छोटे व्यवसाय का बड़े व्यवसाय से संबंध - small business to big business

छोटे व्यवसाय का बड़े व्यवसाय से संबंध - small business to big business


लघु आकार की व्यावसायिक इकाइयों का बड़े स्तर की व्यावसायिक इकाइयों से संबंध निम्न प्रकार से वर्णित किया जा सकता है:


(1) प्रतियोगी : लघु व्यवसाय कुछ विशेष उत्पादों तथा क्षेत्रों में बड़े व्यवसायों के साथ भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। कुछ विशेष क्षेत्र तथा उद्योग इस प्रकार से हैं- ईटें तथा टाइल्स, बेकरी उत्पाद, खाद्य एवं नाशवान प्रकृति के उत्पाद, संरक्षित फलों के जूस, छोटे इंजीनियरिंग उत्पाद आदि ।


(2) पूरक : लघु व्यवसाय, बड़े व्यवसायों द्वारा किए जाने वाले उत्पादन के पूरक के रूप में उनकी सहायता करते हैं। बहुत सारे बड़े वयवसाय हर क्षेत्र में कार्यरत नहीं होतो जहाँ-जहाँ कमी होती है, उन क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय पूरक के रूप में कार्य करते हैं।


(3) अनुपूरक: छोटे व्यवसाय, बड़े वयवसायों के अनुपूरक होने के साथ-साथ इनके सहयोगी के रूप में भी कार्य करते हैं। संसार में बहुत सारे बड़े व्यवसायों के लिए उनके मुख्य उत्पादों के निर्माण किए जाने वाले उत्पाद के लिए कुछ मध्यवर्ती उत्पाद छोटे व्यवसायों द्वारा ही तैयार किए जाते है।


(4) पहल : बड़े व्यवसायों द्वारा कमाएँ जा रहे लाभ से प्रेरित होकर कई छोटे उद्यमी भी व्यवसाय स्थापित करने की पहल करते हैं। प्रकार वे बड़े व्यवसायों को समर्थन तो देते ही हैं, अपितु स्वयं भी अच्छा लाभ लेने में समर्थ होते हैं।


(5) सेवाएँ प्रदान करना : बड़े व्यवसायों द्वारा बनाए व बेचे जा रहे उत्पादों को छोटे व्यवसाय विभिन्न सेवाएँ तथा मरम्मत आदि की दुकानें स्थापित करके समर्थन देते हैं ।

भारतजैसे देश में तो इस तरह के छोटे व्यवसाय की संख्या बहुत अधिक है। विभिन्न क्षेत्रों जैसे रेडियो, टी वी, फ्रिज, एसी घड़ियों, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार, आदि की सेवाओं तथा मरम्मत का कार्य मुख्य रूप से छोटे व्यवसायों द्वारा ही किया जाता है। 


(6) जॉबिंग : कुछ विशेष बड़े उद्योग के कुछ हिस्से तैयार करने के लिए छोटे व्यवसायों पर निर्भर करते है तथा उनकी सहायता लेते हैं। वे कई बार इसके लिए जॉबिंग का प्रयोग करते हैं जिसमें वे छोटे व्यवसायी को अपना समान तैयार करवाने के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान करते हैं। छोटे व्यवसायी उनके आदेशनुसार एवं आवश्यकतानुसार उत्पाद तैयार करते हैं, जिसे बड़े व्यवसायी अपने मुख्य उत्पाद में प्रयोग करके अंतिम उत्पाद तैयार करते हैं।


(7) व्यावसायिक कार्यों में सहायता: कुछ छोटे व्यवसायियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का बाजारीकरण बड़ेव्यवसायियों द्वारा किया जाता है। वे अपना उत्पाद तैयार करते बड़े व्यवसायियों को बेच देते हैं तथा वे व्यवसायी उनके उत्पाद को अपने नाम के अंतर्गत बाजार में बेचते है। बहुत सारे छोटे उत्पाद, जैसे-जूते, फ्रिजी, स्टैबलाइजर आदि छोटे व्यवसायी बड़ी कंपनियों की मदद से बेचते हैं।


(8) सहायक के कार्य : बहुत से बड़े व्यवसायी अपने मुख्य उत्पाद के कलपूर्जे आदि छोटे व्यावसायियों से तैयार करवाते हैं तथा उसके पश्चात उनका संयोजन करते अपने अपने नाम के अंतर्गत उस तैयार उत्पाद को बाजार में बेचते हैं। उदाहरण के लिए, कार उद्योग में कारों के विभिन्न कलपूर्जों का निर्माण सहायक इकाइयाँ करती हैं तथा उसके पश्चात उनका उपयोग मुख्य उत्पाद (कार) के लिए कर लिया जाता है।


इस प्रकार अंत में यह कहा जा सकता है कि लघु व्यवसाय का बड़े आकार के व्यवसाय से गहरा संबंध होता है। लघु व्यवसाय बड़े व्यवसायों को सफलतापूर्वक ढंग से चलाने में भी सहायता करते हैं। वे एक पूरक के रूप में कार्य करते हैं। वे बड़े व्यवसाय के मुख्य उत्पाद के विभिन्न हिस्सों (कलपुर्जों) को तैयार करते हैं। ऐसा कार्य देश में बहुत बड़े स्तर पर छोटे व्यवसायियों द्वारा किया जा रहा है। इस प्रकार से छोटे उद्योग स्थानीय साधनों एवं संसाधनों का भी प्रयोग करते हैं तथा रोजगार का सृजन भी करते हैं। बड़े व्यवसाय की सफलता में छोटे व्यवसायों की भूमिका को विश्वस्तर पर मान्यता दी जाती है। बहुत से बड़े व्यवसाय अपने अनेकों छोटे कार्यों के लिए छोटे व्यवसायियों पर ही निर्भर रहते हैं। इस प्रकार से यह भी कहा जा सकता है कि दोनों ही एक-दूसरे की सफलता में सहायक हैं। दोनोंको अस्तित्व कुछ हद तक एक-दूसरेपर भी निर्भर करता है। अत: देश के औद्योगिक विकास के लिए दोनों ही तरह के व्यवसायियों को एक दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करना चाहिए। इस से दोनो को ही लाभ प्राप्त होंगे तथा देश का भी आर्थिक विकास होगा।