सिस्टम एप्रोच - system approach

सिस्टम एप्रोच - system approach


प्रबंधन के क्षेत्र में अपने-अपने ध्येय (Goal) को प्राप्त करने हेतु विचारों का समन्वयन जो कि इनटेरेक्टिव प्रकृति एवं संस्था के बाह्य एवं आंतरिक कैक्टर्स पर केंद्रित होता है वह सिस्टम एप्रोच कहलाता है। इसकी शुरूआत सन् 1960 में हुई थी। एप्रोच में कार्यरत संस्था के ध्येय (Goal) को प्राप्त करने हेतु संस्था में कार्यरत सभी लोगों के अलग-अलग विचारों को कुशल प्रबंधन दृष्टिकोण से एकजुट करने की कोशिश किया जाता है। समान्यत: इस सिस्टम एप्रोच का उपयोग व्यवसाय को लाभ पहुंचाने वाले कारकों को प्रभावित करने वाले तत्वों (Elements) का विश्लेषण के लिए किया जाता है। सिस्टम एप्रोच के क्षेत्र में कार्य करने वाले विद्वान लुडविंग वॉन बेटालानपिट (Ludwing von Bertalanfty) लॉरेंब जे.

हैंडरसन (Lawrence J. Henderson), डब्ल्यू. जी. स्कॉट (W.G. Scott ), डेनियल कॉट्रज (Denial Katz), रॉर्बट एल.काह्न (Robert L. Kahn), डब्ल्यू. बॉकली ( W. Buckley) एवं जे. डी. थॉम्पसन (J.D. Thompson) हैं।


उक्त विद्यानों ने यह देखा कि कोई भी संस्था एक संघटनात्मक (ऑर्गेनिक) एवं ओपन सिस्टम हैं जो कि आंतरिक एवं पारस्परिक भाग अर्थात उसके सब सिस्टमों से मिलकर बनी होती है। सिस्टम एप्रोच में सभी सब सिस्टमों का संकलन एक क्रम बद्ध रूप में होता है। अतः यह कहा जा सकता है कि किसी भी संस्था के लिए सिस्टम एप्रोच अत्यांतावश्यक है। सिस्टम एप्रोच उपलब्ध सब सिस्टम यानी किसी बड़े सिस्टम के छोटे-2 भागों के पदक्रमानुसार से मिलकर बनी होती है।


उदा. के लिए विश्व को एक सिस्टम माना जा सकता है जिसमें शामिल विभिन्न राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएं सब सिस्टम कही जा सकती है। यह प्रत्येक अर्थव्यवस्थाएं अपने 2 विभिन्न इंडस्ट्रीयों से मिलकर बनी होती है एवं प्रत्येक इंड्रस्टी अपने 2 फर्मों से मिलकर बनी होती है एवं प्रत्येक फर्म प्रोडक्शन, मार्केटिंग, फाइनेंस, अकाउटिंग आदि विभागों से मिलकर बनी होती है।