्याज नहीं चुकाया जाता।


(iv) अर्जित व्ययः ऐसे व्यय जो अर्जित हो चुके हैं लेकिन भुगतान के लिए देया नहीं हुए हैं, अर्जित व्यय कहलाते हैं। मजदूरी तथा वेतन का भुगतान प्राय: उस महीने से अगले महीने में किया जाता है जिसमें से सेवाएँ प्रदान की गई थी। इसी प्रकार, ब्याज का भुगतान निश्चित अवधि के पश्चात् किया जात है, जबकि मूल राशि का उपयोग लगातार किया जाता रहता है। ऐसी ही कर का भुगतान लाभ कमाने के काफी समय पश्चात् किया जाता है। अतः अर्जित व्ययों के भुगतान में विलंब अल्पकालीन वित्त का साधन होता है।


(v) दलाली दलाली एक ऐसी व्यावसायिक क्रिया है जिसमें एक वित्तीय संस्था फर्म के प्राप्यों को प्राप्त करने का उत्तरदायित्व लेती है। दूसरे शब्दों में, दलाल एक वित्तीय संस्था होती है जो उधार विक्रय के कारण उत्पन्न ऋणों के प्रबंधन तथा वित्त पोषण से संबंधित सेवाएँ प्रदान करती है। दलाल प्राप्यों के बदले उद्यमी को 70 से 80 प्रतिशत राशि अग्रिम दे देता है तथा व्यापारिक बैंकों की दर से अधिक दर पर ब्याज प्राप्त करता है। देय तिथि पर शेष राशि दलाली काटने के पश्चात दलाल द्वारा उद्यमी को चुका दी जाती है। इस प्रकार, दलाली अल्पकालीन वित्त का साधन होती है।


(vi) वित्तीय संस्थाओंसे अल्पकालीन ऋण: इसके अंतर्गत वित्तीय संस्था द्वारा एक निश्चित रकम एक निश्चित अवधि के लिए उद्यमी को उधार दे दी जाती है।

की कुल राशि ब्याज लिया जाता है तथा यह ब्याज दर नकद साख व अधिविकर्ष की तुलना में कम होती है। देय तिथि पर व्यवसायी व्याज सहित ऋण की राशि वापिस कर देता है।



उद्यमिता विकास कार्यक्रम की अवधारणा


उद्यमिता विकास कार्यक्रम एक ऐसा कार्यक्रम होता है जिसके द्वारा एक व्यक्ति की उद्यमिता के उद्देश्य की प्राप्ति की इच्छा को मजबूत किया जाता है तथा उसे एक उद्यम को चलाने के लिए आवश्यक कौशल एवं योग्यता प्रदान करने का प्रयास किया जाता है। एक कार्यक्रम जिसके द्वारा संभावित उद्यमियों को प्रोत्साहित करने,

उन्हें अपने अभिप्रेरणा स्तर को समझने, उद्यमिता पर उनके प्रभाव को समझने जैसे उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है, उसे उद्यमिता विकास कार्यक्रम कहा जाता है।


उद्यमिता विकास को एक संगठित एवं व्यवस्थित विकास माना जाता है। आजकल यह औद्योगिक विकास तथा बेरोजगारी की समस्या से निपटने का एक उपकरण माना जाता है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि व्यक्तियों के दृष्टिकोण को परिवर्तित किया जा सकता है, उनके विचारों को क्रियाओं का रूप दिया जा सकता है। यह कार्य सुव्यवस्थित तथा संगठित ढंग से संभव हैं। एन. पी. सिं के अनुसार, “यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है। यह एक प्रक्रिया है जिसमें 


(i) संभावित उद्यमियों के अभिप्रेरणा, ज्ञान एवं कौशल को विकसित करके किया जाता है।


(ii) उद्यमिता व्यवहार के अंतर्गत उनकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को समझने एवं सुझाने का प्रयास किया जाता है।


(iii) अपनी उद्यमियों की क्रियाओं द्वारा नए उद्यम की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया जाता है।" 


अन्य शब्दों में इसका अर्थ एक व्यक्ति की उद्यमिता को विकसित करने चमकाने का प्रयास से है, जिससे कि वह अपने उद्यम को स्थापित करके उसे सफलतापूर्वक चला सकें। इसमें एक व्यक्ति को अपना उद्यम शुरू करने के लिए आवश्यक कौशल एवं ज्ञान से परिचित करवाना होता है।